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धोखे में बर्बाद हो गई शादीशुदा जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 01 Dec 2016 12:32 AM IST
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सहारनपुर। केस- 1
शहर की रहने वाली एक युवती ने प्रेम संबंध में सारी सीमाएं लांघ दी। इस दौरान वह एचआईवी पॉजिटिव हो गई। पहले तो उसे इस बात का आभास नहीं हुआ।
मगर, वजन कम होने जैसे एड्स के कई लक्षण दिखने पर उसने जांच कराई तो उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मगर, सामाजिकता के डर से उसने और परिवार वालों ने इस बात को छिपा लिया और उसकी शादी कर दी।
इसके बाद उसका पति भी एड्स के खूनी पंजे में फंस गया। धोखे की वजह से ना केवल शादीशुदा जिंदगी बर्बाद हुई, बल्कि रोग ने भी अपने पांव पसार लिए।
केस-2 शादी से पूर्व प्रेम प्रसंग में सीमाएं लांघने पर एक युवक एचआईवी पॉजिटिव हो गया। मगर, जांच नहीं होने की वजह उसका यह रोग शादी के बाद उसकी पत्नी तक पहुंच गया। इसके बाद उसे एक बेटा हुआ और वह भी पॉजिटिव। तीसरे स्टेज पर जब यह बात सामने आई तब तक उसकी पूरी दुनिया उजड़ चुकी थी।
ऐसे कई प्रेमी जोडे़ रहे जिन्होंने शादी से पहले सारी सीमाएं लांघ दी और एक से दूसरे में एचआईवी पहुंच गया। एड्स के खूनी पंजे में फंसने के बाद उनकी जिंदगी जहर हो गई। मगर, समाज के डर से उन्होंने इस बात को छिपाए रखा और शादी किसी दूसरे से कर जिंदगी में जहर घोल दिया।
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ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई मामले सहारनपुर में सामने आ चुके हैं। जिला अस्पताल में एचआईवी काउंसिलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर और एआरटी में आए केस पर नजर दौड़ाए तो ज्यादातर मामलों में एड्स की चपेट में आने वाले धोखे के शिकार हुए हैं।
हालांकि तेजी से बढ़ रहे मामलों के चलते थोड़ी जागरूकता भी आ रही है और लोग अब एचआईवी की जांच के लिए भी आगे आ रहे हैं। मगर, चिकित्सकों का मानना है कि इस रोग से निजात पाने के लिए विश्वास के साथ ही जागरूकता बहुत बड़ा हथियार है।
शादी विवाह में कुंडली मिलाने की बजाय अगर इसकी जांच पर भी लोग जागरूक हो तो इस पर अंकुश लग सकता है। सहारनपुर में लगातार एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
इसी के चलते साल दर साल एचआईवी जांच कराने वालों की संख्या में अब तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्ष 2015 और 16 में करीब 15 हजार लोगों ने एचआईवी की जांच कराई। इसमें अब तक करीब 325 से ज्यादा लोग पॉजिटिव भी पाए गए।
ऐसे में माना जा रहा है कि रोग के पसर रहे पांव को थामने के लिए अब लोग इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं। डा. संजीव मिगलानी का कहना है कि इस गंभीर रोग से बचाव के लिए जागरूकता ही बड़ा हथियार है।
कुछ सालों में आई ज्यादा जागरुकता ःसहारनपुर के जिला अस्पताल में वर्ष 2002 में एचआईवी काउंसिलिंग और टेस्टिंग सेंटर की स्थापना हुई थी। पहले वर्ष यहां 71 लोगों ने जांच कराई और चार लोग एचआईवी पॉजिटिव मिले।
मगर, वर्ष 2007 में यह आंकड़ा एक हजार 87 तक पहुंचा और इन लोगों की जांच में 28 पॉजिटिव की पहचान की गई। वर्ष 2011 में 132, 2012 में 119, 13 में 121, 14 में 131, 15 में 176 और मौजूदा वर्ष में 141 एचआईवी पॉजिटिव सामने आए हैं। जांच कराने वालों की संख्या प्रतिवर्ष सात हजार के पार पहुंच रही है।
गे सोसाइटी में आई जागरूकता, करा रहे टेस्ट ः सहारनपुर में सक्रिय गे सोसाइटी भी अब इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक हो रही है। यही कारण है कि गे जोड़े भी टेस्टिंग सेंटर पहुंच रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 50 गे पॉजिटिव की पहचान कर उन्हें ट्रिटमेंट दिया जा रहा है।
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शहर की रहने वाली एक युवती ने प्रेम संबंध में सारी सीमाएं लांघ दी। इस दौरान वह एचआईवी पॉजिटिव हो गई। पहले तो उसे इस बात का आभास नहीं हुआ।
मगर, वजन कम होने जैसे एड्स के कई लक्षण दिखने पर उसने जांच कराई तो उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मगर, सामाजिकता के डर से उसने और परिवार वालों ने इस बात को छिपा लिया और उसकी शादी कर दी।
इसके बाद उसका पति भी एड्स के खूनी पंजे में फंस गया। धोखे की वजह से ना केवल शादीशुदा जिंदगी बर्बाद हुई, बल्कि रोग ने भी अपने पांव पसार लिए।
केस-2 शादी से पूर्व प्रेम प्रसंग में सीमाएं लांघने पर एक युवक एचआईवी पॉजिटिव हो गया। मगर, जांच नहीं होने की वजह उसका यह रोग शादी के बाद उसकी पत्नी तक पहुंच गया। इसके बाद उसे एक बेटा हुआ और वह भी पॉजिटिव। तीसरे स्टेज पर जब यह बात सामने आई तब तक उसकी पूरी दुनिया उजड़ चुकी थी।
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ऐसे कई प्रेमी जोडे़ रहे जिन्होंने शादी से पहले सारी सीमाएं लांघ दी और एक से दूसरे में एचआईवी पहुंच गया। एड्स के खूनी पंजे में फंसने के बाद उनकी जिंदगी जहर हो गई। मगर, समाज के डर से उन्होंने इस बात को छिपाए रखा और शादी किसी दूसरे से कर जिंदगी में जहर घोल दिया।
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ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई मामले सहारनपुर में सामने आ चुके हैं। जिला अस्पताल में एचआईवी काउंसिलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर और एआरटी में आए केस पर नजर दौड़ाए तो ज्यादातर मामलों में एड्स की चपेट में आने वाले धोखे के शिकार हुए हैं।
हालांकि तेजी से बढ़ रहे मामलों के चलते थोड़ी जागरूकता भी आ रही है और लोग अब एचआईवी की जांच के लिए भी आगे आ रहे हैं। मगर, चिकित्सकों का मानना है कि इस रोग से निजात पाने के लिए विश्वास के साथ ही जागरूकता बहुत बड़ा हथियार है।
शादी विवाह में कुंडली मिलाने की बजाय अगर इसकी जांच पर भी लोग जागरूक हो तो इस पर अंकुश लग सकता है। सहारनपुर में लगातार एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
इसी के चलते साल दर साल एचआईवी जांच कराने वालों की संख्या में अब तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्ष 2015 और 16 में करीब 15 हजार लोगों ने एचआईवी की जांच कराई। इसमें अब तक करीब 325 से ज्यादा लोग पॉजिटिव भी पाए गए।
ऐसे में माना जा रहा है कि रोग के पसर रहे पांव को थामने के लिए अब लोग इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं। डा. संजीव मिगलानी का कहना है कि इस गंभीर रोग से बचाव के लिए जागरूकता ही बड़ा हथियार है।
कुछ सालों में आई ज्यादा जागरुकता ःसहारनपुर के जिला अस्पताल में वर्ष 2002 में एचआईवी काउंसिलिंग और टेस्टिंग सेंटर की स्थापना हुई थी। पहले वर्ष यहां 71 लोगों ने जांच कराई और चार लोग एचआईवी पॉजिटिव मिले।
मगर, वर्ष 2007 में यह आंकड़ा एक हजार 87 तक पहुंचा और इन लोगों की जांच में 28 पॉजिटिव की पहचान की गई। वर्ष 2011 में 132, 2012 में 119, 13 में 121, 14 में 131, 15 में 176 और मौजूदा वर्ष में 141 एचआईवी पॉजिटिव सामने आए हैं। जांच कराने वालों की संख्या प्रतिवर्ष सात हजार के पार पहुंच रही है।
गे सोसाइटी में आई जागरूकता, करा रहे टेस्ट ः सहारनपुर में सक्रिय गे सोसाइटी भी अब इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक हो रही है। यही कारण है कि गे जोड़े भी टेस्टिंग सेंटर पहुंच रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 50 गे पॉजिटिव की पहचान कर उन्हें ट्रिटमेंट दिया जा रहा है।