{"_id":"65f49f87d99a50b0a901c924","slug":"for-the-first-time-four-sugar-mills-were-closed-in-the-first-fortnight-of-march-saharanpur-news-c-30-1-smrt1052-120207-2024-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: पहली बार मार्च के पहले पखवाड़े में बंद हुईं चार शुगर मिलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: पहली बार मार्च के पहले पखवाड़े में बंद हुईं चार शुगर मिलें
Sat, 16 Mar 2024 12:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 16 Mar 2024 12:50 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। आमतौर पर अप्रैल के आखिर और मई तक चलने वाली शुगर मिलों का पेराई सत्र इस बार मार्च के पहले पखवाड़े में ही समाप्त होने लगा है। जिले की आठ में चार चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं और एक मिल का पेराई सत्र (आज) शनिवार को समाप्त होने की संभावना है। इस बार गत सीजन की तुलना में 74.76 लाख क्विंटल कम गन्ना पेराई रहने और 8.29 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन कम रहने का अनुमान है।
गन्ने की लोकप्रिय प्रजाति को-0238 में रोगों का बढ़ता प्रकोप और अतिवृष्टि का असर जनपद में गन्ना उत्पादन पर दिखाई देने लगा है। इसके चलते पहले बार जिले में मार्च के महीने में ही शुगर मिल बंद होने लगी हैं। जनपद की टोडरपुर और बिडवी चीनी मिलें 25 फरवरी को बंद हो गई। गत सीजन में 16 अप्रैल तक चलने वाली गागलहेड़ी चीनी मिल इस बार 12 मार्च, 13 मई तक चलने वाली सरसावा चीनी मिल का पेराई सत्र 15 मार्च को समाप्त हो गया है।
गत सत्र में दो अप्रैल तक चलने वाली गांगनौली चीनी मिल के पेराई सत्र के आज शनिवार को समाप्त होने की संभावना है। गत वर्ष 14 मई तक चली देवबंद ने सात अप्रैल और 23 अप्रैल तक चली शेरमऊ के 29 मार्च तक पेराई सत्र समाप्त करने की उम्मीद है। गत सीजन में जहां जिले की चीनी मिलों ने 539.76 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी वहीं इस बार इसके 465 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है।
विज्ञापन
रोगों और अतिवृष्टि से उत्पादन प्रभावित
गन्ने की लोकप्रिय प्रजाति को-0238 पर इस बार लाल सड़न से लेकर अन्य रोगों से प्रभावित रही है। जनपद में इस प्रजाति का रकबा कुल क्षेत्रफल का 90 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा जनपद में अतिवृष्टि एवं बाढ़ के चलते भी करीब सात हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। इसका गन्ना उत्पादन पर विपरीत असर पड़ा है।
मौजूदा पेराई सत्र में गत वर्ष से 74.76 लाख क्विंटल कम गन्ना पेराई कम रहने का अनुमान है। इसके चलते चीनी उत्पादन में भी 8.29 लाख क्विंटल की कमी आएगी। गत वर्ष जहां 54.05 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ था, वहीं इस वर्ष इसके 45.36 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह गन्ना प्रजाति को-0238 में लाल सड़न सहित अन्य रोगों का प्रकोप बढ़ने और अतिवृष्टि को माना जा रहा रहा है।
-- सुशील कुमार, जिला गन्ना अधिकारी
-- गत पांच वर्षों में गन्ना क्षेत्रफल एवं गन्ना पेराई --
पेराई सत्र-- -- -- -- - गन्ना रकबा -- -- -- - गन्ना पेराई
2019-20-- -- -- -- -100384 -- -- -- -- -- 517.38
2020-21-- -- -- -- -107084 -- -- -- -- -- 508.30
2021-22-- -- -- -- - 115900 -- -- -- -- - 530.71
2022-23-- -- -- -- - 121525 -- -- -- -- - 539.76
2023-24-- -- -- -- - 121786 -- -- -- -- - 465 (अनुमानित)
नोट : गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार। (क्षेत्रफल हेक्टेयर में और पेराई लाख क्विंटल) में
विज्ञापन
गन्ने की लोकप्रिय प्रजाति को-0238 में रोगों का बढ़ता प्रकोप और अतिवृष्टि का असर जनपद में गन्ना उत्पादन पर दिखाई देने लगा है। इसके चलते पहले बार जिले में मार्च के महीने में ही शुगर मिल बंद होने लगी हैं। जनपद की टोडरपुर और बिडवी चीनी मिलें 25 फरवरी को बंद हो गई। गत सीजन में 16 अप्रैल तक चलने वाली गागलहेड़ी चीनी मिल इस बार 12 मार्च, 13 मई तक चलने वाली सरसावा चीनी मिल का पेराई सत्र 15 मार्च को समाप्त हो गया है।
विज्ञापन
गत सत्र में दो अप्रैल तक चलने वाली गांगनौली चीनी मिल के पेराई सत्र के आज शनिवार को समाप्त होने की संभावना है। गत वर्ष 14 मई तक चली देवबंद ने सात अप्रैल और 23 अप्रैल तक चली शेरमऊ के 29 मार्च तक पेराई सत्र समाप्त करने की उम्मीद है। गत सीजन में जहां जिले की चीनी मिलों ने 539.76 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी वहीं इस बार इसके 465 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है।
विज्ञापन
रोगों और अतिवृष्टि से उत्पादन प्रभावित
गन्ने की लोकप्रिय प्रजाति को-0238 पर इस बार लाल सड़न से लेकर अन्य रोगों से प्रभावित रही है। जनपद में इस प्रजाति का रकबा कुल क्षेत्रफल का 90 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा जनपद में अतिवृष्टि एवं बाढ़ के चलते भी करीब सात हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। इसका गन्ना उत्पादन पर विपरीत असर पड़ा है।
मौजूदा पेराई सत्र में गत वर्ष से 74.76 लाख क्विंटल कम गन्ना पेराई कम रहने का अनुमान है। इसके चलते चीनी उत्पादन में भी 8.29 लाख क्विंटल की कमी आएगी। गत वर्ष जहां 54.05 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ था, वहीं इस वर्ष इसके 45.36 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह गन्ना प्रजाति को-0238 में लाल सड़न सहित अन्य रोगों का प्रकोप बढ़ने और अतिवृष्टि को माना जा रहा रहा है।
पेराई सत्र
2019-20
2020-21
2021-22
2022-23
2023-24
नोट : गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार। (क्षेत्रफल हेक्टेयर में और पेराई लाख क्विंटल) में