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सर्वेक्षण के लिए दस गांवों की आबादी पर उड़ा ड्रोन
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सहारनपुर। स्वामित्व योजना के लिए चल रहे सर्वेक्षण के तहत बुधवार को सहारनपुर तहसील सदर के 10 गांवों की आबादी का ड्रोन कैमरे से सर्वे किया गया।
ग्रामीण क्षेत्र की आबादी में मालिकाना हक के अभिलेख तैयार करने और विवादों को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से स्वामित्व योजना की शुरुआत की गई है। उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम घुन्ना, मालाहेड़ी, माटकी झरौली, बोंदकी, तेलीपुरा, माहेश्वरी खुर्द व पीकी आदि 10 गांवों की आबादी के ऊपर सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की टीम ने ड्रोन उड़ाकर सर्वे किया गया। फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी कराई गई। इन ग्रावों में राजस्व विभाग व पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों द्वारा सोमवार और मंगलवार को चूना डालकर हर मकान की सीमा चिह्नित कर चुके हैं। इस सीमा के आधार पर ही ड्रोन के माध्यम से गांव की आबादी का नक्शा तैयार होगा, जिसमें हर मकान की सीमा आदि अंकित होंगे। साथ ही मकान मालिकों का रिकॉर्ड भी अलग से तैयार किया जा रहा है।
एसडीएम सदर ने बताया कि सर्वे से तैयार अभिलेखों के आधार पर ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड जारी किए जाएंगे जो मालिकाना हक के रूप में प्रयोग होंगे। संपत्ति कार्ड के आधार पर ग्रामीणों को बैंक व अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण व अन्य सुविधाएं भी प्राप्त हो सकेंगी। इससे संपत्ति संबंधी विवाद और कानूनी मामले भी कम किए जा सकेंगे।
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ग्रामीण क्षेत्र की आबादी में मालिकाना हक के अभिलेख तैयार करने और विवादों को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से स्वामित्व योजना की शुरुआत की गई है। उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम घुन्ना, मालाहेड़ी, माटकी झरौली, बोंदकी, तेलीपुरा, माहेश्वरी खुर्द व पीकी आदि 10 गांवों की आबादी के ऊपर सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की टीम ने ड्रोन उड़ाकर सर्वे किया गया। फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी कराई गई। इन ग्रावों में राजस्व विभाग व पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों द्वारा सोमवार और मंगलवार को चूना डालकर हर मकान की सीमा चिह्नित कर चुके हैं। इस सीमा के आधार पर ही ड्रोन के माध्यम से गांव की आबादी का नक्शा तैयार होगा, जिसमें हर मकान की सीमा आदि अंकित होंगे। साथ ही मकान मालिकों का रिकॉर्ड भी अलग से तैयार किया जा रहा है।
एसडीएम सदर ने बताया कि सर्वे से तैयार अभिलेखों के आधार पर ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड जारी किए जाएंगे जो मालिकाना हक के रूप में प्रयोग होंगे। संपत्ति कार्ड के आधार पर ग्रामीणों को बैंक व अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण व अन्य सुविधाएं भी प्राप्त हो सकेंगी। इससे संपत्ति संबंधी विवाद और कानूनी मामले भी कम किए जा सकेंगे।
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