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शांकभरी सिद्धपीठ पर शुरू हुआ होली मेला
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 05 Mar 2017 11:59 PM IST
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मां शाकंभरी के दर्शनों को उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के बेहट में विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में होली मेला प्रारंभ हो गया। रविवार को मेले के प्रथम दिन भक्तों ने आदिशक्ति मां शाकंभरी देवी के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया और परिवार की सुख समृद्धि के लिए मन्नत मांगी।
मां के जयकारों से गूंज रही शिवालिक पहाड़ियों में वातावरण भक्तिमय बना हुआ था। बता दें कि शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में वर्ष में तीन बड़े मेले लगता है।
धार्मिक लिहाज से होली मेला काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। रविवार को मेले के प्रथम दिन मां के दर्शनों के लिए सिद्धपीठ में सुबह से ही भक्तों का जाना शुरू हो गया था। माता के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालुु दरबार तक पहुंच रहे थे।
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मां के जयकारों से समूची शिवालिक पहाड़ियां गूंज रही थी, जिससे वातावरण भक्तिमय बना हुआ था। श्रद्धालु पहले बाबा भूरादेव और उसके बाद आदिशक्ति मां शाकंभरी देवी के दर्शन कर रहे थे। धार्मिक मान्यता है कि बाबा भूरादेव के दर्शनों के बिना मां के दर्शन अधूरे माने जाते है।
भक्तों ने मां के दरबार में मत्था टेका और परिवार की सुख समृद्धि के लिए मन्नत मांगी। थाना पुलिस के अलावा मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार द्वारा भी व्यवस्था बनाने में अपने निजी कर्मचारी लगाए गए है। ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो सके।
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मां के जयकारों से गूंज रही शिवालिक पहाड़ियों में वातावरण भक्तिमय बना हुआ था। बता दें कि शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में वर्ष में तीन बड़े मेले लगता है।
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धार्मिक लिहाज से होली मेला काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। रविवार को मेले के प्रथम दिन मां के दर्शनों के लिए सिद्धपीठ में सुबह से ही भक्तों का जाना शुरू हो गया था। माता के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालुु दरबार तक पहुंच रहे थे।
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मां के जयकारों से समूची शिवालिक पहाड़ियां गूंज रही थी, जिससे वातावरण भक्तिमय बना हुआ था। श्रद्धालु पहले बाबा भूरादेव और उसके बाद आदिशक्ति मां शाकंभरी देवी के दर्शन कर रहे थे। धार्मिक मान्यता है कि बाबा भूरादेव के दर्शनों के बिना मां के दर्शन अधूरे माने जाते है।
भक्तों ने मां के दरबार में मत्था टेका और परिवार की सुख समृद्धि के लिए मन्नत मांगी। थाना पुलिस के अलावा मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार द्वारा भी व्यवस्था बनाने में अपने निजी कर्मचारी लगाए गए है। ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो सके।