{"_id":"61b4eb6bc5488861ae7adaeb","slug":"housing-schemes-did-not-get-off-the-ground-from-the-files-saharanpur-news-mrt568522072","type":"story","status":"publish","title_hn":"फाइलों से धरातल पर नहीं उतरीं आवासीय योजनाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फाइलों से धरातल पर नहीं उतरीं आवासीय योजनाएं
विज्ञापन
सहारनपुर। सहारनपुर विकास प्राधिकरण को स्थापित हुए 20 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। इन 20 वर्षों में प्राधिकरण ने एक भी ऐसा काम नहीं किया है, जिसे वह अपनी उपलब्धि बता सकें। कई बार आवासीय योजनाएं लाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा, लेकिन योजनाएं फाइलों से धरातल पर नहीं उतर सकीं।
विकास प्राधिकरण ने करीब तीन वर्ष पहले सर्किट हाउस रोड पर साहिबजी नगर में पांच मंजिला आवासीय भवन बनाने की योजना तैयार की थी, जिसमें 56 फ्लैट बनाए जाने थे। फ्लैट की कीमत 45 लाख रुपये रखी गई थी। बिल्डिंग और फ्लैट्स का नक्शा तैयार करा लिया गया था। विकास प्राधिकरण ने इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे थे। लेकिन योजना साकार नहीं हो सकी। इसके अलावा विकास प्राधिकरण ने अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत चार साल पहले ट्रांसपोर्टनगर में पीछे की ओर एक अलग से परिसर तैयार कर चार मंजिला इमारत बनाई थी। इसमें 48 फ्लैट तैयार किए गए थे। इनमें ज्यादातर फ्लैट वन- बीएचके वाले हैं। खास बात यह है कि फ्लैट तैयार करने में प्राधिकरण ने करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए थे, मगर एक भी फ्लैट नहीं बेचा जा सका।
जमीन उपलब्ध न होने से पीएम आवास नहीं बने
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऐसे शहरी लोगों के लिए फ्लैट तैयार किए जाने थे, जो शहर में रहते हैं, लेकिन उनके पास अपना मकान या मकान के लिए जमीन भी नहीं है। योजना को साकार करने का जिम्मा विकास प्राधिकरण पर था। कुल दो हजार फ्लैट बनाए जाने थे। योजना के तहत एक फ्लैट पर करीब छह लाख रुपये की लागत आनी थी, लेकिन पात्र व्यक्ति से करीब साढ़े चार लाख रुपये लिए जाने थे। जमीन नहीं मिलने की वजह से यह योजना भी फेल हो गई।
विज्ञापन
अधिकारी बदले व्यवस्था नहीं
विकास प्राधिकरण की व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व उपाध्यक्ष रहे ज्ञानेंद्र सिंह ने अवैध निर्माणों में संलिप्तता के चलते पांच अवर अभियंताओं पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा था। उक्त संबंध में एक बार पहले शासन के द्वारा अवर अभियंताओं के संबंध में जानकारी मांगी। शासन ने स्पष्टीकरण मांगा था, मगर अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
टीपीनगर भी पूरी तरह नहीं बसा
विकास प्राधिकरण ने करीब 11 वर्ष पहले टीपी नगर की स्थापना की थी। शहर के सभी ट्रांसपोर्टर्स को टीपी नगर में जाना था, मगर वहां बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था नहीं होने की वजह से शत प्रतिशत ट्रांसपोर्टर वहां नहीं जा सके हैं।
प्राधिकरण की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। हम लगातार शिविर लगाकर लोगों को मानचित्र स्वीकृत करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, जो प्रकरण लंबित हैं उनको भी निस्तारित किया जा रहा है। टीपीनगर में सुविधाएं दी जा रही हैं। नई आवासीय योजना लाने पर विचार चल रहा है।
आशीष कुमार, उपाध्यक्ष, एसडीए।
विज्ञापन
विकास प्राधिकरण ने करीब तीन वर्ष पहले सर्किट हाउस रोड पर साहिबजी नगर में पांच मंजिला आवासीय भवन बनाने की योजना तैयार की थी, जिसमें 56 फ्लैट बनाए जाने थे। फ्लैट की कीमत 45 लाख रुपये रखी गई थी। बिल्डिंग और फ्लैट्स का नक्शा तैयार करा लिया गया था। विकास प्राधिकरण ने इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे थे। लेकिन योजना साकार नहीं हो सकी। इसके अलावा विकास प्राधिकरण ने अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत चार साल पहले ट्रांसपोर्टनगर में पीछे की ओर एक अलग से परिसर तैयार कर चार मंजिला इमारत बनाई थी। इसमें 48 फ्लैट तैयार किए गए थे। इनमें ज्यादातर फ्लैट वन- बीएचके वाले हैं। खास बात यह है कि फ्लैट तैयार करने में प्राधिकरण ने करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए थे, मगर एक भी फ्लैट नहीं बेचा जा सका।
विज्ञापन
जमीन उपलब्ध न होने से पीएम आवास नहीं बने
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऐसे शहरी लोगों के लिए फ्लैट तैयार किए जाने थे, जो शहर में रहते हैं, लेकिन उनके पास अपना मकान या मकान के लिए जमीन भी नहीं है। योजना को साकार करने का जिम्मा विकास प्राधिकरण पर था। कुल दो हजार फ्लैट बनाए जाने थे। योजना के तहत एक फ्लैट पर करीब छह लाख रुपये की लागत आनी थी, लेकिन पात्र व्यक्ति से करीब साढ़े चार लाख रुपये लिए जाने थे। जमीन नहीं मिलने की वजह से यह योजना भी फेल हो गई।
विज्ञापन
अधिकारी बदले व्यवस्था नहीं
विकास प्राधिकरण की व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व उपाध्यक्ष रहे ज्ञानेंद्र सिंह ने अवैध निर्माणों में संलिप्तता के चलते पांच अवर अभियंताओं पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा था। उक्त संबंध में एक बार पहले शासन के द्वारा अवर अभियंताओं के संबंध में जानकारी मांगी। शासन ने स्पष्टीकरण मांगा था, मगर अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
टीपीनगर भी पूरी तरह नहीं बसा
विकास प्राधिकरण ने करीब 11 वर्ष पहले टीपी नगर की स्थापना की थी। शहर के सभी ट्रांसपोर्टर्स को टीपी नगर में जाना था, मगर वहां बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था नहीं होने की वजह से शत प्रतिशत ट्रांसपोर्टर वहां नहीं जा सके हैं।
प्राधिकरण की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। हम लगातार शिविर लगाकर लोगों को मानचित्र स्वीकृत करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, जो प्रकरण लंबित हैं उनको भी निस्तारित किया जा रहा है। टीपीनगर में सुविधाएं दी जा रही हैं। नई आवासीय योजना लाने पर विचार चल रहा है।
आशीष कुमार, उपाध्यक्ष, एसडीए।