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रात गई वो बात गई अब बात नई कर लें ...

Fri, 01 Jan 2021 10:56 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2021 10:56 PM IST
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Gone night, she talked, now let's talk about it ...
- हिंदी हैं हम -- ऑनलाइन जुड़कर अपनी रचना पढ़ते साहित्यकार - फोटो : SAHARANPUR
रात गई वो बात गई अब बात नई कर लें ...
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सहारनपुर। साहित्यकारों ने नववर्ष का आगाज अपने ही अंदाज में किया। अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी मुहिम हिंदी हैं हम के तहत साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था विभावरी ने ऑनलाइन काव्य गोष्ठी की तो साहित्यकारों से नववर्ष पर उनकी रचनाएं भी आमंत्रित कीं।
शुक्रवार को हुए इस कार्यक्रम में हरिराम पथिक ने पढ़ा- रात गई वो बात गई अब बात नई कर लें, जागी आंखों में सपने कुछ नए-नए भर लें।
डाक्टर विजेंद्र पाल शर्मा ने पढ़ा- पत्र मनभावन सुगंधों के मिलें नववर्ष में, जो उदासी से बुझे थे मन खिलें नव वर्ष में, अनमने से जो रहे हैं दूर अपने लक्ष्य से, खुद चरण चूमें उन्हीं के मंजिलें नव वर्ष में।
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सुरेश सपन ने पढ़ा नव खुशियों के फूल खिलाए आने वाला साल नया, बीत गया सो बीत गया है उसका चर्चा क्या कीजे हर रिश्ते को मधुर बनाए आने वाला साल नया।
विनोद भृंग ने पढ़ा - गीत मीठा गुनगुनाए हर दिवस नव वर्ष का, मन में कड़वापन न लाए हर दिवस नव वर्ष का, घेर लें तुमको कभी जब उलझनें ही उलझनें, हौसला तब-तब बढ़ाए हर दिवस नव वर्ष का।
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नरेंद्र मस्ताना ने पढ़ा - सुख का सूरज निशि दिन चमके, टूटे सारे दु:ख के बंधन, आंगन-आंगन खुशियां खेलें महके हर घर चंदन चंदन, नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन।
डाक्टर आरपी सारस्वत ने पढ़ा- मानवता का ही रहे इस जग में उत्कर्ष, सब विधि हो इक्कीस ही, सबको यह नववर्ष।
राजीव उपाध्याय ने पढ़ा इतने जहीन बनो सबका यकीन बनो, आसमां इंतजार करे ऐसी जमीन बनो।
डाक्टर रागिनी भूषण ने पढ़ा- दुनिया उजड़ी मनकी तनकी अब से घर में खुशियां बरसे, नव रश्मि उगे अनुराग लसे नव धूप खिले धरती हरषे, यह वर्ष नया हर ले तम को उजले नव दीप शुभांकर से।
आमंत्रित रचनाओं में मुजफ्फरनगर से सुशीला शर्मा ने लिखा- बीत गए दुर्दिन सखे आया नवल प्रभात, जीत गया रथ सूर्य का हारी काली रात, नए वर्ष का आगमन करे राष्ट्र निर्माण, मिले काम हर हाथ को प्रतिभा को सम्मान।
देहरादून से डाक्टर राम विनय सिंह ने लिखा- नई धरती नया सूरज नया आकाश ले आना, नई सी धूप की लाली नया वातास ले आना, अगर तुम वक्त के उस पार जाकर ला सको तो फिर, मेरे बिछुड़े हुए अच्छे दिनों को पास ले आना।

रुड़की से पंकज गर्ग ने लिखा- उसकी राजी में हो राजी कोई सवाल न हो, कुछ भी हो जाए किसी बात का मलाल न हो। आपका प्यार न हो ऐसा कोई साल न हो।
मेरठ से सुमनेश सुमन ने लिखा- सुखों की कल्पनाएं हैं सृजन के गीत लाए हैं, तुम्हारे वास्ते मन में बहुत शुभकामनाएं हैं, तुम्हारी जिंदगी में कल न कोई पल घटे ऐसा, उदासी में जो पल पिछले दिनों तुमने बिताए हैं।
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