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खेती के साथ बासमती का निर्यात भी करेंगे किसान
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खेत में रोपाई करती महिला
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। प्रदेश सरकार बासमती चावल के निर्यात को प्रोत्साहित कर रही है। इसके चलते जनपद में तीन कृषक उत्पादक संगठन इस बार 151.30 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्यात योग्य बासमती की खेती करा रहे हैं। बासमती के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कृषि विपणन विभाग किसानों को न सिर्फ प्रशिक्षण दिलाएगा बल्कि निर्यातकों और किसानों की बैठक भी कराएगा। पैदा होने वाली बासमती का 30 प्रतिशत निर्यात करने पर किसानों को 10 लाख रुपये का अनुदान भी दिया जाएगा।
अपनी खुश्बू और स्वाद के लिए मशहूर भारतीय बासमती चावल दुनिया भर में खासा पसंद किया जाता है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार बासमती चावल के निर्यात पर जोर दे रही है। निर्यात होने से न सिर्फ किसानों को उनके बासमती धान का लाभकारी मूल्य मिल सकेगा, बल्कि देश को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। जनपद के तीन कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने कलस्टर बनाकर निर्यात योग्य बासमती धान तैयार करने के लिए 151.30 हेक्टेयर रकबे में बासमती धान की रोपाई करायी है। इनमें अन्न संपदा कृषक उत्पादक संगठन नागल ने 50.15 हेक्टेयर, ग्राउंड-टू फार्मर कृषक उत्पादक संगठन रामपुर मनिहारान ने 51 हेक्टेयर और मोक्षार्थ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी नानौता ने 50.15 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बासमती धान की रोपाई कराई है। कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत निर्यात करने वाले कलस्टर से जुडे़ किसानों को कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग की ओर से दस लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
किसानों को दिलाया जाएगा प्रशिक्षण
निर्यात योग्य बासमती धान को पैदा करने वाले एफपीओ से जुडे़ किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसमें किसानों को न सिर्फ विदेशों में प्रतिबंधित कीटनाशकों जानकारी दी जाएगी बल्कि कीटों और बीमारियों पर अंकुश लगाने के लगाने के जैविक तरीकों को भी बताया जाएगा। इसके अलावा कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग बासमती उत्पादकों और निर्यातकों के बीच बैठक भी कराएंगे।
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- सुनील सोम, वरिष्ठ विपणन निरीक्षक।
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अपनी खुश्बू और स्वाद के लिए मशहूर भारतीय बासमती चावल दुनिया भर में खासा पसंद किया जाता है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार बासमती चावल के निर्यात पर जोर दे रही है। निर्यात होने से न सिर्फ किसानों को उनके बासमती धान का लाभकारी मूल्य मिल सकेगा, बल्कि देश को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। जनपद के तीन कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने कलस्टर बनाकर निर्यात योग्य बासमती धान तैयार करने के लिए 151.30 हेक्टेयर रकबे में बासमती धान की रोपाई करायी है। इनमें अन्न संपदा कृषक उत्पादक संगठन नागल ने 50.15 हेक्टेयर, ग्राउंड-टू फार्मर कृषक उत्पादक संगठन रामपुर मनिहारान ने 51 हेक्टेयर और मोक्षार्थ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी नानौता ने 50.15 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बासमती धान की रोपाई कराई है। कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत निर्यात करने वाले कलस्टर से जुडे़ किसानों को कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग की ओर से दस लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
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किसानों को दिलाया जाएगा प्रशिक्षण
निर्यात योग्य बासमती धान को पैदा करने वाले एफपीओ से जुडे़ किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसमें किसानों को न सिर्फ विदेशों में प्रतिबंधित कीटनाशकों जानकारी दी जाएगी बल्कि कीटों और बीमारियों पर अंकुश लगाने के लगाने के जैविक तरीकों को भी बताया जाएगा। इसके अलावा कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग बासमती उत्पादकों और निर्यातकों के बीच बैठक भी कराएंगे।
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- सुनील सोम, वरिष्ठ विपणन निरीक्षक।