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सरकारी अस्पतालों में दिल की बीमारी का इलाज नहीं

Sun, 08 May 2022 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 12:00 AM IST
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Heart disease is not treated in government hospitals
संवाद न्यूज एजेंसी
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सहारनपुर। सरकारी चिकित्सा सेवाएं जुगाड़ नीति पर चल रही हैं। विभाग के पास अस्पतालों के आलीशान भवन तो हैं, लेकिन इलाज के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं। जानकर हैरानी होगी कि जनपद में सरकारी अस्पतालों के पास दिल की बीमारी के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक यानी कॉर्डियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पद भी खाली चल रहे हैं। ऐसे में विभाग सामान्य फिजीशियन से काम चला रहा है। इसके अलावा चिकित्सकों के अन्य महत्वपूर्ण पद जैसे नेफ्रोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन, मनोरोग विशेेषज्ञ, यूरो सर्जन, न्यूरो सर्जन, न्यूरो फिजीशियन, दंत रोग विशेषज्ञ आदि पद भी खाली हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद के चिकित्सालयों में सृजित चिकित्सकों के 245 पदों में से मात्र 40 फीसदी पद भरे हुए हैं, जबकि 60 फीसदी पद खाली चल रहे हैं। पेश है रिपोर्ट...
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सरकारी अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी
अस्पतालों की श्रेणी संख्या
जिला अस्पताल 02 (एसबीडी जिला अस्पताल, एवं जिला महिला अस्पताल)
नईं पीएचसी 37
ब्लॉक पीएचसी 01
शहरी पीएचसी 19
सीएचसी 19
सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल 01 (राजकीय मेडिकल कॉलेज)
अन्य सरकारी अस्पताल 03 (ईएसआई अस्पताल, टीबी अस्पताल, रेलवे अस्पताल)
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चिकित्सकों और कर्मियों की स्थिति
जिले में सृजित पद कार्यरत खाली
कुल पद 245 103 142
एसबीडी जिला अस्पताल के 61 27 36
जिला महिला अस्पताल 34 19 15
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एसबीडी जिला अस्पताल में इनकी कमी
पद का नाम सृजित पद कार्यरत
ईएमओ 13 02
फिजीशियन 03 00
चेस्ट फिजीशियन 02 01
बाल रोग विशेषज्ञ 03 02
रेडियोलॉजिस्ट 03 01
पैथोलॉजिस्ट 04 03
एनेस्थेटिस्ट 04 02
सर्जन 07 03
कोर्डियोलॉजिस्ट 02 00
उपचारिका 74 14
फिजियोथैरेपिस्ट 01 00
नर्सिंग सिस्टर 16 10
वार्ड ब्वॉय 40 30
वार्ड आया 10 04
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प्रतिदिन पहुंचते हैं करीब ढाई हजार से अधिक मरीज
जिले भर की सीएचसी और पीएचसी को छोड़ दें तो केवल एसबीडी जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन ढाई हजार मरीज पहुंचते हैं। एसबीडी जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और ओपीडी में प्रतिदिन 1800 से 2000 तक मरीज पहुंचते हैं। बीमारियों के सीजन में इनकी संख्या ढाई हजार तक पहुंच जाती है। जिला महिला अस्पताल में भी प्रतिदिन 500 से 700 महिलाएं परामर्श लेने और प्रसव के लिए पहुंचती हैं।
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बाल रोग तथा स्त्री एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ नहीं
जनपद की 19 में से किसी भी सीएचसी पर बाल रोग एवं स्त्री एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में बाल और महिला मरीजों को इलाज के लिए या तो जिला अस्पताल आना पड़ता है या फिर निजी चिकित्सकों से इलाज कराते हैं। इतना ही नहीं, गंगोह स्थित सीएचसी में चल रहा 30 बेड का महिला अस्पताल भी नर्सों के भरोसे चल रहा है। सीएचसी पर अन्य चिकित्सकों की भी भारी कमी है।
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विभाग के पास चिकित्सकों की कमी है, लेकिन प्रयास यही रहता है कि जो भी संसाधन और सुविधाएं हमारे पास उपलब्ध हैं उनका शत प्रतिशत इस्तेमाल मरीजों के इलाज में हो सके। यही वजह है कि हमारे यहां चिकित्सकों की कमी के बावजूद सेवाएं काफी बेहतर हैं। फिर भी नए चिकित्सकों की मांग को लेकर समय समय पर शासन को पत्र लिखे गए हैं।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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