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दलितों-मुस्लिमों पर बसपा की नजर

Fri, 09 Sep 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Fri, 09 Sep 2016 12:40 AM IST
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Dalits and Muslims look at the SP
बसपा प्रतीक
सहारनपुर में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की सहारनपुर में होने वाली रैली पर सभी राजनीतिक दलों की नजर है। कारण, बसपा का गढ़ माने जाने वाले सहारनपुर में करीब दो महीने पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर रैली की थी।
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ऐसे में बसपाइयों के सामने उस रैली के बराबर भीड़ जुटाने के साथ सभी जाति और धर्मों की भागीदारी कराने की चुनौती है। सियासी जानकार वेस्ट यूपी में होने वाली पहली रैली में मुस्लिम मतदाताओं के मूड को भांपने की जुगत करेंगे।
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रैली में मुस्लिम और अन्य जातियों की भागीदारी के बाद सियासी समीकरण कुछ हद तक तय होंगे। 11 सितंबर को बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली सहारनपुर में होनी है। इस रैली में सहारनपुर के अलावा मेरठ मंडल के कार्यकर्ताओं को भीड़ जुटाने का जिम्मा सौंपा गया है।
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सबसे बड़ी बात यह है कि यह रैली उसी मैदान में की जा रही है जहां 26 मई को केन्द्र सरकार के दो साल पूरे होने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने सभा को संबोधित किया था। ऐसे में बसपाइयों के सामने सबसे पहली अग्निपरीक्षा उस मैदान को भरने और भीड़ जुटाने की होगी। 

इसके अलावा दलितों के अलावा अन्य जातियों के लोगों को रैली में भागीदार बनाने की चुनौती होगी। सियासी जानकारों की नजर मुस्लिमों की भागीदारी पर टिकी है। कारण, विधानसभा चुनाव की आहट से पहले हो रही रैली में जुटने वाली भीड़ की भागीदारी काफी हद तक सियासी समीकरण का संकेत देंगे। 

आपको बता दें कि सहारनपुर सहित पूरे प्रदेश में सभी जातियों में सेंधमारी के लिए बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग का मंत्र अपनाया है। सहारनपुर में मुस्लिम, सैनी, गुर्जर, ब्राह्मण और दलितों को टिकट देकर इन जातियों को रिझाने की कोशिश की है।


ऐसे में वेस्ट यूपी के अन्य सीटों पर राजपूत, जाट सहित अन्य जातियों को साधने की कवायद की जा रही है। विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बनाने में जुटी बसपा की इस रैली के बाद सियासी समीकरण तेजी से बदलने की संभावना है। ऐसे में बसपा के साथ ही दूसरे राजनीतिक दलों की नजर भी इस रैली पर टिकी है। 
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