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यूपी: हिजाब को लेकर देवबंद से उठी आवाज, दारुल उलूम ने हाईकोर्ट के फैसले पर जताई नाराजगी और कहा...

Tue, 15 Mar 2022 08:24 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Tue, 15 Mar 2022 08:24 PM IST
सार

हिजाब को लेकर आए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर दारुल उलूम ने नाराजगी जताई है। मौलाना महमूद मदनी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को देश और मुसलमानों के लिए नुकसानदायक करार दिया है।

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Deoband News: Maulana Mahmood Madani has expressed displeasure over decision of Karnataka High Court on Hijab
जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी और अन्य मौलाना। - फोटो : amar ujala

विस्तार

दारुल उलूम ने हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट की ओर से दिए गए फैसले पर नाराजगी जताई है। संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी का कहना है कि पर्दा इस्लाम में फर्ज (जरूरी) है। इसलिए यह फैसला कबूल करने लायक नहीं है। वहीं, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष व पूर्व राज्यसभा सदस्य मौलाना महमूद मदनी ने भी कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को देश और मुसलमानों के लिए नुकसानदायक करार दिया है।

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हिजाब प्रकरण में कर्नाटक हाईकोर्ट से आए फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि कोर्ट के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि पर्दा इस्लाम में फर्ज है और कुरआन इसका हुक्म देता है। कोर्ट का यह कहना कि हिजाब मजहब-ए-इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, सरासर गलत है। 
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उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है। जिसमें संविधान सभी धर्म के लोगों को धार्मिक मान्यताओं के साथ जिंदगी गुजारने की पूरी आजादी देता है। संविधान किसी भी संस्था को यह इजाजत नहीं देता है कि वह ऐसे नियम बनाए जो किसी मजहब के खिलाफ हो। मौलाना नोमानी ने देश की सभी सेक्युलर जमातों से मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का आह्वान किया। 
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वहीं, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कोर्ट के फैसले से धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। यह एक सच्चाई है कि कोई भी समाज केवल कानूनी बारीकियों से नहीं चलता, बल्कि सामाजिक और पारंपरिक रूप से इसका स्वीकार्य होना आवश्यक है। मदनी ने कहा कि इस फैसले के कई नकारात्मक प्रभाव होंगे। विशेषकर मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर असर पड़ेगा और वर्तमान में जिस तरह की परिस्थितियां उत्पन्न की गईं, उसमें वह अपनी स्वतंत्रता और भरोसा खो देंगी। उन्होंने कहा कि पर्दा हमारे देश की एक बहुत ही प्राचीन परंपरा और सभ्यता है। सदियों से पर्दा और हया की बड़ा महत्व है। इसे केवल अदालत के फैसले से मिटाया नहीं जा सकता। 
 

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हिजाब के फैसले पर पुनर्विचार करे कोर्ट : गोरा 
कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा का कहना है कि कोर्ट ने जल्दबाजी में फैसला किया है। इसलिए कोर्ट को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि हिजाब लोगों की आस्था से जुड़ा मसला है और संवैधानिक अधिकार भी है। गोरा ने कहा कि लोगों के जहन में हिजाब को लेकर जो गलत फहमी है, उसे दूर कर हिजाब के सही अर्थ को समझना चाहिए।

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