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ओपीडी और वार्डों में घूम रहे कुत्ते
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राज कुमार
- फोटो : SAHARANPUR
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ओपीडी और वार्डों में घूम रहे कुत्ते
सहारनपुर। जिला अस्पताल की ओपीडी और वार्डों के साथ अस्पताल की कॉलोनी में कुत्तों के झुंड घूम रहे हैं। गर्मी में कुत्ते खुंखार हो रहे हैं। बीते एक सप्ताह में जनपद में कुत्ते दो बच्चियों को नोंचकर मौत की नींद सुला चुके हैं। एसबीडी जिला अस्पताल में एंटी रेबीज का टीका लगवाने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। कुत्तों से निजात दिलाने के लिए प्रमुख अधीक्षक ने नगरायुक्त को पत्र लिखा है।
प्रमुख अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्रा ने नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अस्पताल परिसर में मंडराने वाले आवारा कुत्तों को पकड़वाने की मांग की है। प्रमुख अधीक्षक ने पत्र के माध्यम से नगरायुक्त को बताया है कि अस्पताल के भ्रमण के दौरान कई बार कुत्तों के झुंड घूमते नजर आए हैं, जो वार्डों के बाहर और भीतर तक जाते हैं। स्टाफ उन्हें खदेड़ने का प्रयास करता है तो वह हमलावर हो जाते हैं। ऐसे में कुत्तों से स्टाफ और अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले रोगियों व तीमारदारों की भी जान को खतरा है। उधर, अस्पताल में निवास करने वाले चिकित्सक और कर्मचारियों के परिवार भी कुत्तों से परेशान हैं। उनका आरोप है कि ये कुत्ते बच्चों और महिलाओं को दौड़ा तक लेते हैं।
प्रतिदिन 50 से 60 मामले
एसबीडी जिला अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। यहां प्रतिदिन 50 से 60 मामले कुत्ता काटने के पहुंच रहे हैं, जिनकी संख्या महीने में 1500 से 1800 बैठती है। इतनी संख्या तब है, जबकि जनपद में कई सीएचसी और पीएचसी पर भी एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाने की सुविधा है। इसके अलावा निजी चिकित्सकों के यहां गिनती नहीं है।
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चिकित्सकों और स्टाफ की बात
- डॉ. केशव स्वामी का कहना है कि कुत्ते ओपीडी के बाहर तो रहते ही हैं, वह वार्डों के भीतर तक चले जाते हैं, जहां मरीज लेटे रहते हैं। ऐसे में यदि कुत्ते में हड़क उभर जाए तो वह मरीजों और तीमारदारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- डॉ. मनीष पांडेय ने बताया कि कुत्ते केवल अस्पताल ही में नहीं, बल्कि अस्पताल के रिहायशी क्षेत्र में बड़ी संख्या में हैं। कई बार वह बच्चों का पीछा कर चुके हैं। ऐसे में शाम के समय बच्चों ने घर के बाहर अकेले घूमना बंद कर दिया है।
- सफाई सुपरवाइजर राजकुमार ने बताया कि कुत्ते अस्पताल परिसर में जगह-जगह गंदगी करके रखते हैं। कई बार सुबह-सुबह ओपीडी के दरवाजों के बाहर ही गंदगी पड़ी मिलती है। इससे सफाईकर्मियों को भी परेेशानी होती है।
अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में कुत्ते रहते हैं, जो वार्डों तक में मरीजों के बेड तक एंट्री कर जाते हैं। स्टाफ उन्हें बाहर खदेड़कर थक चुका है। कई बार यह कुत्ते हमला भी कर चुके हैं। ऐसे में नगरायुक्त को पत्र लिखकर कुत्तों से निजात दिलाने का अनुरोध किया गया है।
डॉ. रमेश चंद्रा, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल
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सहारनपुर। जिला अस्पताल की ओपीडी और वार्डों के साथ अस्पताल की कॉलोनी में कुत्तों के झुंड घूम रहे हैं। गर्मी में कुत्ते खुंखार हो रहे हैं। बीते एक सप्ताह में जनपद में कुत्ते दो बच्चियों को नोंचकर मौत की नींद सुला चुके हैं। एसबीडी जिला अस्पताल में एंटी रेबीज का टीका लगवाने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। कुत्तों से निजात दिलाने के लिए प्रमुख अधीक्षक ने नगरायुक्त को पत्र लिखा है।
प्रमुख अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्रा ने नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अस्पताल परिसर में मंडराने वाले आवारा कुत्तों को पकड़वाने की मांग की है। प्रमुख अधीक्षक ने पत्र के माध्यम से नगरायुक्त को बताया है कि अस्पताल के भ्रमण के दौरान कई बार कुत्तों के झुंड घूमते नजर आए हैं, जो वार्डों के बाहर और भीतर तक जाते हैं। स्टाफ उन्हें खदेड़ने का प्रयास करता है तो वह हमलावर हो जाते हैं। ऐसे में कुत्तों से स्टाफ और अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले रोगियों व तीमारदारों की भी जान को खतरा है। उधर, अस्पताल में निवास करने वाले चिकित्सक और कर्मचारियों के परिवार भी कुत्तों से परेशान हैं। उनका आरोप है कि ये कुत्ते बच्चों और महिलाओं को दौड़ा तक लेते हैं।
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प्रतिदिन 50 से 60 मामले
एसबीडी जिला अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। यहां प्रतिदिन 50 से 60 मामले कुत्ता काटने के पहुंच रहे हैं, जिनकी संख्या महीने में 1500 से 1800 बैठती है। इतनी संख्या तब है, जबकि जनपद में कई सीएचसी और पीएचसी पर भी एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाने की सुविधा है। इसके अलावा निजी चिकित्सकों के यहां गिनती नहीं है।
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चिकित्सकों और स्टाफ की बात
- डॉ. केशव स्वामी का कहना है कि कुत्ते ओपीडी के बाहर तो रहते ही हैं, वह वार्डों के भीतर तक चले जाते हैं, जहां मरीज लेटे रहते हैं। ऐसे में यदि कुत्ते में हड़क उभर जाए तो वह मरीजों और तीमारदारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- डॉ. मनीष पांडेय ने बताया कि कुत्ते केवल अस्पताल ही में नहीं, बल्कि अस्पताल के रिहायशी क्षेत्र में बड़ी संख्या में हैं। कई बार वह बच्चों का पीछा कर चुके हैं। ऐसे में शाम के समय बच्चों ने घर के बाहर अकेले घूमना बंद कर दिया है।
- सफाई सुपरवाइजर राजकुमार ने बताया कि कुत्ते अस्पताल परिसर में जगह-जगह गंदगी करके रखते हैं। कई बार सुबह-सुबह ओपीडी के दरवाजों के बाहर ही गंदगी पड़ी मिलती है। इससे सफाईकर्मियों को भी परेेशानी होती है।
अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में कुत्ते रहते हैं, जो वार्डों तक में मरीजों के बेड तक एंट्री कर जाते हैं। स्टाफ उन्हें बाहर खदेड़कर थक चुका है। कई बार यह कुत्ते हमला भी कर चुके हैं। ऐसे में नगरायुक्त को पत्र लिखकर कुत्तों से निजात दिलाने का अनुरोध किया गया है।
डॉ. रमेश चंद्रा, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल

डा मनीष पांडेय- फोटो : SAHARANPUR

जिला अस्पताल में घूमता कुत्ता- फोटो : SAHARANPUR

डा केशव स्वामी- फोटो : SAHARANPUR