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हीमो डायलिसिस यूनिट को मिलेंगी दो नई मशीन
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हीमोडायलिसिस यूनिट में उपचार लेती महिला
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल में स्थापित हीमो डायलिसिस यूनिट को दो नई मशीनें मिलेंगी, जिनमें से एक मशीन की स्वीकृति मिल चुकी है। यह मशीन चुनाव के बाद जल्द पहुंचने की उम्मीद है। दूसरी मशीन के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। वर्तमान में यूनिट में 11 मशीनें लगी हैं।
जिला अस्पताल में हीमो डायलिसिस यूनिट की स्थापना 19 अगस्त 2017 में हुई थी। यूनिट की शुरुआत 11 मशीनों से की गई थी। इन मशीनों से प्रतिदिन 33 मरीजों की डायलिसिस की जा सकती है। वर्तमान में करीब 65 मरीजों की डायलिसिस यहां नियमित रूप से चल रही है। यूनिट के मैनेजर मोहित कुमार ने बताया कि समय-समय पर मरीजों की जरूरत के हिसाब से प्राइवेट चिकित्सकों को भी बुलाया जाता है। इसके अलावा शहर के कई बड़े नेफ्रोलॉजिस्ट यूनिट को फ्री सेवा दे रहे हैं। मोहित ने बताया कि अस्पताल में किडनी मरीजों को बिना किसी फीस के परामर्श से लेकर सभी जांच, जरूरी दवाएं और जरूरत पड़ने पर डायलिसिस की जाती है, जो पूरी तरह नि:शुल्क है। दो मशीने मिलने के बाद यूनिट की क्षमता और बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि एक मशीन का अप्रूवल हो चुका है, जो चुनाव के बाद कभी भी मिल सकती है। दूसरी के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
अभी तक 37,974 डायलिसिस
हीमो डायलिसिस यूनिट की 11 मशीनों से चार वर्ष पांच माह में यानी अगस्त 2017 से अभी तक 37,974 डायलिसिस की जा चुकी हैं। प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस का खर्च दो से ढाई हजार रुपये तक लिया जाता है। इस लिहाज से अभी तक करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये का इलाज मरीजों का किया जा चुका है।
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एसबीडी जिला अस्पताल की हीमो डायलिसिस यूनिट बेहतरीन कार्य कर रही है। अभी तक करीब 38 हजार डायलिसिस होना इसका प्रमाण है। सबसे खास बात यह है कि जो लोग गरीबी के कारण बिना डायलिसिस के असमय जान गंवा देते थे। वह हीमोडायलिसिस यूनिट में इलाज पाकर लंबे समय तक जी पा रहे हैं।
डॉ. रमेश चंद्रा, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल।
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जिला अस्पताल में हीमो डायलिसिस यूनिट की स्थापना 19 अगस्त 2017 में हुई थी। यूनिट की शुरुआत 11 मशीनों से की गई थी। इन मशीनों से प्रतिदिन 33 मरीजों की डायलिसिस की जा सकती है। वर्तमान में करीब 65 मरीजों की डायलिसिस यहां नियमित रूप से चल रही है। यूनिट के मैनेजर मोहित कुमार ने बताया कि समय-समय पर मरीजों की जरूरत के हिसाब से प्राइवेट चिकित्सकों को भी बुलाया जाता है। इसके अलावा शहर के कई बड़े नेफ्रोलॉजिस्ट यूनिट को फ्री सेवा दे रहे हैं। मोहित ने बताया कि अस्पताल में किडनी मरीजों को बिना किसी फीस के परामर्श से लेकर सभी जांच, जरूरी दवाएं और जरूरत पड़ने पर डायलिसिस की जाती है, जो पूरी तरह नि:शुल्क है। दो मशीने मिलने के बाद यूनिट की क्षमता और बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि एक मशीन का अप्रूवल हो चुका है, जो चुनाव के बाद कभी भी मिल सकती है। दूसरी के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
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अभी तक 37,974 डायलिसिस
हीमो डायलिसिस यूनिट की 11 मशीनों से चार वर्ष पांच माह में यानी अगस्त 2017 से अभी तक 37,974 डायलिसिस की जा चुकी हैं। प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस का खर्च दो से ढाई हजार रुपये तक लिया जाता है। इस लिहाज से अभी तक करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये का इलाज मरीजों का किया जा चुका है।
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एसबीडी जिला अस्पताल की हीमो डायलिसिस यूनिट बेहतरीन कार्य कर रही है। अभी तक करीब 38 हजार डायलिसिस होना इसका प्रमाण है। सबसे खास बात यह है कि जो लोग गरीबी के कारण बिना डायलिसिस के असमय जान गंवा देते थे। वह हीमोडायलिसिस यूनिट में इलाज पाकर लंबे समय तक जी पा रहे हैं।
डॉ. रमेश चंद्रा, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल।

हीमो डायलिसिस यूनिट- फोटो : SAHARANPUR