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नशे ने कर दिया बर्बाद, मौत नहीं, जीवन को अपनाएं
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सहारनपुर। युवाओं की रगों में नशा दौड़ रहा है, जिंदगी को मौत के मुहाने पर पहुंचाया जा रहा है। नशे का अवैध कारोबार करने वालों पर पुलिस कार्रवाई भी कर रही है और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, बावजूद इसके नशे की प्रवृत्ति कम नहीं हो रही है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब नशे ने जिंदगी छीन ली और परिवार को बर्बादी के कगार पर ला दिया।
शनिवार को अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। वर्तमान में पुलिस की ओर से भी नशे के खिलाफ एक सप्ताह का अभियान चलाया गया। इसके तहत युवाओं सहित नागरिकों को नशे से दूर रहने के प्रति जागरूक किया। शहर से लेकर कस्बों और गांवों में जागरूकता रैली निकाली गई। नशे के लिए बदनाम गांवों में घर-घर पहुंचीं महिला पुलिसकर्मियों ने उन परिवारों की महिलाओं को समझाया कि नशे से परिवार को बचाना है।
युवाओं ही नहीं, किशोरों की नसों में भी दौड़ रहा नशा
महानगर में ऐसे कई ठिकाने हैं, जहां पर युवा ही नहीं किशोर भी नशा करते हुए देखे जा सकते हैं। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड के पास रोजाना बड़ी संख्या में 10 से 15 साल तक के किशोर सूंघने वाला नशा करते दिखते हैं। यह भीख मांगकर नशे के लिए पैसों का इंतजाम कर लेते हैं। पुलिस ने कई बार कार्रवाई भी की है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया है।
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बर्बाद हो गया परिवार, नशे ने ली कइयों की जान
घंटाघर के निकट रहने वाला एक परिवार नशे की वजह से बर्बाद हो गया। इनके परिवार के एक युवक को नशे की लत ऐसी लगी उसने अपनी दुकान तक बेच दी। बाद में युवक नशे की वजह से बीमार हुआ और उसके इलाज में काफी पैसा लगा, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। उसके पिता का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने की जरूरत नहीं है। वह नशे की वजह से अपना बेटा खो चुके हैं। इसी तरह हसनपुर तिराहे के निकट रहने वाले युवक की जान नशे ने ले ली। युवक के भाई का कहना है कि नशे की वजह से भाई की जान गई। उसके भाई ने नशा छोड़ने की कोशिश भी की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
मेडिटेशन, इलाज व योग नशा छुड़ाने में सहायक
पद्मश्री भारत भूषण का कहना है कि रोजाना मेडिटेशन और योगासन करने से नशा छोड़ने में मदद मिलती है। मन को दृढ़ बनाकर नशे को छोड़ने का संकल्प लें और योग व मेडिटेशन करने के साथ ही खुद को दूसरे कामों में व्यस्त करें। ऐसा अगर दस दिन भी करेंगे तो नशे की लत से छुटकारा मिल जाएगा। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत पोपली का कहना है कि नशे का आदी होना भी एक प्रकार की बीमारी है, जिसका इलाज संभव है। नशे के आदी युवाओं को काउंसिलिंग के साथ ही उपचार की आवश्यकता है।
नशे ने ली चार की जान
मार्च में हसनपुर तिराहे के निकट रहने वाले एक युवक का शव नाले में पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुुआ कि अत्यधिक नशे की वजह से इसकी जान गई।
थाना जनकपुरी क्षेत्र में जिला अस्पताल के पीछे कच्ची सड़क पर मई माह में युवक का शव मिला, जिसकी पहचान नहीं हो सकी। इसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अत्यधिक नशा मौत की वजह थी। इसी माह रेलवे स्टेशन के पास एक व्यक्ति का शव और रोडवेज बस स्टैंड के निकट किशोर का शव पड़ा मिला था। इनकी मौत कारण भी नशा ही था।
एक सप्ताह में पकड़े 102 तस्कर
ऑपरेशन नशा मुक्ति के तहत पुलिस ने 16 से 22 जून तक अभियान चलाया। इस दौरान मादक पदार्थ तस्करी में 102 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनके पास से 13.58 किलोग्राम चरस, एक किलो 316 ग्राम स्मैक, 334 ग्राम सुल्फा, नौ किलो गांजा, 45 किलो 350 ग्राम डोडा पोस्त, ढाई किलोग्राम अफीम, 3005 नशीली गोलियां बरामद हुई।
नशे की लत में युवाओं को नहीं पड़ने दिया जाएगा। इस अवैध धंधे को करने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही जागरूकता कार्यक्रम भी चलते रहेंगे।
- डॉ. एस चनप्पा, एसएसपी
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शनिवार को अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। वर्तमान में पुलिस की ओर से भी नशे के खिलाफ एक सप्ताह का अभियान चलाया गया। इसके तहत युवाओं सहित नागरिकों को नशे से दूर रहने के प्रति जागरूक किया। शहर से लेकर कस्बों और गांवों में जागरूकता रैली निकाली गई। नशे के लिए बदनाम गांवों में घर-घर पहुंचीं महिला पुलिसकर्मियों ने उन परिवारों की महिलाओं को समझाया कि नशे से परिवार को बचाना है।
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युवाओं ही नहीं, किशोरों की नसों में भी दौड़ रहा नशा
महानगर में ऐसे कई ठिकाने हैं, जहां पर युवा ही नहीं किशोर भी नशा करते हुए देखे जा सकते हैं। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड के पास रोजाना बड़ी संख्या में 10 से 15 साल तक के किशोर सूंघने वाला नशा करते दिखते हैं। यह भीख मांगकर नशे के लिए पैसों का इंतजाम कर लेते हैं। पुलिस ने कई बार कार्रवाई भी की है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया है।
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बर्बाद हो गया परिवार, नशे ने ली कइयों की जान
घंटाघर के निकट रहने वाला एक परिवार नशे की वजह से बर्बाद हो गया। इनके परिवार के एक युवक को नशे की लत ऐसी लगी उसने अपनी दुकान तक बेच दी। बाद में युवक नशे की वजह से बीमार हुआ और उसके इलाज में काफी पैसा लगा, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। उसके पिता का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने की जरूरत नहीं है। वह नशे की वजह से अपना बेटा खो चुके हैं। इसी तरह हसनपुर तिराहे के निकट रहने वाले युवक की जान नशे ने ले ली। युवक के भाई का कहना है कि नशे की वजह से भाई की जान गई। उसके भाई ने नशा छोड़ने की कोशिश भी की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
मेडिटेशन, इलाज व योग नशा छुड़ाने में सहायक
पद्मश्री भारत भूषण का कहना है कि रोजाना मेडिटेशन और योगासन करने से नशा छोड़ने में मदद मिलती है। मन को दृढ़ बनाकर नशे को छोड़ने का संकल्प लें और योग व मेडिटेशन करने के साथ ही खुद को दूसरे कामों में व्यस्त करें। ऐसा अगर दस दिन भी करेंगे तो नशे की लत से छुटकारा मिल जाएगा। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत पोपली का कहना है कि नशे का आदी होना भी एक प्रकार की बीमारी है, जिसका इलाज संभव है। नशे के आदी युवाओं को काउंसिलिंग के साथ ही उपचार की आवश्यकता है।
नशे ने ली चार की जान
मार्च में हसनपुर तिराहे के निकट रहने वाले एक युवक का शव नाले में पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुुआ कि अत्यधिक नशे की वजह से इसकी जान गई।
थाना जनकपुरी क्षेत्र में जिला अस्पताल के पीछे कच्ची सड़क पर मई माह में युवक का शव मिला, जिसकी पहचान नहीं हो सकी। इसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अत्यधिक नशा मौत की वजह थी। इसी माह रेलवे स्टेशन के पास एक व्यक्ति का शव और रोडवेज बस स्टैंड के निकट किशोर का शव पड़ा मिला था। इनकी मौत कारण भी नशा ही था।
एक सप्ताह में पकड़े 102 तस्कर
ऑपरेशन नशा मुक्ति के तहत पुलिस ने 16 से 22 जून तक अभियान चलाया। इस दौरान मादक पदार्थ तस्करी में 102 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनके पास से 13.58 किलोग्राम चरस, एक किलो 316 ग्राम स्मैक, 334 ग्राम सुल्फा, नौ किलो गांजा, 45 किलो 350 ग्राम डोडा पोस्त, ढाई किलोग्राम अफीम, 3005 नशीली गोलियां बरामद हुई।
नशे की लत में युवाओं को नहीं पड़ने दिया जाएगा। इस अवैध धंधे को करने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही जागरूकता कार्यक्रम भी चलते रहेंगे।
- डॉ. एस चनप्पा, एसएसपी