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Saharanpur : शिवालिक की सहंसरा नदी के तट पर मिला जीवाश्म, डायनासोर का अंडा होने का दावा

Sun, 04 May 2025 04:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा जगदीप कुमार, सहारनपुर
जगदीप कुमार, सहारनपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 04 May 2025 04:23 AM IST
सार

इसकी खोज हिमालयन पर्यावरण संस्थान देहरादून के निदेशक डॉ. उमर सैफ और उनकी टीम ने की है। उनका दावा है कि यह डायनासोर का अंडा है। हालांकि इसकी गहराई से जांच के लिए वैज्ञानिकों को भी आमंत्रित किया गया है। 

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Fossil found on the banks of Sahansaara river of Shivalik, claimed to be a dinosaur egg
डायनासोर का अंडा! - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिवालिक से निकलने वाली सहंसरा नदी के तट से अंडे का जीवाश्म मिला है। इसकी खोज हिमालयन पर्यावरण संस्थान देहरादून के निदेशक डॉ. उमर सैफ और उनकी टीम ने की है। उनका दावा है कि यह डायनासोर का अंडा है। हालांकि इसकी गहराई से जांच के लिए वैज्ञानिकों को भी आमंत्रित किया गया है। 

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सैफ ने बताया कि यह अंडा उन्हें दो महीने पहले मिला था। इसके बाद उन्होंने दो महीने तक डायनासोर की प्रजातियों पर आधारित रिसर्च पेपर्स को स्टडी किया। अभी तक दुनिया में मिले डायनासोर के अंडों से मिलान किया। इस प्रारंभिक जांच में यह इस निर्णय पर पहुंचे हैं कि यह जीवाश्म अंडा डायनासोर का प्रतीत हो रहा है।  
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उन्होंने बताया कि यह खोज भारत में पैरोपीड अंडों की दुर्लभ उपस्थिति को उजागर करती है, जो संभवतः एक नए टैक्सन ओविरेप्टोरिड जैसे डायनासोर की व्यापक भौगोलिक उपस्थिति का संकेत देती है। 
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जीवाश्म अंडे के बारे में
अड़े की लंबाई 19 सेंटीमीटर, चौड़ाई 7.5 सेंटीमीटर, आयतन 447 सेंटीमीटर और लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 2.5 सेंटीमीटर है, जो इसे भारत में प्रचलित टाइटैनीसॉरिड मैगालूलियस अंडों से अलग करता है। इसका उच्च घनत्व (3689 किलोग्राम/मी3) शिवालिक क्षेत्र की लौहयुक्त खनिजीकरण प्रक्रिया को दर्शाता है।

भारत में अंडा मिला दुर्लभ
डॉ. उमर सैफ ने बताया कि डायनासोर अंडे प्रजनन रणनीतियों, प्राचीन पर्यावरणों और जीव-भूगोल को समझने में महत्वपूर्ण हैं। भारत में ऊपरी क्रिटेशिबस काल यानी लाखों वर्ष पहले के जीवाश्म अंडे मुख्य रूप से मेगालुलियस ओटेक्सन के हैं, जो टाइरेनोसॉरिड सॉरोपोइंस (जैसे आइसिसॉरस, जैनोसॉरस) से संबंधित हैं, लेकिन भारत में दुर्लभ है।

खोज में यह भी मिला
शिवालिक पहाड़ियों से प्लेसियोसॉर जीवाश्म भी मिला है। डॉ. उमर सैफ ने बताया कि नए प्लेसियोसॉर जीवाश्म, जिसे एसआर-10 का नाम दिया गया है। उनका दावा है कि यह डायनासोर का आंशिक पंख है, जिसकी लंबाई 46 सेंटीमीटर, मोटाई चार सेंटीमीटर और चौड़ाई में भिन्नता (शुरू में नौ सेंटीमीटर, मध्य में 15.5 सेंटीमीटर और अंत में आठ सेंटीमीटर) है।

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हिमाचल प्रदेश के नहान में भी पूर्व में जीवाश्म मिल चुके हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश में भी कुछ जीवाश्म मिल चुके हैं, जिनको लोगों ने पत्थर समझकर अपने घरों में लगा लिया था। ऐसे में संभव है कि शिवालिक की तलहटी से मिला जीवाश्म अंडा डायनासोर का हो, लेकिन यह आर्कियोलॉजी विभाग की गहन जांच का विषय है।                                               
  - प्रो. ओमदत्त, विभागाध्यक्ष, जूलॉजी, महाराज सिंह कॉलेज सहारनपुर
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