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तीन करोड़ की लागत से बना घाट हो गया बदहाल
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घाट पर धंसी इंटरलॉकिंग टाइल्स।
- फोटो : SAHARANPUR
तीन करोड़ की लागत से बना घाट हो गया बदहाल
सहारनपुर। तीन साल पहले धनतेरस की रात में पांवधोई नदी का जो घाट दस हजार दीपों से जगमग था। जिस घाट के जीर्णोद्घार पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च करने के साथ ही तत्कालीन मंडलायुक्त से लेकर तमाम अधिकारी दिन रात चक्कर काट रहे थे। उसकी ओर प्रशासनिक अधिकारियों ने मुड़कर भी नहीं देखा। अब वहीं घाट पहले से भी अधिक बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। अमर उजाला ने घाट की बदहाली को जानने के लिए घाट की पड़ताल की।
वर्ष 2018 में तत्कालीन मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने पांवधोई नदी के जीर्णोद्धार और इसके पुराने स्वरूप को लौटाने के लिए अभियान चलाया था। नदी के उद्गम स्थल पर तमाम अधिकारियों और सैकड़ों नागरिकों ने पहुंचकर नदी में उतरकर सफाई की थी। जीर्णोद्धार में विकास प्राधिकरण सहित कई विभागों से कई करोड़ रुपये लेकर काम कराए गए थे। 2018 में धनतेरस पर घाट को 10 हजार दीपकों से जगमग किया गया। नदी में नोकाएं उताकर नोका विहार कराया गया था। लोग नदी में स्नान करने लगे थे और नदी के साथ ही घाट को लेकर भी लोगों की आस्था पुन: जाग उठी थी, लेकिन इसके बाद ना तो प्रशासन और ना ही नगर निगम के अधिकारियों ने घाट की तरफ रुख नहीं किया। इसी बेरुखी की वजह से घाट आज बदतर स्थिति में है।
पुल में आई दरार, पेंचिंग और टाइल्स भी बैठी
घाट पर करोड़ों रुपये खर्च कर एक पुल और डैम का निर्माण कराया गया था। जल्दबाजी में बनवाए गए पुल की दीवारें अब बैठने लगी हैं, जिसकी वजह से पुल में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। एक साइड की रेलिंग भी टूटकर कई माह से नदी में पड़ी हुई है। पुल की सीढ़ियां टूट रही हैं। नदी के दोनों ओर की पेंचिंग भी जगह जगह से बैठ गई है। घाट पर मंदिर के सामने बिछाई गई इंटरलॉकिंग टाइल्स धंस गई हैं।
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स्टील की कुर्सियां चोरी, डस्टबिन भी तोड़े
घाट पर एक हट बनाई गई थी, जिसमें आर्टिफिशियल घास की प्लास्टिक मैट बिछाई गई थी। इसमें स्टील की कुर्सियां रखवाई गई थीं, जो चोरी हो चुकी हैं। इसके अलावा घाट पर स्वच्छता बनाए रखने को रखे गए डस्टबिन भी टूटे पड़े हैं। इसके अलावा पेयजल के लिए लगाई गई टंकी से टोंटी भी गायब है। ऐसे में पानी बह रहा है। घाट पर सफाई हुए भी साल भर बीत चुका है, जिसकी वजह से गंदगी फैली हुई है।
स्थानीय लोगों की बात
- स्थानीय निवासी दीपक गुप्ता ने बताया कि पांवधोई नदी और बाबा लालदास का बाड़ा स्थित घाट लोगों की आस्था से जुड़े हुए हैं, जिनकी अनदेखी कर अधिकारी लोगों के मन में निराशा भर रहे हैं।
- घाट के पास ही रहने वाले मदनपाल का कहना है कि अधिकारियों की अनदेखी में घाट अब शराबियों और सुल्फा पीने वालों का अड्डा बन गया है। शाम होते ही असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं।
- इंद्रप्रस्थ कॉलोनी निवासी विनोद कुमार का कहना है कि घाट पर की गई एक एक व्यवस्था आज खंडित हो रही है। इससे लोगों की आस्था को चोट पहुंच रही है। प्रशासन को आगे आना चाहिए।
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सहारनपुर। तीन साल पहले धनतेरस की रात में पांवधोई नदी का जो घाट दस हजार दीपों से जगमग था। जिस घाट के जीर्णोद्घार पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च करने के साथ ही तत्कालीन मंडलायुक्त से लेकर तमाम अधिकारी दिन रात चक्कर काट रहे थे। उसकी ओर प्रशासनिक अधिकारियों ने मुड़कर भी नहीं देखा। अब वहीं घाट पहले से भी अधिक बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। अमर उजाला ने घाट की बदहाली को जानने के लिए घाट की पड़ताल की।
वर्ष 2018 में तत्कालीन मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने पांवधोई नदी के जीर्णोद्धार और इसके पुराने स्वरूप को लौटाने के लिए अभियान चलाया था। नदी के उद्गम स्थल पर तमाम अधिकारियों और सैकड़ों नागरिकों ने पहुंचकर नदी में उतरकर सफाई की थी। जीर्णोद्धार में विकास प्राधिकरण सहित कई विभागों से कई करोड़ रुपये लेकर काम कराए गए थे। 2018 में धनतेरस पर घाट को 10 हजार दीपकों से जगमग किया गया। नदी में नोकाएं उताकर नोका विहार कराया गया था। लोग नदी में स्नान करने लगे थे और नदी के साथ ही घाट को लेकर भी लोगों की आस्था पुन: जाग उठी थी, लेकिन इसके बाद ना तो प्रशासन और ना ही नगर निगम के अधिकारियों ने घाट की तरफ रुख नहीं किया। इसी बेरुखी की वजह से घाट आज बदतर स्थिति में है।
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पुल में आई दरार, पेंचिंग और टाइल्स भी बैठी
घाट पर करोड़ों रुपये खर्च कर एक पुल और डैम का निर्माण कराया गया था। जल्दबाजी में बनवाए गए पुल की दीवारें अब बैठने लगी हैं, जिसकी वजह से पुल में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। एक साइड की रेलिंग भी टूटकर कई माह से नदी में पड़ी हुई है। पुल की सीढ़ियां टूट रही हैं। नदी के दोनों ओर की पेंचिंग भी जगह जगह से बैठ गई है। घाट पर मंदिर के सामने बिछाई गई इंटरलॉकिंग टाइल्स धंस गई हैं।
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स्टील की कुर्सियां चोरी, डस्टबिन भी तोड़े
घाट पर एक हट बनाई गई थी, जिसमें आर्टिफिशियल घास की प्लास्टिक मैट बिछाई गई थी। इसमें स्टील की कुर्सियां रखवाई गई थीं, जो चोरी हो चुकी हैं। इसके अलावा घाट पर स्वच्छता बनाए रखने को रखे गए डस्टबिन भी टूटे पड़े हैं। इसके अलावा पेयजल के लिए लगाई गई टंकी से टोंटी भी गायब है। ऐसे में पानी बह रहा है। घाट पर सफाई हुए भी साल भर बीत चुका है, जिसकी वजह से गंदगी फैली हुई है।
स्थानीय लोगों की बात
- स्थानीय निवासी दीपक गुप्ता ने बताया कि पांवधोई नदी और बाबा लालदास का बाड़ा स्थित घाट लोगों की आस्था से जुड़े हुए हैं, जिनकी अनदेखी कर अधिकारी लोगों के मन में निराशा भर रहे हैं।
- घाट के पास ही रहने वाले मदनपाल का कहना है कि अधिकारियों की अनदेखी में घाट अब शराबियों और सुल्फा पीने वालों का अड्डा बन गया है। शाम होते ही असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं।
- इंद्रप्रस्थ कॉलोनी निवासी विनोद कुमार का कहना है कि घाट पर की गई एक एक व्यवस्था आज खंडित हो रही है। इससे लोगों की आस्था को चोट पहुंच रही है। प्रशासन को आगे आना चाहिए।

घाट पर लगी हाईमास्ट लाइट का खुला बॉक्स दे रहा हादसे को दावत।- फोटो : SAHARANPUR

घाट पर बनाए गए पुल की टूटी पड़ी रेलिंग।- फोटो : SAHARANPUR

घाट पर पेयजल के लिए लगी टंकी की गायब टोंटी।- फोटो : SAHARANPUR

दीपक गुप्ता।- फोटो : SAHARANPUR

विनोद कुमार।- फोटो : SAHARANPUR

मदनपाल।- फोटो : SAHARANPUR

जगह जगह से धंसी इंटरलॉकिंग टाइल्स।- फोटो : SAHARANPUR

घाट पर बने पुल की दीवार धंसने से पुल में आई दरार।- फोटो : SAHARANPUR

घाट पर धंसी नदी की पेंचिंग के कारण इंटरलॉकिंग टाइल्स भी धंसी।- फोटो : SAHARANPUR

घाट पर टूटा पड़ा डस्टबिन।- फोटो : SAHARANPUR