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हिन्दी दिवस विशेष : सहारनपुर के पहले सुविख्यात कवि हैं हित हरिवंश
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-- हित हरिवंश
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। सहारनपुर की धरती ने पद्मश्री कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर जैसे साहित्यकार जन्मे हैं, मगर अभी तक प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार सहारनपुर का सबसे पहला लेखक या कवि यदि किसी को माना जाए तो वह हित हरिवंश हैं, उन्होंने 500 साल पूर्व राधा और कृष्ण की भक्ति को शब्दों की माला में पिरोकर पेश किया। इसके प्रमाण संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रकाशित हमारा सहारनपुर पुस्तक में मिलते हैं।
पुस्तक के लेखक राजीव उपाध्याय %यायावर% बताते हैं कि हित हरिवंश भक्तिकाल में कृष्णाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि थे। इन्हें सोलहवीं शताब्दी के प्रमुख कवियों में भी गिना जाता है। उनका जन्म विक्रम संवत 1530 में हुआ। वह करीब 32 वर्ष देवबंद में रहे थे। चूंकि पिता पंडित व्यास मिश्र संस्कृत के बड़े विद्वान थे। हित हरिवंश की शिक्षा घर में ही हुई। पिता ही इनके गुरु थे। हित हरिवंश संस्कृत के साथ ही बृज भाषा के बड़े ज्ञाता थे। देवबंद में रहते हुए हित हरिवंश ने ठाकुर श्री राधा नवरंगी लाल मंदिर की स्थापना की। उन्होंने सेवा कुंज वृंदावन में राधा वल्लभ का विगृह स्थापित किया। हित हरिवंश ने वृंदावन में श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों के चिन्हिकरण का कार्य किया। रास मंडल, सेवा कुंज, वंशीवट, धीर समीर, मान सरोवर, हिंडोल स्थल, श्रृंगार वट, वन लीला आदि स्थलों का परिचय लोगों को कराया।
हित हरिवंश की प्रमुख कृतियां
बृज भाषा के साथ ही संस्कृत में भी कई रचनाएं उन्होंने लिखीं। संस्कृत भाषा में राधा सुधा निधि लिखी, इसमें 270 श्लोक हैं। श्लोकों में राधा की वंदना, उपासना, सेवा, पूजा, भक्ति, सौंदर्य का वर्णन किया है। हित चौरासी बृज भाषा में लिखी है। इसे राधा वल्लभ संप्रदाय का मूल ग्रंथ भी माना जाता है। यमुनाष्टक, स्पुटवाणी भी इनकी बृज भाषा की रचनाएं हैं।
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पुस्तक के लेखक राजीव उपाध्याय %यायावर% बताते हैं कि हित हरिवंश भक्तिकाल में कृष्णाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि थे। इन्हें सोलहवीं शताब्दी के प्रमुख कवियों में भी गिना जाता है। उनका जन्म विक्रम संवत 1530 में हुआ। वह करीब 32 वर्ष देवबंद में रहे थे। चूंकि पिता पंडित व्यास मिश्र संस्कृत के बड़े विद्वान थे। हित हरिवंश की शिक्षा घर में ही हुई। पिता ही इनके गुरु थे। हित हरिवंश संस्कृत के साथ ही बृज भाषा के बड़े ज्ञाता थे। देवबंद में रहते हुए हित हरिवंश ने ठाकुर श्री राधा नवरंगी लाल मंदिर की स्थापना की। उन्होंने सेवा कुंज वृंदावन में राधा वल्लभ का विगृह स्थापित किया। हित हरिवंश ने वृंदावन में श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों के चिन्हिकरण का कार्य किया। रास मंडल, सेवा कुंज, वंशीवट, धीर समीर, मान सरोवर, हिंडोल स्थल, श्रृंगार वट, वन लीला आदि स्थलों का परिचय लोगों को कराया।
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हित हरिवंश की प्रमुख कृतियां
बृज भाषा के साथ ही संस्कृत में भी कई रचनाएं उन्होंने लिखीं। संस्कृत भाषा में राधा सुधा निधि लिखी, इसमें 270 श्लोक हैं। श्लोकों में राधा की वंदना, उपासना, सेवा, पूजा, भक्ति, सौंदर्य का वर्णन किया है। हित चौरासी बृज भाषा में लिखी है। इसे राधा वल्लभ संप्रदाय का मूल ग्रंथ भी माना जाता है। यमुनाष्टक, स्पुटवाणी भी इनकी बृज भाषा की रचनाएं हैं।
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