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डेंगू वार्ड फुल, सर्जिकल और हड्डी वार्ड में रखे जा रहे बुखार के मरीज
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सहारनपुर। डेंगू और बुखार की स्थिति जानने के लिए जिला अस्पताल काफी है। जहां डेंगू वार्ड कई दिन से फुल चल रहा है। बुखार के मरीजों के लिए जनरल वार्ड कम पड़ गया है। ऐसे में मरीजों को सर्जिकल वार्ड और हड्डी वार्ड तक में रखा गया है।
एसबीडी जिला अस्पताल में फिजीशियन की ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या बुखार के मरीजों की है। कमजोरी और प्लेटलेट कम होने से प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इसके अलावा प्रतिदिन कई मरीजों की छुट्टी भी होती है। बीते कई दिन से भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या अधिक होने से जनरल वार्ड में बेड फुल हैं। ऐसे में मरीजों को सर्जिकल वार्ड और हड्डी वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। उधर, सात बेड का डेंगू वार्ड भी कई दिन से मरीजों से फुल चल रहा है। दस बेड के इमरजेंसी वार्ड में पहले से बेड नहीं हैं। यहां एक-एक बेड पर दो-दो मरीज तक लिटाए हैं। ट्रामा सेंटर के बरामदे में भी बुखार के मरीज रखे हैं।
डेंगू वार्ड में बेड घटाए
डेंगू की दस्तक के साथ ही करीब डेढ़ माह पहले एसबीडी जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 50 बेड का वार्ड तैयार किया था। इसमें जनरल वार्ड की बगल में सात बेड के साथ ही बर्न वार्ड और इमरजेंसी वार्ड के बेड भी लिए गए थे। कुछ दिन बाद ही बर्न वार्ड और इमरजेंसी वार्ड से डेंगू वार्ड खत्म किया। वर्तमान में मात्र सात बेड का डेंगू वार्ड है, जो फुल है। ऐसे में यदि डेंगू के और मरीज आते हैं तो उनको भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है।
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वर्जन
यदि डेंगू के और मरीज भर्ती होते हैं तो हमारे पास बर्न वार्ड को डेंगू वार्ड में बदलने का विकल्प है। रही बात बुखार के मरीजों को सर्जिकल और हड्डी वार्ड में रखने की तो कोशिश यही है कि मरीजों को असुविधा ना हो। एक बेड पर दो मरीज ना रहे। - डॉ. आभा वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल।
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एसबीडी जिला अस्पताल में फिजीशियन की ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या बुखार के मरीजों की है। कमजोरी और प्लेटलेट कम होने से प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इसके अलावा प्रतिदिन कई मरीजों की छुट्टी भी होती है। बीते कई दिन से भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या अधिक होने से जनरल वार्ड में बेड फुल हैं। ऐसे में मरीजों को सर्जिकल वार्ड और हड्डी वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। उधर, सात बेड का डेंगू वार्ड भी कई दिन से मरीजों से फुल चल रहा है। दस बेड के इमरजेंसी वार्ड में पहले से बेड नहीं हैं। यहां एक-एक बेड पर दो-दो मरीज तक लिटाए हैं। ट्रामा सेंटर के बरामदे में भी बुखार के मरीज रखे हैं।
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डेंगू वार्ड में बेड घटाए
डेंगू की दस्तक के साथ ही करीब डेढ़ माह पहले एसबीडी जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 50 बेड का वार्ड तैयार किया था। इसमें जनरल वार्ड की बगल में सात बेड के साथ ही बर्न वार्ड और इमरजेंसी वार्ड के बेड भी लिए गए थे। कुछ दिन बाद ही बर्न वार्ड और इमरजेंसी वार्ड से डेंगू वार्ड खत्म किया। वर्तमान में मात्र सात बेड का डेंगू वार्ड है, जो फुल है। ऐसे में यदि डेंगू के और मरीज आते हैं तो उनको भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है।
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यदि डेंगू के और मरीज भर्ती होते हैं तो हमारे पास बर्न वार्ड को डेंगू वार्ड में बदलने का विकल्प है। रही बात बुखार के मरीजों को सर्जिकल और हड्डी वार्ड में रखने की तो कोशिश यही है कि मरीजों को असुविधा ना हो। एक बेड पर दो मरीज ना रहे। - डॉ. आभा वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल।