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समर कैंप में बेकार चीजों से कीमती वस्तुएं बनाने पर जोर

Fri, 27 May 2022 11:18 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 27 May 2022 11:18 PM IST
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Emphasis on making valuables from waste things in summer camp
गोचर कृषि इंटर कालेज में बच्चों को उपयोगी वस्तुए बनाना सिखाते अध्यापक - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। विद्यालयों में समर कैंप की शुरुआत हो चुकी है। खास बात यह है कि पारंपरिक गतिविधियों के साथ जो सबसे अधिक गतिविधि इस समय प्रचलन में है वह है कचरे से उपयोगी वस्तुएं बनाने की। इसे ज्यादातर विद्यालयों में अपनाया जा रहा है, जिससे कि इस्तेमाल से बाहर हो चुकी चीजों को इस्तेमाल में लाया जा सके और पृथ्वी पर कचरा कम से कम हो।
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बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में 21 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो गए हैं। खास बात यह है कि इस बार परिषद ने सभी माध्यमिक विद्यालयों में 21 से 28 मई तक समर कैंप आयोजित करने के आदेश दिए हैं, जिसके अनुपालन में समर कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। समर कैंप आयोजित करने के पीछे मकसद विद्यार्थियों में छिपी खेल, कला आदि से जुड़ी प्रतिभा को निखारना है। माध्यमिक विद्यालयों में समर कैंप समापन की ओर है। समर कैंप में नृत्य, गायन, वादन, खेल, सिलाई और कढ़ाई तो हो ही रही है, लेकिन सबसे अधिक वेस्ट मैटीरियल यानी इस्तेमाल से बाहर हो चुकी चीजों से उपयोगी चीजें बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें प्लास्टिक की बोतलों को गमलों के रूप में इस्तेमाल करना आदि शामिल हैं। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य शोभा चौधरी ने बताया कि जिस व्यक्ति के भीतर रचनात्मकता होती है वह बेकार चीजों से भी बेशकीमती चीजें बना सकता है। विद्यार्थियों को यह बात सिखाया जाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इस्तेमाल से बाहर हुई चीजें धरती पर कचरा बढ़ा रही हैं, जिसका निस्तारण बड़ा मुश्किल कार्य हो रहा है। ऐसे में चीजों का अधिक से अधिक इस्तेमाल होना चाहिए। एसएएम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मनोज कुमार काकरान का कहना है कि वेस्ट मैटीरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना एक कला है, जो सबको आनी चाहिए। उधर, पब्लिक स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की शुरुआत 25 मई और उसके बाद हो रही है। ऐसे में अवकाश के साथ ही समर कैंप शुरू कर दिए गए हैं।
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रचनात्मक दिमाग वाले बच्चे स्मार्ट कहलाते हैं। माध्यमिक विद्यालयों में चल रहे समर कैंप विद्यार्थियों की रुचि के अनुरूप कराने के आदेश मिले थे, जिनमें कला, खेल, सिलाई, कढ़ाई आदि के साथ ही कचरे से उपयोगी वस्तुएं बनाने का हुनर भी विद्यार्थियों को शिक्षकों के द्वारा सिखाया गया है।
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रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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