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सहारनपुर की सीटो का समीकरण

Mon, 14 Feb 2022 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Feb 2022 12:06 AM IST
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Equation of seats of Saharanpur district
सहारनपुर शहर सीट
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पंजाबी और वैश्य समाज के वोटरों की मुट्ठी में बंद है जीत
सहारनपुर। सहारनपुर शहर सीट पर सपा अपनी सीट बचाने और भाजपा फिर से सीट कब्जाने की जंग में है। इस बार सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी मौजूदा सपा विधायक संजय गर्ग किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी पूर्व विधायक राजीव गुंबर भाजपा के परंपरागत वोटों के सहारे समीकरण बनाए हुए है। तीन बार के एमएलए संजय गर्ग सपा के परंपरागत वोट बैंक, वैश्य समाज के बलबूते फिर से विधानसभा जाने की कोशिश में है। बसपा प्रत्याशी मनीष अरोरा अनुसूचित और अपने समाज के वोटों के सहारे है। कांग्रेस प्रत्याशी सुखविंदर कौर मजबूत पकड़ के साथ किसी का भी गणित बिगाड़ सकती है। आम आदमी पार्टी के उस्मान मलिक भी मुस्लिम वोटरों के भरोसे है। इस सीट पर सबसे अधिक 443376 वोटर है, जिनमें 1.55 लाख मुस्लिम, 85 हजार पंजाबी और 60 हजार वैश्य वोटर निर्णायक भूमिका में है।
इस बार आसान नहीं समीकरण साधना
नकुड़ विधानसभा
नकुड़ सीट पर चुनाव दिलचस्प होगा। सभी की निगाह इस सीट पर लगी है। लगातार चार बार के विधायक डॉ. धर्मसिंह सैनी इस बार भाजपा से पाला बदलकर साइकिल पर सवार होकर गठबंधन के सहारे पांचवीं बार विधानसभा पहुुंचना चाहते है। कभी उनके विरोधी रहे मुस्लिम समाज के नेता इमरान मसूद अब उनके साथ है। भाजपा ने गुर्जर समाज के मुकेश चौधरी पर भरोसा जताया है। वो अपने समाज के अलावा भाजपा के परंपरागत वोट के बलबूते मैदान में है। बसपा से साहिल खान दलित-मुस्लिम समीकरण से मुकाबले को त्रिकोणिय बनाए हुए है। हालांकि ठाकुर बिरादरी के कांग्रेस प्रत्याशी रणधीर सिंह चौहान किसी का भी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। आम आदमी पार्टी से आशीष त्यागी, आजादसमाज पार्टी से सोनू कुमार, एआईएमआईएम से रिजवाना भी वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं। सीट पर चुनावी गणित रोचक बना है। इस सीट पर 354943 वोटर अपने विधायक को चुनेंगेे।
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देवबंद विधानसभा
वोटों का बिखराव बदल सकता है समीकरण
देवबंद। सीट पर इस बार राजपूत मतदाताओं का रुझान हार-जीत में अहम भूमिका निभा सकता है। भाजपा ने विधायक बृजेश सिंह पर ही भरोसा जताया है। गठबंधन के सपा से पूर्व राज्यमंत्री राजेंद्र राणा के बेटे कार्तिकेय राणा मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। ठाकुर बिरादरी के मतों पर लोगों की निगाहें टिकी है। वोटों का बिखराव किसी का भी समीकरण बदल सकता है। कार्तिकेय राणा मुस्लिम मतों के अलावा राजपूत बिरादरी में सेंधमारी कर अपना गणित बनाए हुए है। भाजपा प्रत्याशी बृजेश सिंह भाजपा के परंपरागत वोट बैंक अति पिछड़ों, सवर्णों के अलावा ध्रुवीकरण, विकासऔर सुरक्षा के मुद्दे को लेकर मैदान में है। बसपा से चौधरी राजेंद्र सिंह पार्टी के वोट बैंक और अपने समाज के वोटरों के अलावा अन्य समाज के वोटरों में भी सेंध लगा रहे हैं। कांग्रेस से राहत खलील और एआईएमआईएम के उमैर मदनी की नजर मुस्लिम मतों पर है। मुस्लिम और अनुसूचित मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने के कारण मुकाबला रोचक बन गया है। वैसे राजपूत बिरादरी की 35 हजार वोटों अपने पाले में करने को भाजपा-सपा में जंग है। जबकि भीतरघात से किसी भी समीकरण बिगड़ सकते है। इस सीट पर 348070 वोटर है।
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बेहट विधान सभा
मुस्लिम, दलितों का रुख तय करेगा नतीजा
बेहट। प्रदेश की एक नंबर विधानसभा सीट बेहट में कुल मतदाता तीन लाख 72 हजार 79 है। इनमें महिला मतदाता एक लाख 76 हजार 925 और पुरुष मतदाता एक लाख 95 हजार 141 हैं। वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई थी। गत चुनाव में यहां से कांग्रेस के टिकट पर नरेश सैनी विधायक बने थे। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए नरेश सैनी पर ही इस बार भाजपा ने दांव लगाया है। हिंदू वोटों में इस सीट पर सैनी बिरादरी की अच्छी खासी संख्या है। नरेश सैनी अपनी बिरादारी के साथ ही अति पिछड़े और स्वर्ण वोट के साथ दलितों में सेंधमारी कर फिर से विधानसभा में पहुंचने का समीकरण बनाए है। सीट पर करीब डेढ़ लाख मुस्लिम वोट हैं। इन्हें सपा के पाले में लामबंद कर पूर्व एमएलसी और प्रत्याशी उमर अली खान चुनावी समर में पार होने की जुगत भिड़ा रहे हैं। जबकि बसपा के रईस मलिक पार्टी के वोट बैंक के साथ ही अपनी तेली बिरादरी के मतदाताओं के सहारे चुनावी रण का रोचक बनाए हुए है। कांग्रेस ने पूनम कांबोज पर दांव लगाया है। पूनम अपनी बिरादरी और कांग्रेस के परंपरागत वोटों के सहारे चुनाव लड़ रही है। आखिर में इस सीट पर दलित और मुस्लिमों का रुख ही चुनाव नतीजे तय करेगा।
रामपुर मनिहारान सुरक्षित सीट
जीजा-साला आमने सामने, होगा त्रिकोणिय मुकाबला
रामपुर मनिहारान। सुरक्षित सीट रामपुर मनिहारान 2012 में अपने अस्तित्व में आई था। तब बसपा के रविंद्र मोल्हू विधायक बने थे। 2017 में भाजपा के देवेंद्र निम ने रविंद्र मोल्हू को हराया था। भाजपा ने इस बार फिर से विधायक देवेंद्र निम को ही प्रत्याशी बनाया है। गठबंधन से रालोद ने विवेककांत (देवेंद्र निम के रिश्ते में बहनोई) पर दांव खेला है। देवेंद्र निम भाजपा के स्वर्ण और पिछड़े वोट बैंक के साथ ही अपने सजातीय मतदाताओं के बूते फिर से विधान सभा पहुंचने की जुगत लगा रहे हैं। बसपा से रविंद्र मोलहू पार्टी के परंपरागत वोटों के साथ ही मुस्लिम व गुर्जर वोट में अपनी सेंधमारी कर रहे हैं। गठबंधन प्रत्याशी विवेककांत की उम्मीद अपने पक्ष में मुस्लिमों की लामबंदी तथा जाटों के रुख पर टिकी है। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी ओमपाल सिंह अपनी संभावनाएं सर्व समाज के मतदाताओं में तलाश रहे हैं। यहां पर मुकाबला त्रिकोणीय बना है। सीट पर तीन लाख 23 हजार 68 वोटर है। इनमें एक लाख 51 हजार 280 महिला एवं एक लाख 71 हजार 780 पुरुष मतदाता हैं।
गंगोह विधानसभा सीट
चौधरी यशपाल सिंह और मसूद परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर
गंगोह। परिसीमन से पहले इस सीट पर धुर विरोधी रहे चौधरी यशपाल सिंह और काजी रशीद मसूद परिवारों का दबदबा था। वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद वजूद में आई गंगोह सीट पर गत 2017 के चुनाव में प्रदीप चौधरी भाजपा के टिकट पर विधायक बने थे। वर्ष 2019 में उनके सांसद बनने पर हुए उप चुनाव में चौ. कीरत सिंह ने यहां फिर से कमल खिलाया था। भाजपा ने इस बार कीरत सिंह पर ही दांव लगाया है। कीरत सिंह का दारोमदार पार्टी के स्वर्ण और पिछड़े वोटर के साथ ही अपनी गुर्जर बिरादारी पर है। गठबंधन से सपा ने इस बार भीे चौ. यशपाल सिंह के बेटे चौ इंद्रसेन को प्रत्याशी बनाया है। वे मुस्लिम मतों के अलावा गुर्जर मतों में सेंध लगाकर अपना समीकरण बना रहे हैं। बसपा से काजी रशीद मसूद के भतीजे सपा नेता इमरान मसूद के जुड़वा भाई नोमान मसूद चुनाव मैदान में हैं। नोमान मसूद और चौ. इंद्रसेन दोनों में मुस्लिम वोटों को अपने अपने पाले में करने को लेकर जद्दोजहद है। चुनावी रण में जुड़वा भाई इमरान और नोमान मसूद एक दूसरे के विरोधी बने हैं कांग्रेस के अशोक सैनी भी सियासी जमीन को तलाश रहे हैं। मुस्लिम और गुर्जर मतदाताओं का रुख प्रत्याशियों की तकदीर तय करेगा। इस सीट पर चौधरी यशपाल सिंह और मसूद परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है।

सहारनपुर देहात विधानसभा सीट
सहारनपुर। कभी हरोड़ा सुरक्षित सीट के नाम से प्रदेश भर में अपनी पहचान रखने वाली सहारनपुर देहात विधान सभा सीट वर्ष 2012 के परिसीमन के बार सामान्य हो गई थी। गत चुनाव में यहां से कांग्रेस के मसूद अख्तर विधायक बने थे। इस बार भाजपा ने बसपा से चार बार के विधायक रहे जगपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया है। जगपाल सिंह पार्टी के स्वर्ण, पिछड़ा कोर वोटर के साथ ही अपनी बिरादरी के मतदाताओं को साधकर विधान सभा पहुंचने की जुगत भिड़ा रहे हैं। बसपा ने भी इस सामान्य सीट पर अनुसूचित जाती के अजब सिंह पर दांव लगाया है। अजब सिंह बसपा के परंपरागत दलित वोटों के साथ ही सोशल इंजीनियरिंग के साथ अपनी राह आसान करने में लगे हैं। गठबंधन ने पूर्व एमएलसी आशु मलिक को प्रत्याशी बनाया है। आशु मलिक का भाग्य मुस्लिमों की उनके पक्ष में लामबंदी और सपा के यादव वोट बैंक पर टिका है। कांग्रेस के संदीप राणा अपनी बिरादरी के साथ ही कांग्रेस के वोटरों में अपनी संभावना तलाश रहे हैं। इस सीट पर दलितों और मुस्लिमों की भूमिका निर्णायक रहेगी।
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