{"_id":"5914b66c4f1c1b7a04851eb1","slug":"force-ki-nigrani-mein-schoolon-mein-padhayi","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस सुरक्षा में हुई स्कूलों में पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस सुरक्षा में हुई स्कूलों में पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 May 2017 12:37 AM IST
विज्ञापन
रामनगर में सुरक्षा जवान की निगरानी में पढ़ते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। मल्हीपुरा रोड पर उपद्रवियों द्वारा मचाए गए उत्पात से लोग अब भी दहशत में हैं। यही वजह है कि रामनगर का सरकारी स्कूल घटना के बाद बृहस्पतिवार को जब पहली बार खुला तो कक्षाओं से बच्चे नदारद थे। इतना ही नहीं, पढ़ाने के लिए बाहर से आने वाली दो शिक्षिकाएं भी स्कूल नहीं पहुंचीं।
नौ मई को उपद्रवियों ने मल्हीपुर रोड स्थित रामनगर में जाम लगाया था। जब प्रशासन और पुलिस के अधिकारी उन्हें समझाने पहुंचे तो उन्होंने अधिकारियों और पुलिस को दौड़ा लिया था। इसके बाद जमकर उत्पात मचाते हुए कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। गांव के हालात का जायजा लेने के लिए अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार को जब गांव पहुंची तो सब कुछ सामान्य मिला। हालांकि अहतियातन आरएएफ और पुलिस व पीएसी तैनात थी। जब सड़क किनारे बने सरकारी स्कूल का हाल जाना तो वहां केवल एक कक्ष का दरवाजा खुला था, जबकि बाकी कमरे बंद थे। अंदर जाकर देखा तो आठ से नौ बच्चे बैठे थे।
इसी कक्षा में आरएएफ के दो जवान गेट पर बैठे हुए थे। अंदर शिक्षिकाएं पढ़ा रही थी। शिक्षिका पूनम और अनीता ने बताया कि स्कूल में नया गांव, बादशाहपुर और रामनगर के 181 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रतिदिन कक्षाएं भरी रहती हैं, मगर नौ मई को हुई घटना की वजह से अभिभावक डरे हुए हैं। इसी वजह से उन्होंने स्कूल नहीं भेजा है। जो बच्चे आए हैं, वह भी डरे हुए हैं। इतना ही नहीं, स्कूल में चार शिक्षक हैं, जिनमेें से दो शिक्षिकाएं बृहस्पतिवार को नहीं पहुंचीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नौ मई को उपद्रवियों ने मल्हीपुर रोड स्थित रामनगर में जाम लगाया था। जब प्रशासन और पुलिस के अधिकारी उन्हें समझाने पहुंचे तो उन्होंने अधिकारियों और पुलिस को दौड़ा लिया था। इसके बाद जमकर उत्पात मचाते हुए कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। गांव के हालात का जायजा लेने के लिए अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार को जब गांव पहुंची तो सब कुछ सामान्य मिला। हालांकि अहतियातन आरएएफ और पुलिस व पीएसी तैनात थी। जब सड़क किनारे बने सरकारी स्कूल का हाल जाना तो वहां केवल एक कक्ष का दरवाजा खुला था, जबकि बाकी कमरे बंद थे। अंदर जाकर देखा तो आठ से नौ बच्चे बैठे थे।
विज्ञापन
इसी कक्षा में आरएएफ के दो जवान गेट पर बैठे हुए थे। अंदर शिक्षिकाएं पढ़ा रही थी। शिक्षिका पूनम और अनीता ने बताया कि स्कूल में नया गांव, बादशाहपुर और रामनगर के 181 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रतिदिन कक्षाएं भरी रहती हैं, मगर नौ मई को हुई घटना की वजह से अभिभावक डरे हुए हैं। इसी वजह से उन्होंने स्कूल नहीं भेजा है। जो बच्चे आए हैं, वह भी डरे हुए हैं। इतना ही नहीं, स्कूल में चार शिक्षक हैं, जिनमेें से दो शिक्षिकाएं बृहस्पतिवार को नहीं पहुंचीं।
विज्ञापन