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दहेज सामाजिक बुराई, इस पर समाज का दोहरापन चिंता का विषय : गोरा
Tue, 06 Jan 2026 01:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 06 Jan 2026 01:09 AM IST
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देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि दहेज को लेकर समाज का दोहरापन चिंता का विषय है। लोग दहेज को सामाजिक बुराई बताकर बड़ी बड़ी बातें तो करते हैं, लेकिन जब बात खुद के घरों और रिश्तों की होती है तो वही लोग खामोशी से दहेज को स्वीकार करते हैं।
कारी इस्हाक ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि लोग दहेज को बुराई बताते हैं, लेकिन ये सिर्फ बातों तक सीमित रहता है, उनके फैसलों में कहीं नजर नहीं आता। क्योंकि दहेज एक सामाजिक बुराई है और यह तब तक खत्म नहीं होगी जब तक इसका विरोध करने वाले खुद सामने नहीं आते। उन्होंने कहा कि अगर लड़की वाले किसी सामाजिक दबाव के चलते दहेज दें भी तो लड़के पक्ष काे इससे साफ इन्कार कर देना चाहिए, स्पष्ट कहना चाहिए कि दहेज की बात हुई तो वह शादी नहीं करेंगे।
कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि दहेज लेने से लोग पीछे नहीं हटते, मगर जब शरीयत के हुक्म के मुताबिक निकाह के वक्त मेहर अदा करने की बात आती है तो हैसियत की बात पर अड़ जाते हैं, जबकि मेहर औरत का हक है और दहेज की कोई धार्मिक हैसियत नहीं है। उन्होंने दहेज के रिवाज को सामाजिक बुराई बताते हुए लोगों को चाहिए कि वह इससे परहेज करें, वरना आने वाले नस्लों को इसके नुकसान उठाने पड़ेंगे।
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कारी इस्हाक ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि लोग दहेज को बुराई बताते हैं, लेकिन ये सिर्फ बातों तक सीमित रहता है, उनके फैसलों में कहीं नजर नहीं आता। क्योंकि दहेज एक सामाजिक बुराई है और यह तब तक खत्म नहीं होगी जब तक इसका विरोध करने वाले खुद सामने नहीं आते। उन्होंने कहा कि अगर लड़की वाले किसी सामाजिक दबाव के चलते दहेज दें भी तो लड़के पक्ष काे इससे साफ इन्कार कर देना चाहिए, स्पष्ट कहना चाहिए कि दहेज की बात हुई तो वह शादी नहीं करेंगे।
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कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि दहेज लेने से लोग पीछे नहीं हटते, मगर जब शरीयत के हुक्म के मुताबिक निकाह के वक्त मेहर अदा करने की बात आती है तो हैसियत की बात पर अड़ जाते हैं, जबकि मेहर औरत का हक है और दहेज की कोई धार्मिक हैसियत नहीं है। उन्होंने दहेज के रिवाज को सामाजिक बुराई बताते हुए लोगों को चाहिए कि वह इससे परहेज करें, वरना आने वाले नस्लों को इसके नुकसान उठाने पड़ेंगे।
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