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अस्पताल फुल, डॉक्टर हुए गुल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:30 AM IST
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Waiting to hear the doctor's patient.
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के जिला अस्पताल के ज्यादातर चिकित्सकों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है। आलम यह है कि मरीजों को घंटों कतार में खड़े रहने के बावजूद इलाज नहीं मिल पा रहा है।
इसे लेकर मरीजों के साथ ही तीमारदारों में भी भारी रोष है। हालांकि इस अव्यवस्था के लिए काफी हद तक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी भी बड़ा कारण है।
बुधवार को अमर उजाला की टीम ने जिला अस्पताल की व्यवस्था का जायजा लिया। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही देखने को मिली। सुबह दस बजे ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी थी, लेकिन ज्यादातर चिकित्सक अपने कक्षों से अनुपस्थित मिले।
कक्ष नंबर सात में नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ नरेंद्र सिंह, कक्ष नंबर दस में होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. आशा सिंह, कक्ष नंबर 11 में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बिरेंद्र भट्ट और डा. एके चौधरी, कक्ष नंबर 12 में वरिष्ठ परामर्शदाता बाल रोग डॉ. आरसी गुप्ता, कक्ष नंबर 17 में डॉ. एके शर्मा और कक्ष नंबर 18 में छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. जी रहमान अनुपस्थित थे।
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इन सभी चिकित्सकों की इंतजार में ओपीडी के बाहर घंटों से मरीजों की लंबी कतारें लगी थी। आलम यह रहा कि आधे से ज्यादा मरीज घंटों तक डॉक्टरों के न पहुंचने पर निराश होकर वापस लौट गए।
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इसे लेकर मरीजों के साथ ही तीमारदारों में भी भारी रोष है। हालांकि इस अव्यवस्था के लिए काफी हद तक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी भी बड़ा कारण है।
बुधवार को अमर उजाला की टीम ने जिला अस्पताल की व्यवस्था का जायजा लिया। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही देखने को मिली। सुबह दस बजे ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी थी, लेकिन ज्यादातर चिकित्सक अपने कक्षों से अनुपस्थित मिले।
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कक्ष नंबर सात में नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ नरेंद्र सिंह, कक्ष नंबर दस में होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. आशा सिंह, कक्ष नंबर 11 में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बिरेंद्र भट्ट और डा. एके चौधरी, कक्ष नंबर 12 में वरिष्ठ परामर्शदाता बाल रोग डॉ. आरसी गुप्ता, कक्ष नंबर 17 में डॉ. एके शर्मा और कक्ष नंबर 18 में छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. जी रहमान अनुपस्थित थे।
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इन सभी चिकित्सकों की इंतजार में ओपीडी के बाहर घंटों से मरीजों की लंबी कतारें लगी थी। आलम यह रहा कि आधे से ज्यादा मरीज घंटों तक डॉक्टरों के न पहुंचने पर निराश होकर वापस लौट गए।