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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Dead body of a soldier found after 56 years: Parents and wife used to cry in the corner

56 साल बाद मिला जवान का शव: कोने में जाकर रोते थे माता-पिता, छोटे भाई चंद्रपाल से करा दी थी पत्नी शीला की शादी

Tue, 01 Oct 2024 10:21 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Tue, 01 Oct 2024 10:21 PM IST
सार

सेना के जवान जब गांव पहुंचे और परिजनों को जानकार दी तो मलखान सिंह के छोटे भाई इसमपाल सिंह की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह एक ऐसा घटनाक्रम है, जिस पर यकीन करना भी मुश्किल है।

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Dead body of a soldier found after 56 years: Parents and wife used to cry in the corner
मलखान सिंह का परिवार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सात फरवरी 1968 का वह दिन आज भी याद है, जब बड़े भाई 23 वर्षीय मलखान सिंह की विमान हादसे में निधन की सूचना मिली। उस समय मेरी उम्र करीब 12 साल होगी, लेकिन परिवार के हालातों से वाकिफ था। देखता रहता था कि माता-पिता और भाभी समेत परिवार के अन्य सदस्य किस तरह कोने में जाकर रोते-बिलखते थे। क्योंकि अंतिम समय में परिवार का कोई सदस्य उनका चेहरा भी नहीं देख सका और न ही अंत्येष्टी कर सके। 56 साल बाद जब सेना के जवानों ने आकर पार्थिव शरीर मिलने के जानकारी दी तो दर्द ताजा हो गया। समझ ही नहीं आया कि आखिर भाई के निधन पर अब दुख जताऊं या फिर यह सब्र करूं कि कम से कम अब अंत्येष्टी तो कर सकेंगे। यह कहते-कहते मलखान सिंह के छोटे भाई इसमपाल सिंह की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह एक ऐसा घटनाक्रम है, जिस पर यकीन करना भी मुश्किल है।
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चंद्रपाल से करा दी थी शादी
मलखान सिंह का जन्म 18 जनवरी 1945 को हुआ था। वह पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके बलिदानी होने के बाद पत्नी शीला की शादी छोटे भाई चंद्रपाल सिंह के साथ करा दी गई थी। परिजनों का कहना है कि उन्हें कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिली। हालांकि नानौता थाना पुलिस का कहना है कि मलखान सिंह सेना के जवान थे।
 
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दादा को देखा नहीं, लेकिन गर्व है
मलखान सिंह के पोते गौतम और मनीष का कहना है कि दादा को देखा तो नहीं है, लेकिन उन्हें दादा पर गर्व है। इस बात का संतोष है कि देश की खातिर दादा बलिदानी हुए और उनका अंतिम संस्कार विधि-विधान से परिवार के लोग कर पाएंगे। मलखान सिंह की पोती सोनिया और मोनिका की शादी हो चुकी है। वह भी कहती हैं कि निधन का दुख है, लेकिन इस बात की भी तसल्ली है कि वह दादा के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करेंगे। 
 
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लगातार चल रहा सर्च अभियान
वर्ष 2003 में अटल बिहारी वाजपेई सरकार के कार्यकाल में सेना ने यहां पर सर्च अभियान शुरू किया था। बताया जाता है कि वह सर्च अभियान जारी रहा और मलखान सिंह समेत चार जवानों के पार्थिव शरीर मिले हैं। वर्ष 2019 में भी पांच जवानों के पार्थिव शरीर मिले थे।
 

यह बोले डॉक्टर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि जब तक शव के चारों तरफ बर्फ ढकी होती है, तब तक उसका कुछ नहीं बिगड़ता। बर्फ पिघलने के बाद शव सड़ने लगेगा। बर्फ में कितने साल तक शव रह सकता है, इसका कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
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