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CG: छत्तीसगढ़ के पहले जुरासिक रॉक गार्डन का हुआ शुभारंभ, मनेंद्रगढ़ में बना है देश का सबसे अनूठा फॉसिल पार्क
Sun, 27 Apr 2025 12:58 PM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, मनेंद्रगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, मनेंद्रगढ़
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 27 Apr 2025 12:58 PM IST
सार
मनेंद्रगढ़ का मरीन फॉसिल पार्क इसलिए विशेष है क्योकि यह एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा समुद्री जीवाश्म पार्क है। यह जीवाश्म हसदेव नदी के किनारे लगभग 1 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक का दर्जा भी प्राप्त है।
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छत्तीसगढ़ के पहले जुरासिक रॉक गार्डन का हुआ शुभारंभ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
26 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने मनेंद्रगढ़ वनमंडल में स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क का उदघाटन किया। छत्तीसगढ़ का मरीन फॉसिल पार्क एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां काफी पुराने समुद्री जीवाश्म मिले है। भारत में ऐसे जीवाश्म केवल चार अन्य स्थानों - सुबांसुरी (अरुणाचल प्रदेश), राजहरा (झारखंड), दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) और खेमगांव (सिक्किम) में पाए जाते हैं। गोंडवाना फॉसिल पार्क इन सभी में सबसे बड़ा और पुराना है।
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मनेंद्रगढ़ का मरीन फॉसिल पार्क इसलिए विशेष है क्योकि यह एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा समुद्री जीवाश्म पार्क है। यह जीवाश्म हसदेव नदी के किनारे लगभग 1 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक का दर्जा भी प्राप्त है। इसकी खोज 1954 में भूवैज्ञानिक एसके घोष ने कोयला खनन के दौरान की थी। यहां से द्विपटली (बायवेल्व) जीव, गैस्ट्रोपॉड, ब्रैकियोपॉड, क्रिनॉइड और ब्रायोजोआ जैसे प्राचीन समुद्री जीवों के जीवाश्म मिले हैं। इसके चलते यह देशभर के शोधार्थी और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसकी पुष्टि 2015 में बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट ऑफ़ पैलेंटोलॉजी, लखनऊ के द्वारा भी की गई है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार, यह क्षेत्र पर्मियन युग के समय समुद्र में डूबा हुआ था, ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ा, जिससे समुद्री जीव चट्टानों में दब गए और लाखों वर्षों में जीवाश्म के रूप में बदल गए, जो बाद में जलस्तर घटने से उभरकर उपर आ गए।यह पार्क गोंडवाना महाद्वीप के भूगर्भीय इतिहास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।ये फॉसिल्स उन समुद्री जीवों के अवशेष हैं जो करोड़ों वर्ष पहले यहां मौजूद समुद्र में रहते थे। प्राकृतिक परिवर्तन और पृथ्वी के पुनर्निर्माण के दौरान, समुद्र के पीछे हटने से ये जीव पत्थरों के बीच दब गए।
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पांच साल पहले तक यह क्षेत्र बिना संरक्षण के खाली पड़ा हुआ था। वन विभाग से इसके संरक्षण की पहल हुई। मनेंद्रगढ़ डीएफओ मनीष कश्यप (आईएफएस 2015 बैच ) ने यहां पर्यटन की दृष्टि से अलग-अलग कार्य किए है, जो सम्भवतः देश के किसी दूसरे फॉसिल पार्क में नहीं हुआ है। इस क्षेत्र को गुजरात और झारखंड के डायनासोर फॉसिल पार्क के तर्ज पे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया।