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निजी प्रचार के लिए हो रहा दिशा सूचक का प्रयोग
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 24 Nov 2016 12:29 AM IST
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दिशा सूचक पर लगे बैनर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर शहर में बेतरतीब तरीके से लगाए गए होर्डिंग्स के मामले में फजीहत के साथ ही नगर निगम दिशा सूचक पर भी ध्यान नहीं दे रहा है। नगर निगम के अफसरों की मिलीभगत के कारण दिशा सूचक का इस्तेमाल होर्डिंग के रूप में किया जा रहा है।
ऐसे में बाहर से आने वाले लोग रास्ता भटक रहे हैं। शहरों की एंट्री और चौराहों पर दिशा सूचक बोर्ड लगे हैं। इन पर आसपास के शहरों की दूरी किलोमीटर में अंकित होने के साथ ही उनके रास्तों को बताने वाले चिन्ह भी बने होते हैं।
इससे बाहर से शहर में एंट्री करने वाले वाहन चालकों को यदि कहीं अन्य शहर में जाना है या उसकी दूरी का पता करना है तो यह दिशा सूचक उनकी मदद करते हैं।
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मगर शहर में एक साल से भी अधिक समय से इन दिशा सूचक का इस्तेमाल होर्डिंग के रूप में कंपनियों और नेताओं के प्रचार के लिए किया जा रहा है।
कलक्ट्रेट तिराहे पर लगे दिशा सूचक पर एक साइड में एक कंपनी का बैनर और दूसरी साइड में एक संगठन का बैनर लगा दिया गया है, जिसकी वजह से यह बोर्ड ढक गया है।
अंबाला रोड पर ओवरब्रिज से पहले लगे दिशा सूचक भी ऐसे ही लगे हैं। इस पर भी सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का बैनर लगा दिया गया है। इसकी वजह से लोगों को परेशानी हो रही है।
हैरत की बात यह है कि जिला प्रशासन या नगर निगम भी इसे लेकर गंभीर नहीं है। चर्चा है कि निगम के अफसरों की शह पर ही दिशा सूचक का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए किया जा रहा है।
ऐसे में बाहर से आने वाले लोग चौराहों पर खड़ी यातायात पुलिस या अन्य लोगों से रास्ते पूछते हैं। नगर निगम ने एक प्राइवेट कंपनी को शहर में होर्डिंग लगाने का ठेका दिया था।
कंपनी के कर्मचारियों ने नियम विरुद्ध शहर में करीब ढाई सौ जगहों पर बेतरतीब तरीके से होर्डिंग्स लगा दिए हैं। कई होर्डिंग सड़क पर हैं तो कई दुकानों के आगे लगा दिए गए हैं।
मामले में शिकायत के बाद जांच कराई गई है, जिसमें भी यह सब गलत पाए गए हैं। अपर नगरायुक्त सच्चिदानंद सिंह का कहना है कि जल्द ही गलत लगे होर्डिंग्स को हटाया जाएगा।
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ऐसे में बाहर से आने वाले लोग रास्ता भटक रहे हैं। शहरों की एंट्री और चौराहों पर दिशा सूचक बोर्ड लगे हैं। इन पर आसपास के शहरों की दूरी किलोमीटर में अंकित होने के साथ ही उनके रास्तों को बताने वाले चिन्ह भी बने होते हैं।
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इससे बाहर से शहर में एंट्री करने वाले वाहन चालकों को यदि कहीं अन्य शहर में जाना है या उसकी दूरी का पता करना है तो यह दिशा सूचक उनकी मदद करते हैं।
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मगर शहर में एक साल से भी अधिक समय से इन दिशा सूचक का इस्तेमाल होर्डिंग के रूप में कंपनियों और नेताओं के प्रचार के लिए किया जा रहा है।
कलक्ट्रेट तिराहे पर लगे दिशा सूचक पर एक साइड में एक कंपनी का बैनर और दूसरी साइड में एक संगठन का बैनर लगा दिया गया है, जिसकी वजह से यह बोर्ड ढक गया है।
अंबाला रोड पर ओवरब्रिज से पहले लगे दिशा सूचक भी ऐसे ही लगे हैं। इस पर भी सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का बैनर लगा दिया गया है। इसकी वजह से लोगों को परेशानी हो रही है।
हैरत की बात यह है कि जिला प्रशासन या नगर निगम भी इसे लेकर गंभीर नहीं है। चर्चा है कि निगम के अफसरों की शह पर ही दिशा सूचक का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए किया जा रहा है।
ऐसे में बाहर से आने वाले लोग चौराहों पर खड़ी यातायात पुलिस या अन्य लोगों से रास्ते पूछते हैं। नगर निगम ने एक प्राइवेट कंपनी को शहर में होर्डिंग लगाने का ठेका दिया था।
कंपनी के कर्मचारियों ने नियम विरुद्ध शहर में करीब ढाई सौ जगहों पर बेतरतीब तरीके से होर्डिंग्स लगा दिए हैं। कई होर्डिंग सड़क पर हैं तो कई दुकानों के आगे लगा दिए गए हैं।
मामले में शिकायत के बाद जांच कराई गई है, जिसमें भी यह सब गलत पाए गए हैं। अपर नगरायुक्त सच्चिदानंद सिंह का कहना है कि जल्द ही गलत लगे होर्डिंग्स को हटाया जाएगा।