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रावण की रिहाई के लिए तहसील कब्जाई, जाम लगाया
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 16 Jun 2017 01:19 AM IST
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तहसील में विरोध प्रदर्शन करतीं दलित महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण की रिहाई की मांग को लेकर क्षेत्रीय दलित महिलाओं ने तहसील पर मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर हंगामा किया और मेन गेट बंद कर किसी को भी अंदर बाहर नहीं जाने दिया।
कुछ देर के लिए महिलाओं ने तहसील के सामने हाईवे पर भी जाम लगाया। बड़ी मुश्किल से पुलिस ने महिलाओं को समझाकर हाईवे से हटाया और अंदर लेकर गईं। यहां एसडीएम एवं सीओ ने उनका ज्ञापन लेकर आश्वासन दिया कि उनकी बात उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दी जाएगी और किसी भी निर्दोष को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
म दोपहर करीब 12 बजे दलित महिलाएं तहसील पहुंचनी शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण की रिहाई की मांग की। काफी देर हंगामा करने के बाद महिलाएं तहसील के मेन गेट पर पहुंच गईं और गेट बंद कर किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया।
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करीब तीन घंटे तक तहसील महिलाओं के कब्जे में रही। मेन गेट से महिलाएं नारेबाजी करते हुए बाहर हाईवे पहुंच गईं और जाम लगा दिया। कई लोगों से वाहन निकालने को लेकर
महिलाओं की तीखी नोकझोंक हुई। महिलाओं ने सेना के वाहन को भी रोक लिया। सेना के जवानों ने महिलाओं को समझाकर अपना वाहन निकाला।
जाम लगाए जाने का पता चलने पर सीओ इंदु सिद्धार्थ एवं कोतवाली प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कालरा मौके पर पहुंचे और महिलाओं से हाईवे से हटने केे लिए कहा, लेकिन महिलाएं चंद्रशेखर की रिहाई तक हाईवे से न हटने पर अड़ी थीं। काफी समझाने पर महिलाओं को हाईवे से हटाया गया और सीओ उन्हें अंदर तहसील में ले गईं।
यहां एसडीएम कार्यालय में उनसे वार्ता कर उनका ज्ञापन ले लिया और आश्वासन दिया गया कि उनकी बात को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और किसी भी निर्दोष की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इसके बाद ही महिलाएं वापस अपने-अपने गांवों को लौटी।
महिलाओं को आगे कर चल रहा आंदोलन
तहसील में अचानक इतनी बड़ी तादाद में क्षेत्र की दर्जनों गांवों से दलित महिलाओं का इकट्ठा होना एक बड़ी प्लानिंग का हिस्सा था। इन महिलाओं को छोटे डग्गामार वाहनों में ग्रामीण क्षेत्रों से लाया गया, जिन्हें तहसील से पहले ही नीचे उतार दिया गया और यें महिलाएं दस-दस व पांच-पांच की टोली बनाकर तहसील परिसर में पहुंची।
शुरू में इनकी संख्या कम थी, लेकिन धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी। एक ट्रैक्टर-ट्राली तहसील के सामने ही सड़क के दूसरी ओर रुकी और ट्राली में सवार महिलाओं को उतारकर उसका चालक वहां से निकल गया। एक टाटा मैजिक यूनियन बैंक शाखा के बाहर खड़ी थी, जिसमें महिलाओं को लाया गया था। कुछ वाहन मंडी रोड पर खड़े थे।
महिलाओं को बाकायदा 12 सूत्रीय ज्ञापन तैयार कराकर दिया गया था। उन्हें पूरी तरह से समझाया गया था कि उन्हें पहले क्या करना है और उसके बाद उनका अगला स्टेप क्या होगा? करीब 300 महिलाओं को भीम आर्मी के आठ-दस युवा कार्यकर्ता गाइड कर रहे थे, लेकिन युवाओं पर पुलिस की नजर नहीं गई। यह युवा कार्यकर्ता अलग-अलग स्थानों पर खड़े थे। कई बार महिलाएं उग्र भी हुईं, लेकिन उन्हें इशारों से रोका जा रहा था।
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कुछ देर के लिए महिलाओं ने तहसील के सामने हाईवे पर भी जाम लगाया। बड़ी मुश्किल से पुलिस ने महिलाओं को समझाकर हाईवे से हटाया और अंदर लेकर गईं। यहां एसडीएम एवं सीओ ने उनका ज्ञापन लेकर आश्वासन दिया कि उनकी बात उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दी जाएगी और किसी भी निर्दोष को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
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म दोपहर करीब 12 बजे दलित महिलाएं तहसील पहुंचनी शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण की रिहाई की मांग की। काफी देर हंगामा करने के बाद महिलाएं तहसील के मेन गेट पर पहुंच गईं और गेट बंद कर किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया।
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करीब तीन घंटे तक तहसील महिलाओं के कब्जे में रही। मेन गेट से महिलाएं नारेबाजी करते हुए बाहर हाईवे पहुंच गईं और जाम लगा दिया। कई लोगों से वाहन निकालने को लेकर
महिलाओं की तीखी नोकझोंक हुई। महिलाओं ने सेना के वाहन को भी रोक लिया। सेना के जवानों ने महिलाओं को समझाकर अपना वाहन निकाला।
जाम लगाए जाने का पता चलने पर सीओ इंदु सिद्धार्थ एवं कोतवाली प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कालरा मौके पर पहुंचे और महिलाओं से हाईवे से हटने केे लिए कहा, लेकिन महिलाएं चंद्रशेखर की रिहाई तक हाईवे से न हटने पर अड़ी थीं। काफी समझाने पर महिलाओं को हाईवे से हटाया गया और सीओ उन्हें अंदर तहसील में ले गईं।
यहां एसडीएम कार्यालय में उनसे वार्ता कर उनका ज्ञापन ले लिया और आश्वासन दिया गया कि उनकी बात को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और किसी भी निर्दोष की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इसके बाद ही महिलाएं वापस अपने-अपने गांवों को लौटी।
महिलाओं को आगे कर चल रहा आंदोलन
तहसील में अचानक इतनी बड़ी तादाद में क्षेत्र की दर्जनों गांवों से दलित महिलाओं का इकट्ठा होना एक बड़ी प्लानिंग का हिस्सा था। इन महिलाओं को छोटे डग्गामार वाहनों में ग्रामीण क्षेत्रों से लाया गया, जिन्हें तहसील से पहले ही नीचे उतार दिया गया और यें महिलाएं दस-दस व पांच-पांच की टोली बनाकर तहसील परिसर में पहुंची।
शुरू में इनकी संख्या कम थी, लेकिन धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी। एक ट्रैक्टर-ट्राली तहसील के सामने ही सड़क के दूसरी ओर रुकी और ट्राली में सवार महिलाओं को उतारकर उसका चालक वहां से निकल गया। एक टाटा मैजिक यूनियन बैंक शाखा के बाहर खड़ी थी, जिसमें महिलाओं को लाया गया था। कुछ वाहन मंडी रोड पर खड़े थे।
महिलाओं को बाकायदा 12 सूत्रीय ज्ञापन तैयार कराकर दिया गया था। उन्हें पूरी तरह से समझाया गया था कि उन्हें पहले क्या करना है और उसके बाद उनका अगला स्टेप क्या होगा? करीब 300 महिलाओं को भीम आर्मी के आठ-दस युवा कार्यकर्ता गाइड कर रहे थे, लेकिन युवाओं पर पुलिस की नजर नहीं गई। यह युवा कार्यकर्ता अलग-अलग स्थानों पर खड़े थे। कई बार महिलाएं उग्र भी हुईं, लेकिन उन्हें इशारों से रोका जा रहा था।