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गायों में फैल रहा खतरनाक लम्पी वायरस
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लम्पी वायरस की चपेट में आई गाय
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर, बड़गांव। क्षेत्र के पालतू पशुओं में लम्पी वायरस बीमारी देखने को मिल रही है। इस बीमारी के चलते क्षेत्र के गांव दल्हेड़ी, बड़गांव, महेशपुर, शिमलाना, झबीरन, जड़ौदा पांडा आदि में कई गाय इस गंभीर बीमारी की चपेट में हैं। इस बीमारी का पशु चिकित्सालयों में कोई सटीक इलाज भी उपलब्ध नहीं है। इससे पशु पालक परेशानी में हैं।
पशु चिकित्साधिकारी बड़गांव प्रमोद कुमार सैनी ने बताया कि पशुओं पर शुरुआती अवस्था में त्वचा पर चेचक, नाक बहना, तेज बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं। इस वायरस की वजह से पशुओं को काफी तेजी बुखार आता है। बुखार आने के बाद उनकी शारीरिक क्षमता काफी गिरने लगती है। इसके कुछ दिनों बाद पशुओं के शरीर पर बड़े बड़े चकत्ते नजर आने लगते हैं। लम्पी बीमारी फैलने के कारण बीमारी से संक्रमित गाय के संपर्क में आने से दूसरी गायों में फैल जाती है। यह मक्खी, मच्छर या फिर जूं द्वारा खून चूसने के दौरान फैल सकती है। इसके अलावा दूषित गाय के सीधे संपर्क में आने से भी फैल सकती है। इस कारण गायों की मौतें भी हो सकती हैं।
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लम्पी संक्रमण से बचाव के तरीके
डॉ. प्रमोद कुमार सैनी ने बताया कि खासकर यह वायरस गाय प्रजाति के पशुओं में फैल रहा है। उन्होंने पशु पालकों को सलाह दी है कि अपने संक्रमित पशुओं को पालतू जानवरों से दूर रखें। मवेशियों के आसापास की जगहों को साफ करें। पालतू जानवर जहां रहते हैं वहां मच्छरों और मक्खियों को पनपने से रोकें।
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लम्पी डिजीज के लिए अभी तक कोई टीका नहीं तैयार हुआ है। यह कोरोना वायरस और मंकीपॉक्स की तरह एक दुर्लभ बीमारी है। ऐसे में यह वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बना है। जानवरों को इस वायरस से बचाने के लिए एंटीबैक्टीरियल, एंटी-फंगल जैसे टीके लगाए जा रहे हैं। इस बीमारी का इलाज काफी लंबा चलता है।
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पशु चिकित्साधिकारी बड़गांव प्रमोद कुमार सैनी ने बताया कि पशुओं पर शुरुआती अवस्था में त्वचा पर चेचक, नाक बहना, तेज बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं। इस वायरस की वजह से पशुओं को काफी तेजी बुखार आता है। बुखार आने के बाद उनकी शारीरिक क्षमता काफी गिरने लगती है। इसके कुछ दिनों बाद पशुओं के शरीर पर बड़े बड़े चकत्ते नजर आने लगते हैं। लम्पी बीमारी फैलने के कारण बीमारी से संक्रमित गाय के संपर्क में आने से दूसरी गायों में फैल जाती है। यह मक्खी, मच्छर या फिर जूं द्वारा खून चूसने के दौरान फैल सकती है। इसके अलावा दूषित गाय के सीधे संपर्क में आने से भी फैल सकती है। इस कारण गायों की मौतें भी हो सकती हैं।
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लम्पी संक्रमण से बचाव के तरीके
डॉ. प्रमोद कुमार सैनी ने बताया कि खासकर यह वायरस गाय प्रजाति के पशुओं में फैल रहा है। उन्होंने पशु पालकों को सलाह दी है कि अपने संक्रमित पशुओं को पालतू जानवरों से दूर रखें। मवेशियों के आसापास की जगहों को साफ करें। पालतू जानवर जहां रहते हैं वहां मच्छरों और मक्खियों को पनपने से रोकें।
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लम्पी डिजीज के लिए अभी तक कोई टीका नहीं तैयार हुआ है। यह कोरोना वायरस और मंकीपॉक्स की तरह एक दुर्लभ बीमारी है। ऐसे में यह वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बना है। जानवरों को इस वायरस से बचाने के लिए एंटीबैक्टीरियल, एंटी-फंगल जैसे टीके लगाए जा रहे हैं। इस बीमारी का इलाज काफी लंबा चलता है।

चिलकाना में तिरंगा बाइक रैली में शामिल व्यापारी तथा थाना प्रभारी- फोटो : SAHARANPUR