फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Father's dream is to be fulfilled, this is the purpose of life

पूरा करना है पिता का सपना, यही जीवन का उद्देश्य

Fri, 18 Jun 2021 11:58 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jun 2021 11:58 PM IST
विज्ञापन
Father's dream is to be fulfilled, this is the purpose of life
फादर्स डे -- पिता केपी सैनी के साथ युवा अधिवक्ता अमित सैनी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। हर साल जब फादर्स- डे आता था तो बच्चे अपने पिता पर प्रेम न्यौछावर करते थे, गिफ्ट देने और खुशी मनाने में बच्चों को अलग ही आनंद आता था, लेकिन इस बार कोरोना ने जो जख्म दिया है, उससे फादर्स डे भी फीका हो गया है। एक तरफ ऐसे बच्चे हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया, उन्हें पिता की कमी खल रही है तो, दूसरी तरफ वह पिता भी हैं, जिनकी औलाद को कोरोना संक्रमण ने छीन लिया। पेश है ऐसे ही परिवारों के बारे में रिपोर्ट...
विज्ञापन

पिता का सपना पूरा करना ही उद्देश्य
सहारनपुर। अधिवक्ता अमित सैनी का परिवार सर्किट हाउस रोड बापूजीनगर में रहता है। अमित बताते हैं कि उनके पिता केपी सैनी वरिष्ठ अधिवक्ता थे, जिन्हें कोरोना ने छीन लिया। वर्ष 1982 के बाद से दवाओं का भी कारोबार शुरू किया। उन्होंने भी पिता की तरह ही एलएलबी कर प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी, पिता ने हमेशा प्रोत्साहन दिया। दवाओं का कारोबार खड़ा करने के लिए प्रेरित किया। पिता हमेशा ही अलग पहचान बनाने की सीख देते थे। अब उनका सपना पूरा करना ही मेरे जीवन का उद्देश्य है।
विज्ञापन

बैंक की नौकरी पाने के पिता के सपने को करेगा पूरा
छुटमलपुर। महाराणा प्रताप कॉलोनी निवासी आदित्य शर्मा (21) ने कोरोना काल में अपने पिता मुकेश शर्मा को खोया है। मुकेश शर्मा न्यूज पेपर एजेंट थे। आदित्य पिता को याद कर कहते हैं कि शाम को घर पहुंचने पर पिता सबसे पहले उसके बारे में ही पूछते थे कि वह कहां है और उसने दिन भर क्या किया है। पिता ने हमेशा उसे नैतिक मूल्यों के साथ जीवन जीने की सीख दी। उनके आश्रय में बिताए जीवन के स्नेहिल पल कभी नहीं भूल पाएगा। पिता का सपना था कि वह सरकारी बैंक में नौकरी करे। इसके लिए रुड़की के कालेज से बीसीए कर रहा हूं और एमबीए फाइनेंस करने के बाद बैंक की प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

गलती पर डांटते नहीं थे, बैठाकर समझाते थे पिता
सरसावा। अलीपुरा गांव के कार्तिक (22) की दुनिया ही कोरोना ने उजाड़ दी। दो साल पहले माता की मौत के बाद पिता जयकुमार के साये तले भविष्य के सपने बुन रहे कार्तिक को कोरोना संक्रमण अनाथ बना गया। वह चाचा चाची के पास रहता है। कार्तिक बताता है कि पिता की इच्छा थी कि वह उच्च शिक्षा प्राप्त करे। माता की मौत के बाद तो पिता उसके प्रति और कोमल हो गए थे। बीते दो सालों में मां का प्यार भी उन्होंने ही दिया। गलती करने पर डांटने की बजाए बैठाकर समझाते थे। वे उसके आदर्श और मार्गदर्शक थे। वर्तमान में वह एमए प्रथम वर्ष में अध्य्यनरत है।
पिताजी चाहते थे बने आदर्श ग्राम पंचायत
नानौता। कोरोना काल में प्रधान पिता अब्बास चौधरी की मौत के बाद ग्राम प्रधान बने बिलाल चौधरी बताते हैं कि पिता शुरू से ही सामाजिक व राजनीतिक कार्यों में उन्हें अपने साथ रखते थे। यही कारण है कि पिता की मौत के बाद राजनीतिक विरासत को उन्हें सौंपी गई। उनके पिता का सपना था कि गांव को विकास कार्यों के बूते आदर्श ग्राम पंचायत घोषित कराते हुए राज्यपाल से पुरस्कार दिलाया जाए। अब उस सपने को पूरा करना जिम्मेदारी है। पिता ने हमेशा गरीबों की मदद करने और ईमानदारी से जीवन जीने की सीख दी है।
ईश्वर इतनी उम्र दे दे कि पोती के हाथ पीले कर बेटे की जिम्मेदारी निभा सकूं
नागल। क्षेत्र के गांव बढेड़ी कोली निवासी राम प्रसाद कश्यप (70) के बेटे पवन कश्यप (45) को कोरोना काल लील गया। जीवन संध्या पर पहुंच चुके राम प्रसाद कश्यप बेटे को याद कर विचलित हो जाते हैं। बूढ़ी आंखों में नमी आ जाती है। कहीं शून्य में देखते हुए कहते हैं कि बेटे की अर्थी को कंधा देकर शमशान घाट तक जाने से बड़ा दुख उनके लिए कोई नहीं। दो बहनों की शादियों में भी पवन ने अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई। सुबह शाम उनके पास आकर खैर खबर लेता था। उसके जाने के बाद विधवा बहू और पोती की देखरेख उनके पास आ गई है। ईश्वर इतनी उम्र दे दे कि पोती के हाथ पीले कर बेटे की जिम्मेदारी निभा सकूं।

अब कौन पूछेगा मेरा हाल
छुटमलपुर। क्षेत्र के गांव गदरहेड़ी निवासी फूल सिंह गोयल (70) के जवान बेटे नवीन गोयल (34) को कोरोना की दूसरी लहर छीन ले गई। बेटे को याद कर गमगीन हो जाते हैं। बेटा गैस एजेंसी पर डिलीवरी मैन की नौकरी कर अपने दो बच्चों और पत्नी का पेट पाल रह था। बेटे की मौत ने उन्हें तोड़ दिया है। उनकी परलोक गमन की उम्र थी और बेटे की हंसते खेलते हुए जीवन बिताने की लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। बेटा बेहद मिलनसार और हर किसी के दुख सुख में खड़ा होने वाला था। सिलिंडरों की डिलीवरी करके लौटता तो भी उनके कमरे में आकर हाल चाल पूछता था। नवीन ही उनके बुढ़ापे का सहारा था। बुढ़ापे की लाठी तो टूट ही गई बेटे की बहू बच्चों की जिम्मेदारी भी उन पर आ गई है।

फूल सिंह

फूल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

नवीन गोयल

नवीन गोयल- फोटो : SAHARANPUR

राम प्रसाद और पवन

राम प्रसाद और पवन- फोटो : SAHARANPUR

पिता के साथ अलीपुरा का कार्तिक

पिता के साथ अलीपुरा का कार्तिक- फोटो : SAHARANPUR

मुकेश शर्मा

मुकेश शर्मा- फोटो : SAHARANPUR

आदित्य शर्मा

आदित्य शर्मा- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed