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बाढ़ से बचाव को बनाई दीवार में धांधली पर लीपापोती
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बेहट (सहारनपुर)। हीराहेड़ी गांव के पास पत्थरों की पैचिंग से बनाई जा रही दीवार के निर्माण में धांधली उजागर होने के बाद विभागीय अधिकारी मामले की लीपापोती में लगे हैं। फिलहाल कार्य बंद पड़ा है। सिंचाई निर्माण खंड के सहायक अभियंता संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किए जाने की बात कह रहे हैं, जबकि अधिशासी अभियंता नोटिस की बात से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि ठेकेदार को अब तक किए गए कार्य को सही कराने के लिए कहा गया है। यदि निर्माण कार्य को गुणवत्ता के हिसाब से नहीं किया गया तो भुगतान नहीं किया जाएगा।
गांव हीराहेड़ी के पास नदी से होने वाले कटाव से कृषि भूमि को बचाने के लिए बनाई जा रही पत्थरों की पैचिंग में मानकों को ताक पर रखकर काम कराए जाने का खुलासा होने पर विभागीय अधिकारियों पर भी उंगली उठ रही है। अपनी गर्दन बचाने के लिए अधिकारी मामले की लीपापोती में लगे हैं। फिलहाल अधिकारियों ने निर्माण कार्य बंद करा रखा है। इस मामले में सिंचाई निर्माण खंड के सहायक अभियंता नानक चंद का कहना है कि संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है, जबकि अधिशासी अभियंता विकास चंद्रा नोटिस जारी किए जाने की बात से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि संबंधित ठेकेदार को अब तक किए गए कार्य को ठीक करा कर गुणवत्ता के हिसाब से कराए जाने के लिए कहा गया है। यदि कार्य गुणवत्ता के हिसाब से नहीं किया जाता तो संबंधित को भुगतान नहीं किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों में भी आपसी तालमेल का अभाव है।
यह हो रही थी धांधली
सहायक अभियंता नानक चंद के अनुसार हीराहेड़ी में 306 मीटर पैचिंग कार्य होना है। इसमें से अभी मात्र 75 मीटर पैचिंग ही हो पाई है। यहां बता दें कि अब तक हुए कार्य में बिना फाउंडेशन के ही पैचिंग खड़ी कर दी गई है। दीवार में मानक के हिसाब से वजन का पत्थर नहीं लगाया गया, जो जाल से बाहर निकल रहे हैं। दीवार के बीच में पत्थरों की जगह रेत से भरे प्लास्टिक के बोरे भर दिए गए।
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यह हैं मानक
नदियों में बाढ़ से सुरक्षा के लिए लगाई जाने वाली पत्थरों की पैचिंग के लिए जमीन में एक मीटर तक खोदाई करके फाउंडेशन बनाई जाती है। फाउंडेशन में नीचे एक फीट तक पत्थर का गटका डालकर उसके ऊपर जाल भरा जाता है। जाल के छिद्र 6 इंच के होने चाहिए, जिनमें 10 किग्रा से 40 किग्रा तक पत्थर भरे जाने होते हैं। पैचिंग तीन मीटर लंबी, 1.5 मीटर चौड़ी और एक मीटर ऊंचाई की होनी चाहिए। यदि इस मानक से पैचिंग बनाई जा रही है, तो ही टिक पाएगी।
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गांव हीराहेड़ी के पास नदी से होने वाले कटाव से कृषि भूमि को बचाने के लिए बनाई जा रही पत्थरों की पैचिंग में मानकों को ताक पर रखकर काम कराए जाने का खुलासा होने पर विभागीय अधिकारियों पर भी उंगली उठ रही है। अपनी गर्दन बचाने के लिए अधिकारी मामले की लीपापोती में लगे हैं। फिलहाल अधिकारियों ने निर्माण कार्य बंद करा रखा है। इस मामले में सिंचाई निर्माण खंड के सहायक अभियंता नानक चंद का कहना है कि संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है, जबकि अधिशासी अभियंता विकास चंद्रा नोटिस जारी किए जाने की बात से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि संबंधित ठेकेदार को अब तक किए गए कार्य को ठीक करा कर गुणवत्ता के हिसाब से कराए जाने के लिए कहा गया है। यदि कार्य गुणवत्ता के हिसाब से नहीं किया जाता तो संबंधित को भुगतान नहीं किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों में भी आपसी तालमेल का अभाव है।
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यह हो रही थी धांधली
सहायक अभियंता नानक चंद के अनुसार हीराहेड़ी में 306 मीटर पैचिंग कार्य होना है। इसमें से अभी मात्र 75 मीटर पैचिंग ही हो पाई है। यहां बता दें कि अब तक हुए कार्य में बिना फाउंडेशन के ही पैचिंग खड़ी कर दी गई है। दीवार में मानक के हिसाब से वजन का पत्थर नहीं लगाया गया, जो जाल से बाहर निकल रहे हैं। दीवार के बीच में पत्थरों की जगह रेत से भरे प्लास्टिक के बोरे भर दिए गए।
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यह हैं मानक
नदियों में बाढ़ से सुरक्षा के लिए लगाई जाने वाली पत्थरों की पैचिंग के लिए जमीन में एक मीटर तक खोदाई करके फाउंडेशन बनाई जाती है। फाउंडेशन में नीचे एक फीट तक पत्थर का गटका डालकर उसके ऊपर जाल भरा जाता है। जाल के छिद्र 6 इंच के होने चाहिए, जिनमें 10 किग्रा से 40 किग्रा तक पत्थर भरे जाने होते हैं। पैचिंग तीन मीटर लंबी, 1.5 मीटर चौड़ी और एक मीटर ऊंचाई की होनी चाहिए। यदि इस मानक से पैचिंग बनाई जा रही है, तो ही टिक पाएगी।