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जान पर खेलकर मरीजों को पहुंचा रहे अस्पताल

Sat, 24 Apr 2021 11:07 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 11:07 PM IST
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Hospitals are reaching patients without caring for their lives
- अहमद, एंबुलेंस पायलट - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना योद्धा हर मोर्चे पर डटे हैं, लोगों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद चल रही है। ऐसी ही कोरोना योद्धा एंबुलेंस पर तैनात पायलट और ईएमटी भी हैं, जो अपनी जान पर खेलकर कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने में लगे हैं। मरीजों के साथ ही शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाना पड़ रहा है। एक जगह का मरीज अस्पताल पहुंचाते हैं, तभी दूसरी जगह जाने की सूचना मिल जाती है। एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी और पायलटों में कोई बिजनौर का रहने वाला है तो कोई संभल का। सैकड़ों किलोमीटर दूर होने के कारण जल्दी से अपने परिवार तक से नहीं मिल पा रहे हैं। पेश है ऐसे कोरोना योद्धाओं पर आधारित रिपोर्ट...
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करना पड़ता है इन नियमों का पालन
कोरोना संक्रमित को कोविड अस्पताल पहुंचाने के दौरान एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी और पायलटों को विशेष सावधानी रखनी पड़ती है। मरीज को ले जाते समय पीपीई किट पहननी होती है तो, अस्पताल में मरीज को पहुंचाने पर सैनिटाइजेशन कराना होता है। खुद को और एंबुलेंस को भी सैनिटाइज करना होता है।
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रात में 12 बजे मिला खाने का समय
सदर क्षेत्र की एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी कपिल कुमार बिजनौर जिलें के अफजलगढ़ क्षेत्र के रहने वाले हैं, जबकि इसी एंबुलेंस के पायलट भानू संभल के रहने वाले हैं। कपिल ने बताया कि उनके माता पिता के अलावा पत्नी और भाई बहन परिवार में हैं। दिन में छह से सात और रात में दो से तीन मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचा रहे हैं। शुक्रवार रात तो 12 बजे खाना खाने का समय मिला। 10 से 15 दिन में अपने परिवार के पास जा पाते हैं।
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हर समय रहना पड़ता है तैयार
सर्किट हाउस क्षेत्र की एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी कामेंद्र और पायलट अहमद बताते हैं कि शहरी क्षेत्र में होम आइसोलेशन में रहने वाले संक्रमितों को हालत बिगड़ने पर राजकीय मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल पहुंचाने में लगे हैं। भानू बताते हैं कि दिन या रात जब भी कॉल आती है तो एंबुलेंस लेकर जाना होता है।

कंट्रोल रूम से रखी जा रही नजर
102 और 108 एंबुलेंस के जिला प्रभारी कुलदीप कुमार का कहना है कि कंट्रोल रूम से एंबुलेंसों के संचालन पर नजर रहती है। जिले में 17 एंबुलेंस संचालित हैं। प्रतिदिन जितनी कॉल आती हैं, उनसे संबंधित मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भेजी जाती है।

- कुलदीप कुमार, जिला प्रभारी 108, 102 एंबुलेंस

- कुलदीप कुमार, जिला प्रभारी 108, 102 एंबुलेंस- फोटो : SAHARANPUR

- कपिल कुमार, ईएमटी, एंबुलेंस

- कपिल कुमार, ईएमटी, एंबुलेंस- फोटो : SAHARANPUR

- भानू, एंबुलेंस पायलट

- भानू, एंबुलेंस पायलट- फोटो : SAHARANPUR

- कामेंद्र , एंबुलेंस ईएमटी

- कामेंद्र , एंबुलेंस ईएमटी- फोटो : SAHARANPUR

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