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पूर्व आईपीएस ने सीएम योगी को बताया मुजरिम
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
Updated Thu, 15 Mar 2018 12:20 AM IST
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पूर्व आईपीएस हिमांशु कुमार।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर के देवबंद में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद की रिहाई के लिए दिल्ली से सहारनपुर के लिए पदयात्रा पर निकले पूर्व आईपीएस हिमांशु कुमार ने कहा कि योगी आदित्यनाथ से क्या मांगे वो खुद एक मुजरिम हैं उनके ऊपर पहले ही 28 मुकदमे चल रहे हैं।
उन्होंने कहा हम देश की जनता को खड़ा कर रहे हैं, क्योंकि यह सब कुछ जनता का है। मंगलवार को देवबंद पहुंचे पूर्व आईपीएस हिमांशु कुमार ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि वह 6 मार्च को दिल्ली राजघाट से सहारनपुर जाने के लिए पदयात्रा पर निकले हैं। पदयात्रा का उद्देश्य जेल में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद, सोनू और शिवकुमार को रिहा कराना है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने तीनों को रिहा करने का हुक्म दिया है, लेकिन सरकार ने अदालत के हुक्म को नहीं माना। भारत के संविधान में अदालतों को सरकार से ऊपर रखा गया है। अगर सरकारें अदालतों के हुक्म मानने से इंकार कर देगीं तो संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा और नागरिकों के मानव अधिकार है उनकी रक्षा नहीं हो पाएगी।
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हिमांशु कुमार ने कहा कि हम लोग अगर अभी न चेते और हमने तानाशाही को नहीं रोका तो हमारी आने वाली संतानें हमें कोसेंगी कि जब तानाशाही आ रही थी सरकारें अदालतों की हुक्म उदूली कर रही थीं तो आप लोग चुप क्यों थे।
उन्होंने कहा कि हम प्रशासन से नहीं मांग रहे हैं हम देश की जनता को खड़ा कर रहे हैं ये अदालतें और ये सारा सिस्टम जनता का है संविधान जनता का है इसलिए जनता को इसे बचाना है। सरकारें नहीं बचाएंगी इसलिए हम जनता को खड़ा कर रहे हैं।
हिमांशु कुमार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर कहा कि हम योगी आदित्यनाथ से क्या मांगे उनके ऊपर तो पहले से 28 मुकदमे दर्ज हैं। वो खुद मुजरिम हैं और अदालत से कहते हैं कि अपने ऊपर मुकदमे चलाने की इजाजत नहीं देंगे।
इसलिए जनता से कहते हैं कि खड़े हो जाओ और अदालतों को बचाओ, क्योंकि तानाशाही ढोल बजाकर आ रही है। साथ ही कहा कि हमें बेचैनी इस बात की है कि इसका कोई विरोध नहीं कर रहा है। अदालतों के हुक्म को सरकारों ने मानना बंद कर दिया है।
इसके उपरांत हिमांशु कुमार ने दारुल उलूम वक्फ के समीप स्थित एक दीनी इदारे के कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर अनिल शर्मा, मनोज शर्मा, मौलाना नदीमुलवाजदी, मौलाना मेहंदी हसन ऐनी, मौलाना महमूदुर्रहमान, फैसल, जलालुद्दीन, इस्माईल कुरैशी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा हम देश की जनता को खड़ा कर रहे हैं, क्योंकि यह सब कुछ जनता का है। मंगलवार को देवबंद पहुंचे पूर्व आईपीएस हिमांशु कुमार ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि वह 6 मार्च को दिल्ली राजघाट से सहारनपुर जाने के लिए पदयात्रा पर निकले हैं। पदयात्रा का उद्देश्य जेल में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद, सोनू और शिवकुमार को रिहा कराना है।
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उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने तीनों को रिहा करने का हुक्म दिया है, लेकिन सरकार ने अदालत के हुक्म को नहीं माना। भारत के संविधान में अदालतों को सरकार से ऊपर रखा गया है। अगर सरकारें अदालतों के हुक्म मानने से इंकार कर देगीं तो संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा और नागरिकों के मानव अधिकार है उनकी रक्षा नहीं हो पाएगी।
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हिमांशु कुमार ने कहा कि हम लोग अगर अभी न चेते और हमने तानाशाही को नहीं रोका तो हमारी आने वाली संतानें हमें कोसेंगी कि जब तानाशाही आ रही थी सरकारें अदालतों की हुक्म उदूली कर रही थीं तो आप लोग चुप क्यों थे।
उन्होंने कहा कि हम प्रशासन से नहीं मांग रहे हैं हम देश की जनता को खड़ा कर रहे हैं ये अदालतें और ये सारा सिस्टम जनता का है संविधान जनता का है इसलिए जनता को इसे बचाना है। सरकारें नहीं बचाएंगी इसलिए हम जनता को खड़ा कर रहे हैं।
हिमांशु कुमार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर कहा कि हम योगी आदित्यनाथ से क्या मांगे उनके ऊपर तो पहले से 28 मुकदमे दर्ज हैं। वो खुद मुजरिम हैं और अदालत से कहते हैं कि अपने ऊपर मुकदमे चलाने की इजाजत नहीं देंगे।
इसलिए जनता से कहते हैं कि खड़े हो जाओ और अदालतों को बचाओ, क्योंकि तानाशाही ढोल बजाकर आ रही है। साथ ही कहा कि हमें बेचैनी इस बात की है कि इसका कोई विरोध नहीं कर रहा है। अदालतों के हुक्म को सरकारों ने मानना बंद कर दिया है।
इसके उपरांत हिमांशु कुमार ने दारुल उलूम वक्फ के समीप स्थित एक दीनी इदारे के कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर अनिल शर्मा, मनोज शर्मा, मौलाना नदीमुलवाजदी, मौलाना मेहंदी हसन ऐनी, मौलाना महमूदुर्रहमान, फैसल, जलालुद्दीन, इस्माईल कुरैशी आदि मौजूद रहे।