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बड़गांव पहुंच प्रदूषण से घिरी हिंडन बांटती है बीमारियां
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नदी के पुराने पुल पर ग्रामीणों द्वारा किया गया अतिक्रमण
- फोटो : SAHARANPUR
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बड़गांव में प्रदूषण से घिरी हिंडन बांट रही है बीमारियां
बड़गांव (सहारनपुर)। पहाड़ों से स्वच्छ हिंडन नदी 75 किलोमीटर के सफर पर बड़गांव क्षेत्र में पहुंची तो इसका पानी जहरीला हो गया। नदी किनारे बसे गांवों में हैंडपंपों का पानी भी दूषित है और पीला निकलता है, जो पीने योग्य नहीं है। नतीजा ये कि जिस हिंडन (हरनंदी) को कभी जीवनदायिनी कहा गया, उसका पानी जहरीला हो चुका है।
ऐसा इसलिए भी हो रहा है, क्योंकि गागलहेड़ी क्षेत्र से नागल तक कई फैक्टरियों से दूषित पानी हिंडन नदी में छोड़ा जा रहा है। गांवों से निकलने वाला गंदा पानी भी हिंडन में बहाया जाता है, जो इस नदी को प्रदूषित करता है।
वैसे हिंडन को स्वच्छ और सदानीरा बनाने के लिए कई योजनाएं चलीं। एनजीटी के आदेश पर इसके किनारों को कब्जा मुक्त कराकर पौधरोपण भी किया गया, लेकिन बेहतर परिणाम नहीं निकले। हिंडन के प्रदूषण का असर इतना घातक हुआ कि किनारे बसे गांवों का 120 फीट गहराई तक पानी पीने योग्य नहीं रहा। ग्रामीणों को गंभीर बीमारियां तक हो गईं। प्रदूषण की वजह से ही प्रशासन ने लाल निशान लगाकर क्षेत्र के गांवों से सैकड़ों हैंडपंप उखड़वाए, लेकिन शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं हुई। वहीं, बड़गांव क्षेत्र में भी हिंडन नदी की जमीन पर अतिक्रमण है और इसके पुल पर भी लोगों ने बिटोडे़ तक रख लिए हैं।
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बाबा मंगल गिरि ने की थी भूख हड़ताल
हिंडन नदी को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर बड़गांव क्षेत्र में आंदोलन भी हुए हैं। कई साल पूर्व बाबा मंगल गिरि ने ग्रामीणों के साथ भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन तक किए थे। बड़गांव के अलावा महेशपुर, शिमलाना और भगवानपुर आदि में यह आंदोलन चला था, लेकिन उसके बाद भी नतीजा कुछ नहीं निकला।
ये हैं प्रभावित गांव
बड़गांव, महेशपुर, शिमलाना, सहजी, शब्बीरपुर, भगवानपुर, कुतबामाजरा, अंबेहटाचांद, सांवतखेड़ी, दल्हेड़ी, चंदपुर, नन्हेड़ा खुर्द एवं कला चिराऊ, बहेड़ा, सिसौनी, सिसौना जमालपुर, पीपलों, रत्नहेड़ी, खुदाबक्शपुर माजरा , बड़ूली, नयागांव, झबीरन, कातला, लोटनी, जड़ौदा पांडा आदि गांव दूषित जल से प्रभावित हैं।
ग्रामीण बोले, पशुओं को भी होता है नुकसान
गांव महेशपुर के ग्राम प्रधान कमल सिंह का कहना है कि अगर मानव या कोई भी पशु भूलवश हिंडन नदी के पानी से होकर गुजरता है तो उसके शरीर पर एलर्जी हो जाती है। नदी के पानी को अगर खेतों या पेड़ों में लगाया जाता है तो वे भी सूख जाते हैं।
बड़गांव के ग्राम प्रधान शिवकुमार राणा का कहना है कि हैंडपंपों में आ रहे प्रदूषित पानी को देखते हुए, शासन ने टंकी बनवाने के लिए सर्वे कराया, मगर अभी तक टंकी निर्माण शुरू नहीं हो सका। कई हैंड़पंप भी रिबोर होने के लिए चिह्नित हुए थे वे भी अभी तक नहीं हो पाये हैं।
शिमलाना के ग्राम प्रधान काक्का राणा का कहना है कि नदी की जमीन पर अतिक्रमण करके गन्ना, चहरी की फसल बोई जा रही है तो, किसी ने पोपुलर, यूकेलिप्टस के पेड़ लगाए हुए है। किनारे बसे गांवों से निकले वाला गन्दा पानी भी नदी में आकर गिर रहा है।
भाजयुमो के मंडल उपाध्यक्ष विकास राणा का कहना है उन्होंने आईआईटी रुड़की, प्रदूषण नियंत्रण विभाग से लेकर मुख्यमंत्री तक हिंडन नदी के प्रदूषण का मुद्दा उठाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। नदी में बहने वाले जल का प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।
- अधर में लटकी जांच, सिंचाई विभाग से नहीं आया जवाब
सहारनपुर। हिंडन नदी किनारे पर टपरी में शराब फैक्टरी के नवनिर्माण को लेकर जांच अधर में लटक गई है। मामले में सिंचाई विभाग से कुछ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है, जिसके लिए उपजिलाधिकारी सदर ने सिंचाई विभाग को पत्र भेजा, लेकिन उसका जवाब ही नहीं आया। अभिलेखों में हिंडन नदी टपरी में कहां है, इसको लेकर भी अभी तक कोई निष्कर्ष सामने नहीं आ सका है। जांच कर रहे उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग से जवाब आने का इंतजार है।
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बड़गांव (सहारनपुर)। पहाड़ों से स्वच्छ हिंडन नदी 75 किलोमीटर के सफर पर बड़गांव क्षेत्र में पहुंची तो इसका पानी जहरीला हो गया। नदी किनारे बसे गांवों में हैंडपंपों का पानी भी दूषित है और पीला निकलता है, जो पीने योग्य नहीं है। नतीजा ये कि जिस हिंडन (हरनंदी) को कभी जीवनदायिनी कहा गया, उसका पानी जहरीला हो चुका है।
ऐसा इसलिए भी हो रहा है, क्योंकि गागलहेड़ी क्षेत्र से नागल तक कई फैक्टरियों से दूषित पानी हिंडन नदी में छोड़ा जा रहा है। गांवों से निकलने वाला गंदा पानी भी हिंडन में बहाया जाता है, जो इस नदी को प्रदूषित करता है।
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वैसे हिंडन को स्वच्छ और सदानीरा बनाने के लिए कई योजनाएं चलीं। एनजीटी के आदेश पर इसके किनारों को कब्जा मुक्त कराकर पौधरोपण भी किया गया, लेकिन बेहतर परिणाम नहीं निकले। हिंडन के प्रदूषण का असर इतना घातक हुआ कि किनारे बसे गांवों का 120 फीट गहराई तक पानी पीने योग्य नहीं रहा। ग्रामीणों को गंभीर बीमारियां तक हो गईं। प्रदूषण की वजह से ही प्रशासन ने लाल निशान लगाकर क्षेत्र के गांवों से सैकड़ों हैंडपंप उखड़वाए, लेकिन शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं हुई। वहीं, बड़गांव क्षेत्र में भी हिंडन नदी की जमीन पर अतिक्रमण है और इसके पुल पर भी लोगों ने बिटोडे़ तक रख लिए हैं।
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बाबा मंगल गिरि ने की थी भूख हड़ताल
हिंडन नदी को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर बड़गांव क्षेत्र में आंदोलन भी हुए हैं। कई साल पूर्व बाबा मंगल गिरि ने ग्रामीणों के साथ भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन तक किए थे। बड़गांव के अलावा महेशपुर, शिमलाना और भगवानपुर आदि में यह आंदोलन चला था, लेकिन उसके बाद भी नतीजा कुछ नहीं निकला।
ये हैं प्रभावित गांव
बड़गांव, महेशपुर, शिमलाना, सहजी, शब्बीरपुर, भगवानपुर, कुतबामाजरा, अंबेहटाचांद, सांवतखेड़ी, दल्हेड़ी, चंदपुर, नन्हेड़ा खुर्द एवं कला चिराऊ, बहेड़ा, सिसौनी, सिसौना जमालपुर, पीपलों, रत्नहेड़ी, खुदाबक्शपुर माजरा , बड़ूली, नयागांव, झबीरन, कातला, लोटनी, जड़ौदा पांडा आदि गांव दूषित जल से प्रभावित हैं।
ग्रामीण बोले, पशुओं को भी होता है नुकसान
गांव महेशपुर के ग्राम प्रधान कमल सिंह का कहना है कि अगर मानव या कोई भी पशु भूलवश हिंडन नदी के पानी से होकर गुजरता है तो उसके शरीर पर एलर्जी हो जाती है। नदी के पानी को अगर खेतों या पेड़ों में लगाया जाता है तो वे भी सूख जाते हैं।
बड़गांव के ग्राम प्रधान शिवकुमार राणा का कहना है कि हैंडपंपों में आ रहे प्रदूषित पानी को देखते हुए, शासन ने टंकी बनवाने के लिए सर्वे कराया, मगर अभी तक टंकी निर्माण शुरू नहीं हो सका। कई हैंड़पंप भी रिबोर होने के लिए चिह्नित हुए थे वे भी अभी तक नहीं हो पाये हैं।
शिमलाना के ग्राम प्रधान काक्का राणा का कहना है कि नदी की जमीन पर अतिक्रमण करके गन्ना, चहरी की फसल बोई जा रही है तो, किसी ने पोपुलर, यूकेलिप्टस के पेड़ लगाए हुए है। किनारे बसे गांवों से निकले वाला गन्दा पानी भी नदी में आकर गिर रहा है।
भाजयुमो के मंडल उपाध्यक्ष विकास राणा का कहना है उन्होंने आईआईटी रुड़की, प्रदूषण नियंत्रण विभाग से लेकर मुख्यमंत्री तक हिंडन नदी के प्रदूषण का मुद्दा उठाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। नदी में बहने वाले जल का प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।
- अधर में लटकी जांच, सिंचाई विभाग से नहीं आया जवाब
सहारनपुर। हिंडन नदी किनारे पर टपरी में शराब फैक्टरी के नवनिर्माण को लेकर जांच अधर में लटक गई है। मामले में सिंचाई विभाग से कुछ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है, जिसके लिए उपजिलाधिकारी सदर ने सिंचाई विभाग को पत्र भेजा, लेकिन उसका जवाब ही नहीं आया। अभिलेखों में हिंडन नदी टपरी में कहां है, इसको लेकर भी अभी तक कोई निष्कर्ष सामने नहीं आ सका है। जांच कर रहे उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग से जवाब आने का इंतजार है।

गांव महेशपुर में प्रदुषित हुआ हिंडन का पानी- फोटो : SAHARANPUR

गंदे नाले के रुप में तब्दील हुई हिंडन- फोटो : SAHARANPUR

कमल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

काक्का राणा- फोटो : SAHARANPUR

शिव कुमार राणा- फोटो : SAHARANPUR