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Saharanpur News: वेस्ट यूपी समेत हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश के लिए होती है पटाखों की सप्लाई
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देहरादून रोड स्थित गोदाम पर आतिशबाजी खरीदते लोग। संवाद
- जिले में आतिशबाजी और भंडारण के 120 लाइसेंस, इनमें आगरा के 60 लाइसेंस शामिल
- तमिलनाडु के शिवकाशी से आता है माल, खरीदार के पास रसीद होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अगले माह दिवाली का त्योहार है। जिले में आतिशबाजी तैयार करने और भंडारण के 120 लाइसेंस हैं। इसमें 400 किलोग्राम से लेकर दो लाख किलोग्राम तक का भंडारण हो सकता है। यहां पर तमिलनाडु के शिवकाशी से करीब 15 से 20 करोड़ रुपये तक का माल आता है, जिसका भंडारण भी यहीं पर होता है। इसके बाद वेस्ट यूपी के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में सप्लाई किए जाते हैं। हालांकि आतिशबाजी बाहर लेकर जाने के लिए खरीदारी की रसीद होना जरूरी है।
पिछले कुछ वर्षों में लाइसेंस की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी वजह है कि मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ का एनसीआर में शामिल है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से वहां पर आतिशबाजी बैन है। ऐसे में यहां पर लाइसेंस की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा अवैध पटाखा फैक्टरी के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। फिलहाल जिले में आतिशबाजी तैयार करने के 55 लाइसेंस हैं, जो एक समय में 15 किलोग्राम का मसाला तैयार कर आतिशबाजी तैयार कर सकते हैं।
15 किलोग्राम खत्म होने के बाद दोबारा से उतनी ही मात्रा में मसाला तैयार कर सकते हैं। अगर इससे अधिक मसाला तैयार करते हैं तो वह मानकों का उल्लंघन है। इसके अलावा आतिशबाजी भंडारण के 60 लाइसेंस है। भंडारण के लिए सभी की अलग-अलग क्षमता है। अधिकतर लाइसेंस 450 किलो और 600 किलोग्राम के हैं। यानी इतनी मात्रा में आतिशबाजी अपने गोदामों में भंडारण कर सकते हैं, जिले में दो लाइसेंस मैगजीन भंडारण के भी हैं। इसमें दो लाख किलोग्राम तक आतिशबाजी का भंडारण कर सकते हैं।नियमानुसार, अगर यहां से बाहर कोई आतिशबाजी लेकर जा रहा है तो उसके पास खरीदारी की रसीद होना जरूरी है।
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-- जिले में बनते हैं सिर्फ फुलझड़ी और अनार
जिले में जिन लोगों को आतिशबाजी तैयार करने के लाइसेंस दिए गए हैं वह सिर्फ फुलझड़ी और अनार तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा रॉकेट, माला, ग्राउंड स्पिनर, बम और अन्य तमाम तरह के पटाखे तमिलनाडु के शिवकाशी से आते हैं।
-- - वर्जन
त्योहारों के दौरान लाइसेंसी निर्माणकर्ता और भंडारण करने वाले प्रतिष्ठानों की जांच के लिए चार सदस्य टीम गठित कर दी है। तीन दिन के लिए अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाएंगे। मानक एवं दूरी समेत अन्य गाइडलाइन का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी। - कुलदीप सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
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- तमिलनाडु के शिवकाशी से आता है माल, खरीदार के पास रसीद होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अगले माह दिवाली का त्योहार है। जिले में आतिशबाजी तैयार करने और भंडारण के 120 लाइसेंस हैं। इसमें 400 किलोग्राम से लेकर दो लाख किलोग्राम तक का भंडारण हो सकता है। यहां पर तमिलनाडु के शिवकाशी से करीब 15 से 20 करोड़ रुपये तक का माल आता है, जिसका भंडारण भी यहीं पर होता है। इसके बाद वेस्ट यूपी के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में सप्लाई किए जाते हैं। हालांकि आतिशबाजी बाहर लेकर जाने के लिए खरीदारी की रसीद होना जरूरी है।
पिछले कुछ वर्षों में लाइसेंस की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी वजह है कि मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ का एनसीआर में शामिल है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से वहां पर आतिशबाजी बैन है। ऐसे में यहां पर लाइसेंस की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा अवैध पटाखा फैक्टरी के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। फिलहाल जिले में आतिशबाजी तैयार करने के 55 लाइसेंस हैं, जो एक समय में 15 किलोग्राम का मसाला तैयार कर आतिशबाजी तैयार कर सकते हैं।
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15 किलोग्राम खत्म होने के बाद दोबारा से उतनी ही मात्रा में मसाला तैयार कर सकते हैं। अगर इससे अधिक मसाला तैयार करते हैं तो वह मानकों का उल्लंघन है। इसके अलावा आतिशबाजी भंडारण के 60 लाइसेंस है। भंडारण के लिए सभी की अलग-अलग क्षमता है। अधिकतर लाइसेंस 450 किलो और 600 किलोग्राम के हैं। यानी इतनी मात्रा में आतिशबाजी अपने गोदामों में भंडारण कर सकते हैं, जिले में दो लाइसेंस मैगजीन भंडारण के भी हैं। इसमें दो लाख किलोग्राम तक आतिशबाजी का भंडारण कर सकते हैं।नियमानुसार, अगर यहां से बाहर कोई आतिशबाजी लेकर जा रहा है तो उसके पास खरीदारी की रसीद होना जरूरी है।
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जिले में जिन लोगों को आतिशबाजी तैयार करने के लाइसेंस दिए गए हैं वह सिर्फ फुलझड़ी और अनार तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा रॉकेट, माला, ग्राउंड स्पिनर, बम और अन्य तमाम तरह के पटाखे तमिलनाडु के शिवकाशी से आते हैं।
त्योहारों के दौरान लाइसेंसी निर्माणकर्ता और भंडारण करने वाले प्रतिष्ठानों की जांच के लिए चार सदस्य टीम गठित कर दी है। तीन दिन के लिए अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाएंगे। मानक एवं दूरी समेत अन्य गाइडलाइन का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी। - कुलदीप सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट