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Saharanpur News: एलिवेटेड रोड के नीचे कैमरा ट्रैप में आए हिरण और गजराज

Sat, 07 Jun 2025 11:45 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sat, 07 Jun 2025 11:45 PM IST
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Deer and elephant caught in camera trap under elevated road
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे की एलिवेटेड रोड के नीचे से गुजरते हाथी। श्रोत-भारतीय वन्य जीव संस्थ
छुटमलपुर। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की एलिवेटेड रोड के नीचे वन्य जीव निर्भय होकर विचरण कर रहे हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा वन्य जीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए 160 कैमरा ट्रैप में गजराज और हिरण सहित अन्य वन्य जीवों के फोटोग्राफ कैद हुए हैं।
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सहारनपुर के गणेशपुर से देहरादून के आशारोड़ी तक 19 किमी लंबे वन्य जीव गलियारे में 14 किमी का हिस्सा एलिवेटेड रोड का है, जिसके नीचे से वन्य जीव आसानी से शिवालिक वन प्रभाग से राष्ट्रीय राजाजी पार्क में आवागमन कर सकते हैं।
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एशिया के इस सबसे लंबे वन्य जीव गलियारे में इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि ऊपर जहां 100 किमी की रफ्तार से वाहन फर्राटा भरेंगे वहीं नीचे जंगल में उनकी आवाज और रोशनी नहीं जाएगी। ताकि वन्य जीव बेफ्रिक होकर विचरण कर सकें।
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इस एलिवेटेड रोड के नीचे से वन्यजीवों की हलचल देखने के लिए लगाए गए कैमरा ट्रैप में हाथी, हिरण, सांभर समेत अन्य वन्यजीव गुजरते हुए दिख रहे हैं। इसमें कई फोटोग्राफ रात और शाम के समय के हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक बिलाल हबीब ने बताया कि इसमें जो फोटोग्राफ आए हैं, उसमें हाथी समेत दूसरे वन्यजीवों की हलचल होती दिख रही है। यह बेहतर संकेत है।
मोहंड वन रेंज के क्षेत्राधिकारी लव कुमार बताते हैं कि सामान्यत: वन्य जीव अधिकांश समय रात में ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। एलिवेटेड रोड चलने पर नीचे का रास्ता पूरी तरह बंद होने की दशा में वन्यजीवों की आवाजाही में और बढ़ोतरी होगी।

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सड़क पर दिखेगी रोशनी, उल्लू को नजर आएगा अंधेरा

एलिवेटेड रोड पर 800 विशेष लेंस बेस्ड वार्म लाइटें लगाई जा रही हैं। पहली बार प्रयोग हुईं इन लाइटों से ऐसा पीला मध्यम प्रकाश निकलेगा, जो रात्रि में उल्लू को अंधेरे का अहसास कराएगा, जबकि वाहन चालकों को रास्ता दिखाई देगा। इससे पहले एनएचएआई के एलिवेटेड रोड के सेफ्टी आडिट में यह सामने आया कि रोशनी नहीं होने की स्थिति में रात्रि में हादसों की संभावना बनी रहेगी, लेकिन एनजीटी ने लाइट लगाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि रोशनी के कारण लाईटों के इर्द-गिर्द एकत्र होने वाले कीट का शिकार करने के लिए उल्लू लाइट के आसपास पहुंचेंगे और वाहनों से टकराकर हादसों का शिकार हो जाएंगे। इसके बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान ने इन विशेष लाइटों को तैयार कराया।
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