{"_id":"5e5d4bc88ebc3ec54b2cf7c0","slug":"holachak-felt-beware-of-negative-forces-saharanpur-news-mrt471678968","type":"story","status":"publish","title_hn":"होलाष्टक लगा, नकारात्मक शक्तियों से रहें सावधान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
होलाष्टक लगा, नकारात्मक शक्तियों से रहें सावधान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। होलिका दहन से आठ दिन पूर्व सोमवार को होलाष्टक लग गया। दोपहर 12:52 से शुरू हुआ होलाष्टक नौ मार्च की रात्री 11:17 बजे होलिका दहन के बाद खत्म होगा। इन आठ दिनों में कोई शुभ कार्य नहीं होगा। ज्योतिषार्यों के मुताबिक इन आठ दिनों में गर्भवती महिलाएं नदियां पार न करें और नवविवाहिताएं अपने पिता के घर पहली होली मनाएं।
ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि धर्म शास्त्रों में माना गया है कि जो व्यक्ति होलाष्टक के दिनों में किसी का बुरा करता है तो उसे बड़े पाप का भागेदारी बनना पड़ता है। सनातम धर्म में होलाष्टक को शुभ नहीं माना गया है। फाल्गुन कृष्ण शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक माना गया है। सोमवार से होलाष्टक शुरू हो गया है। धर्म शास्त्रों के अनुसार हिरण्यकश्यप ने इन आठ दिनों में भक्त प्रहलाद को अत्यधिक कष्ट दिया था। इसीलिए सनातम धर्म को मानने वाले लोग इस समय को कष्टकारी दिनों के रूप में मानते हैं। इन आठ दिनों के अंदर कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। ऐसे में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत आदि कार्य नहीं करने चाहिए। विवाह के पश्चात पहली बार होली मनाने वाले नवविवाहिताओं को यह पर्व अपने पिता के घर मनाना चाहिए। पहली बार पर्व ससुराल में मनाने से पति और उनके परिवार संकट आ सकता है। गर्भवती महिला को होलाष्टक के बीच नदियों को पार नहीं करना चाहिए। ऐसे में तांत्रिक कर्म अधिक होते हैं और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव रहता है। इन दिनों में देवताओं की अत्यधिक पूजा करना चाहिए। तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता और आचार्य संजीव शास्त्री ने बताया कि इन दिनों में अपने घर में लोबान, गूगल, पीली सरसों को जलते हुए उपले पर रखकर सायंकाल को धूनी दें। इसके साथ ही सुबह और शाम को प्रभु की आराधना करें।
विज्ञापन
ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि धर्म शास्त्रों में माना गया है कि जो व्यक्ति होलाष्टक के दिनों में किसी का बुरा करता है तो उसे बड़े पाप का भागेदारी बनना पड़ता है। सनातम धर्म में होलाष्टक को शुभ नहीं माना गया है। फाल्गुन कृष्ण शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक माना गया है। सोमवार से होलाष्टक शुरू हो गया है। धर्म शास्त्रों के अनुसार हिरण्यकश्यप ने इन आठ दिनों में भक्त प्रहलाद को अत्यधिक कष्ट दिया था। इसीलिए सनातम धर्म को मानने वाले लोग इस समय को कष्टकारी दिनों के रूप में मानते हैं। इन आठ दिनों के अंदर कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। ऐसे में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत आदि कार्य नहीं करने चाहिए। विवाह के पश्चात पहली बार होली मनाने वाले नवविवाहिताओं को यह पर्व अपने पिता के घर मनाना चाहिए। पहली बार पर्व ससुराल में मनाने से पति और उनके परिवार संकट आ सकता है। गर्भवती महिला को होलाष्टक के बीच नदियों को पार नहीं करना चाहिए। ऐसे में तांत्रिक कर्म अधिक होते हैं और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव रहता है। इन दिनों में देवताओं की अत्यधिक पूजा करना चाहिए। तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता और आचार्य संजीव शास्त्री ने बताया कि इन दिनों में अपने घर में लोबान, गूगल, पीली सरसों को जलते हुए उपले पर रखकर सायंकाल को धूनी दें। इसके साथ ही सुबह और शाम को प्रभु की आराधना करें।
विज्ञापन