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फतवा : अंधेरा कर तरावीह की नमाज पढ़ना गलत

Sun, 12 May 2019 11:54 PM IST
Prag Gupta ब्यूरो, सहारनपुर
ब्यूरो, सहारनपुर Published by: Prag Gupta Updated Sun, 12 May 2019 11:54 PM IST
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Fatwa: Reading the prayer of the goddess to the dark is wrong
दारुल उलूम देवबंद
विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम से जारी हुए एक फतवे में मुकद्दस रमजान माह में तरावीह की नमाज के दौरान लाइटें बंद कर अंधेरा करने को गलत और एक रस्म करार दिया गया है। मुफ्तियों ने कहा कि तरावीह की नमाज भी अन्य नमाजों की तरह लाइट जलाकर अदा की जानी चाहिए। 
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मुकद्दस रमजान माह में मस्जिदों और घरों में होने वाली विशेष तरावीह की नमाज के दौरान अधिकांश लोग लाइटें बंद कर अंधेरा कर देते हैं। ऐसा करने के पीछे तर्क यह दिया जाता है कि अंधेरे होने से कुरआन-ए-करीम को ध्यान से सुना जाता है। जबकि लोगों के इस तर्क को इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के मुफ्तियों ने खारिज कर दिया है।
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मसले को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हो रहे दारुल उलूम के एक फतवे में लाइटें बंद कर तरावीह की नमाज अदा करने को एक रस्म करार दिया गया है। मुफ्तियों ने फतवे में कहा कि शरीयत में इसकी कोई असलियत नहीं है। जिस तरह अन्य नमाजें लाइट जलाकर अदा की जाती है उसी तरह तरावीह की नमाज भी लाइट जलाकर अदा की जाए। उन्होंने सभी लोगों से इस तरह के अमल को दरकिनार कर गलत रस्मों से बचने की अपील की है। 
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