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लॉकडाउन से हुई फूलों की खेती बर्बाद

Thu, 02 Jul 2020 10:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2020 10:42 PM IST
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लॉकडाउन से हुुई फूलों की खेती बर्बाद
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सहारनपुर। कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते लगे लॉकडाउन ने फूलों की खेती को बर्बाद कर दिया है। जिले में गेंदा, ग्लेडियोलस, रजनीगंधा और पॉली हाउस में लगने वाले जरबेरा, गुलाब और कारनेशन की खेती करने वाले किसानों को करीब 3,65,67,960 रुपये का फटका लगा है। बाजार में मांग कम होने के कारण अभी भी फूलों की ब्रिकी को पंख नहीं लगे हैं। इसके चलते फूलों की खेती करने वाले किसान बेहद मायूस हैं।
जनपद में करीब 14972 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पॉली हाउस में जरबेरा, गुलाब और कारनेशन आदि फूलों की खेती होती है। जबकि गेंदा, ग्लेडियोलस, और रजनीगंधा की खेती का रकबा लगभग 79 हेक्टेयर हैं। इन फूलों की मांग शादी विवाह, धार्मिक सहित अन्य कार्यक्रमों में होती है। लॉकडाउन में तमाम कार्यक्रम स्थगित रहे और फूलों की मंडी भी बंद रही। तैयार फूलों की भी बिक्री नहीं हो पाई। किसानों को फूलों की तुड़ाई कराकर डंप करना पड़ा, लेकिन लेबर कास्ट से लेकर अन्य तमाम खर्चे जस के तस हैं। गेंदा की चार बीघा में खेती करने वाले ग्राम बालपुर के किसान बालकिशन और तीन बीघा में खेती करने वाले संजय कुमार ने बताया कि लॉकडाउन के कारण फूल नहीं बिकने पर उन्हें फसल की जुताई करनी पड़ी। इस बार फूलों की खेती घाटे का सौदा रही है।
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मंडी खुली, लेकिन ग्राहक का रहा अभाव
गांव मवी खुर्द में करीब तीन एकड़ पॉली हाउस में जरबेरा पैदा करने वाले किसान मोहित चौधरी ने बताया कि उनके यहां से जरबेरा के फूल के 500 फूलों वाले 10 से 15 डिब्बे दिल्ली की गाजीपुर मंडी में जाते हैं। लॉकडाउन के चलते न सिर्फ कार्यक्रम स्थगित हो गए, बल्कि मंडी में भी कारोबार बंद हो गया । लॉकडाउन से पहले जरबेरा की एक स्टिक औसतन तीन रुपये के हिसाब से बिकती थी। अब मात्र 50 पैसे ही रह गई है। लागत भी नहीं निकल पा रही है।
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लॉक डाउन में फूलों की मांग न के बराबर रह गई
सोना सैयद माजरा में चार हजार वर्ग मीटर मेेें पॉली हाउस लगाकर गुलाब की खेती करने वाले किसान शाजेब हुसैन ने ने बताया कि दिल्ली की गाजीपुर मंडी में फूल जाता है। लॉकडाउन से पहले गुलाब का रेट 140 प्रति बंच था। एक बंच में 10 फूल आते हैं। रोजाना 300 से 350 बंच मंडी भेजे जाते थे। फूलों की तुड़ाई करके डंप करना पड़ा। फूलों की मांग ना के बराबर रह गई है। 15 जुलाई के बाद से गुलाब की बिक्री शुरू की जाएगी।

किसानों को हुए नुकसान की रिपोर्ट लखनऊ भेजी
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि लॉकडाउन की अवधि में किसानों को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट लखनऊ स्थित मुख्यालय भेजी है। फूलों की फसल में लागत पूरी लगी लेकिन बिक्री नहीं हो सकी। किसान फूलों को तोड़कर डंप करने को मजबूर रहे। अभी भी फूलों की मांग नहीं बढ़ सकी है। दिल्ली की गाजीपुर मंडी, चंडीगढ़, अंबाला, हरिद्वार, हैदराबाद और बंगलुरू आदि की मंडियों में यहां से फूलों की सप्लाई होती है।
लॉकडाउन अवधि में जिले में फूलों को खेती को हुई क्षति का विवरण
फसल क्षेत्रफल क्षति की अनुमानित राशि
गेंदा 50 हेक्टेयर 40,00,000 रुपये
ग्लैडियोलस 25 हेक्टेयर 62,50,000 रुपये
रजनीगंधा 04 हेक्टेयर 6,00,000 रुपये
पॉली हाउस में जरबेरा 114720 वर्ग मीटर 1,92,72,960 रुपये
पॉली हाउस में गुलाब 27000 वर्ग मीटर 36,45,000 रुपये
पॉली हाउस में कारनेशन 8000 वर्ग मीटर 28,00,000 रुपये
नोट - (उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार)
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