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पर्यावरण मुस्कुराया, हरियाली खिलखिलाई

Thu, 04 Jun 2020 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2020 11:51 PM IST
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Environment smiled, greenery blossomed
रणजीत नगर में पौधरोपण करती डाक्टर नैना मिगलानी। - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। हरियाली से लकदक वन मिले तो लॉकडाउन में सुधरी आबोहवा ने सहारनपुर शहर से करीब 200 किलोमीटर एरियल दूरी पर उत्तराखंड की पहाड़ियों पर जमीं बर्फ के दर्शन करा दिए। यह नजारा सदियों बाद देखने को मिला। जिसे पर्यावरण प्रेमियों ने न केवल कैमरे में कैद किया, बल्कि तस्वीरों ने देश और दुनिया तक में धाक जमाई। हरियाली को लेकर किए गए राष्ट्रीय सर्वे में उत्तर प्रदेश का 126 वर्ग किलोमीटर जमीन पर हरियाली की खुशहाली लौटी। इसमें सहारनपुर ने सबसे अधिक हरियाली फैलाई। अब नतीजा, ये है कि आबोहवा और हरियाली का समावेश से सहारनपुर के पर्यावरण में बड़ा सुधार आया है, पर्यावरण प्रेमी ये भी चेताते हैं कि इस ओर लापरवाह बने तो फिर स्थिति जस की तस हो सकती है। लिहाजा पर्यावरण और प्रकृति के करीब रहिए।
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2019 के अंतिम महीनों में रिपोर्ट आई कि हरियाली में सहारनपुर अव्वल आया है। कोरोना के वार से देश में लॉकडाउन हो गया। इससे वाहनों के पहिये थम गए। उद्योग धंधे ठप पड़ गए। जो सहारनपुर और आसपास का हवा में प्रदूषण का सामान्य दिनों में आंकड़ा रहता था, वो 200 वायु गुणवत्ता सूचकांक के करीब पहुंचता था, लॉक डाउन में ये पहली बार 40 के पायदान पर आ गया। हवा में धूल कण छट गए। बारिश और हवा के बीच इसी लॉकडाउन में अद्भूत नजारा देखने को मिला। इसमें सहारनपुर शहर से उत्तराखंड की पर्वत श्रृंखलाएं जो बर्फ से ढकी थी, वो एक बार नहीं कई बार दिखाई दी। जिसे कई लोगों ने कैमरे में कैद किया और देश और दुनिया में ये तेजी से वायरल हुआ। आवाजाही, ध्वनि प्रदूषण, शुद्ध आबोहवा और मानवीय गतिविधियां बेहद कम होने से वन्य जीव भी जंगल से निकलकर आबादी की ओर पहुंचे।
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ये रिपोर्ट हरियाली के लिहाज से खुश करने वाली रही
इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट की 2019 के रिपोर्ट में प्रदेश में 126 वर्ग किलोमीटर का ग्रीन कवर बढ़ने का आधिकारिक डाटा सामने आया। इसमें अकेले सहारनपुर ने 70.2 और मुजफ्फरनगर में 26.11 वर्ग किलोमीटर हरियाली की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हर दो साल पर किए सर्वे में प्रदेश में सहारनपुर की वन संपदा( जिसमें सामाजिक सहभागिता शामिल रही) ने वन संपदा को सबसे अधिक बढ़ाया। पश्चिमी यूपी के जनपद मेरठ में करीब 1.65 वर्ग किलोमीटर में हरियाली की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि बिजनौर में 1.61 वर्ग किलोमीटर, बागपत में हरियाली 1.29 वर्ग किलोमीटर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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जंगल की इन जिलों में ये है जियोलाजिकल स्थिति
सहारनपुर। हरियाली के जियोलॉजिकल क्षेत्र के मुताबिक सहारनपुर 3689, बिजनौर 4561, मुजफ्फरनगर 4008, , मेरठ 2559 और बागपत 1321 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
इनसेट
अबकी वे सब हुआ, जो सदियों तक नहीं हुआ। सहारनपुर का हरियाली का दायरा बढ़ा। भारत सरकार ने इसकी रिपोर्ट दी। सामाजिक सहभागिता, ग्राम पंचायत, नगर पंचायत सहित अन्य सरकारी महकमों के साथ पौधरोपण का विस्तृत अभियान चलाया। हरियाली के रोपण में रिकार्ड भी हमने बनाया, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम पर्यावरण और प्रकृति को लेकर फिर लापरवाह हो जाएं। ये क्षण कभी-कभी आता है, इसलिए पर्यावरण, वन्य जीव और प्रकृति के प्रति प्रेम कायम रहना होगा।
- वीके जैन, वन संरक्षक, सहारनपुर परिक्षेत्र सहारनपुर
पौधे लगाएं, जीवन को बचाएं : नैना
सहारनपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. नैना मिगलानी ने रणजीत नगर में पौधरोपण कर पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन को बचाने के लिए पौधरोपण करना जरूरी है।

बृहस्पतिवार डाक्टर नैना मिगलानी ने 40 पौधे रोपित किए और पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों को प्रेरित किया। डॉ. नैना मिगलानी ने कहा कि वर्ष में कम से कम तीन बार हर व्यक्ति को पौधरोपण करना चाहिए। धरती हरी भरी रहेगी तो जीवन बीमारी मुक्त होगा। साफ-सुथरी हवा मिलेगी, जिससे फेफड़ों सहित अनेक बीमारियों से बचाव होगा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को पौधरोपण करने का संकल्प लेना चाहिए। इससे जहां मानव जाति को लाभ होगा, वहीं पर्यावरण बचेगा और पृथ्वी का संतुलन भी बनेगा रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में भी पौधरोपण करने का संकल्प लिया।
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