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मन की गंदगी दूर करता है रोजा
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हेल्पलाइन पर किया रोजेदारों की शंकाओं का समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने मंगलवार को हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि रोजा मन की गंदगी, तन के प्रदूषण और बुरे विचारों की दुर्गंध को इंसान से दूर करता है।
सवाल:- जनपद पीलीभीत निवासी उमर अब्दुल्ला ने पूछा कि उन्हें खाली पेट गैस की दवा लेनी होती है। क्या वह उस दवा से इफ्तार कर सकते हैं।
जवाब:- शरीयत के मुताबिक खजूर से इफ्तार करना बेहतर है, अगर खजूर न हो तो पानी से इफ्तार करें। इफ्तार के समय खाली पेट वाली दवा ले सकते हैं।
सवाल:- बिजनौर निवासी फरहत इलाही ने पूछा कि तरावीह की बीस रकातों में हर दो रकात पर नियत करना जरूरी है क्या।
जवाब:- तरावीह की हर दो रकात पर अलग-अलग नियत करना बेहतर है। अगर बीस रकात की एक साथ शुरू में नियत कर ली जाए तो भी काफी है।
सवाल:- रामपुर मनिहारान निवासी नेहा सिद्दीकी ने पूछा कि रोजे की हालत में वुजू करते समय हलक में पानी चला गया। क्या इससे उनका रोजा टूटा है या नहीं।
जवाब:- वुजू करते वक्त हलक में पानी चला गया और रोजा याद था तो वह टूट गया। इसके लिए कजा वाजिब होगी। अगर इतेफाक पानी चला जाए तो रोजा नहीं टूटेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने मंगलवार को हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि रोजा मन की गंदगी, तन के प्रदूषण और बुरे विचारों की दुर्गंध को इंसान से दूर करता है।
सवाल:- जनपद पीलीभीत निवासी उमर अब्दुल्ला ने पूछा कि उन्हें खाली पेट गैस की दवा लेनी होती है। क्या वह उस दवा से इफ्तार कर सकते हैं।
जवाब:- शरीयत के मुताबिक खजूर से इफ्तार करना बेहतर है, अगर खजूर न हो तो पानी से इफ्तार करें। इफ्तार के समय खाली पेट वाली दवा ले सकते हैं।
सवाल:- बिजनौर निवासी फरहत इलाही ने पूछा कि तरावीह की बीस रकातों में हर दो रकात पर नियत करना जरूरी है क्या।
जवाब:- तरावीह की हर दो रकात पर अलग-अलग नियत करना बेहतर है। अगर बीस रकात की एक साथ शुरू में नियत कर ली जाए तो भी काफी है।
सवाल:- रामपुर मनिहारान निवासी नेहा सिद्दीकी ने पूछा कि रोजे की हालत में वुजू करते समय हलक में पानी चला गया। क्या इससे उनका रोजा टूटा है या नहीं।
जवाब:- वुजू करते वक्त हलक में पानी चला गया और रोजा याद था तो वह टूट गया। इसके लिए कजा वाजिब होगी। अगर इतेफाक पानी चला जाए तो रोजा नहीं टूटेगा।