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करने होंगे कारगर प्रयास, तभी सुधरेगी शहर की सूरत

Fri, 05 Mar 2021 09:07 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 09:07 PM IST
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Efforts will have to be made, only then the appearance of the city will improve
सहारनपुर। ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2020 में सहारनपुर के पिछड़ने के कारणों पर नगर निगम को चिंतन मनन करना होगा। प्रतिस्पर्धा में शामिल जिन बिंदुओं पर फोकस नहीं होने के कारण सहारनपुर को रैकिंग में 44वां स्थान मिला है। इसमें केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि और विभागों के कार्यों का भी आकलन किया गया। जिन प्रमुख बिंदुओं को प्रतिस्पर्धा का आधार बनाया गया। उनकी पड़ताल करें तो सहारनपुर को अब भी बहुत कुछ सुधार करने की जरूरत है। पेश है रिपोर्ट...
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फुटपाथ, साइकिल ट्रैक की व्यवस्था
फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और ग्रीन कवर भी प्रतिस्पर्धा का प्रमुख बिंदु रहा। नगर में जीपीओ रोड पर इकलौता और बेहद पुराना फुटपाथ है, जिस पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। कोर्ट रोड पुल पर दोनों ओर का फुटपाथ जर्जर है। निगम ने हाल ही में चकराता रोड पर नाले के ऊपर फुटपाथ बनाया है, जिस पर दुकानें सज गई हैं। कोर्ट रोड पर नाले के ऊपर स्लैब डालकर फुटपाथ बनाने की बात कही गई थी, जो नहीं बना है। अंबाला रोड पर 80 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद साइकिल ट्रैक बीच में ही छोड़ दिया गया।
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वाटर ट्रीटमेंट व्यवस्था
दो माह पहले नगर निगम की बैठक में शहर के सभी एसटीपी खराब होने की जानकारी जलकल के महाप्रबंधक मनोज सिंह की ओर से नगरायुक्त को दी गई। मल्हीपुर रोड पर भी बड़ा एसटीपी बनाने की योजना दो साल से लटकी है। इसके लिए जमीन नहीं मिलना सबसे बड़ी वजह बताया जा रहा है।
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महानगर की सड़कों की स्थिति
शहर की कई सड़कों की स्थिति बहुत ठीक नहीं है। पुराना कलसिया रोड बीते पांच साल से टूटा पड़ा है। शकलापुरी मार्ग पर 200 मीटर टुकड़ा आज तक नहीं बना। इसके अलावा बीते दो वर्ष से जिन इलाकों में पेयजल लाइन, गैस पाइपलाइन, सीवर लाइन, टेलीफोन केबिल लाइन आदि डालने के लिए सड़कों को खोदा गया। उनकी मरम्मत समय से नहीं हो रही। इससे लोग परेशान होते हैं।
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सुरक्षा की स्थिति भी सही नहीं
आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए शहर में सीसीटीवी और कंट्रोल रूम में मॉनिटरिंग का भी बिंदु था। शहर में यातायात विभाग की ओर से करीब 38 सीसीटीवी लगाए गए थे। जिनमें कुछ की स्थिति ठीक नहीं है। स्मार्ट सिटी के तहत शहर में 900 कैमरे लगाए जाने हैं, जिन पर भी अभी तक कार्य नहीं हुआ है।
स्वास्थ्य सेवा और मच्छरजनित रोग
स्वास्थ्य सेवाएं ऐसी हैं कि गंभीर मरीज को तुरंत हायर सेंटर के लिए चंडीगढ़ या देहरादून रेफर करना पड़ता है। बीते वर्ष ही नगर के वार्ड आठ के गांव चकदेवली में करीब 20 लोगों की जान डेंगू से गई थी। जिसकी वजह जलभराव था।
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प्रदूषण की स्थिति
प्रदूषण की रोकथाम की बात करें तो शहर में दो बड़े उद्योग आबादी के बीच वर्षों से जहरीला धुआं उगल रहे हैं। तमाम इंडस्ट्री शहर के बीच में चल रही हैं। एनजीटी ने ईंट भट्टों को शहर से बाहर करने के आदेश दिए हैं, इस पर काम नहीं हुआ। शहर के बीच से गुजरने वाली पांवधोई नदी और ढमोला नदी में गिरने वाले नालों, सीवर आदि के कारण नदियां दूषित हैं।
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शिक्षा
शहर में वर्तमान में 42 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें से प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे आज भी फर्श पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। स्मार्ट सिटी के तहत स्मार्ट क्लास बनाई जानी थीं, जिन पर नगर निगम ने अब काम शुरू किया है।

----- वर्जन
शहर में आमजन की सुविधाओं के लिए कई विकास कार्य कराए जा रहे हैं। यह एक साल के भीतर सेवा में आ जाएंगे। प्रतिस्पर्धा में जो भी कमियां रही हैं उनको दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। कोशिश यही है कि शहर का विकास हो और आम जन को बेहतर सुविधाएं मिलें।
-- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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