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साइबर क्राइम : सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
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सहारनपुर। साइबर क्राइम तेजी से बढ़ा है। बीते नौ महीने में ही 40 से ज्यादा मामले साइबर क्राइम के सामने आए हैं। पुलिस ने कई मामलों में गिरफ्तारी भी की, लेकिन साइबर क्राइम करने वाले बेहद शातिर हैं। नए हथकंडे अपनाकर ठगी कर रहे हैं। यह अपराधी दूसरे राज्यों के भी हैं, जिन्हें पकड़ पाने में पुलिस के सामने कड़ी चुनौती आ जाती है।
खास बात यह है कि बैंक खातों से ऑनलाइन नकदी निकालकर ठगी करने वाले अपने सिमकार्ड, बैंक खाता आदि सब फर्जी पहचानपत्र के जरिये खोलते हैं। ठगी की शिकायत आने पर जब पुलिस पड़ताल करती है तो उसमें ऐसे ही खुलासे हुए हैं, साथ ही जिस नंबर से साइबर क्राइम करने वाले कॉल करते हैं, वह वारदात के बाद बंद कर दिया जाता है। साइबर क्राइम करने वालों में कोई पश्चिम बंगाल, बिहार, भोपाल, रायपुर, जयपुर तो किसी का पहचानपत्र राजस्थान और दिल्ली का मिलता है, लेकिन वह भी फर्जी इस्तेमाल होने की वजह से आरोपी के सही ठिकाने तक पुलिस आसानी से पहुंच नहीं पाती है। यही वजह है कि साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
हाल में सामने आए प्रमुख मामले
- भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी कर फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनाए गए।
- लेबर कॉलोनी निवासी अलका शर्मा का बैंक खाता सीज होने का झांसा देकर एनी डेस्क रिमोट साफ्टवेयर के नाम का एप डाउनलोड कराकर एक लाख रुपये उड़ाए।
- एसडी इंटर कॉलेज के अध्यापक का एटीएम कार्ड बदलकर 45 हजार रुपये निकाले।
- खलासी लाइन निवासी सीमा को लॉटरी का झांसा 21 हजार रुपये उठाए।
- अंबाला रोड निवासी सरदार सतबीर के खाते से तीन लाख रुपये निकाले।
इन तरीकों को इस्तेमाल कर रहे साइबर ठग
- फर्जी बैंक अधिकारी बनकर एटीएम की गोपनीय जानकारी जुटाकर ठगी।
- फेसबुक पर प्रेमजाल में फंसाकर वीडियो काल करके ब्लैकमेल करना।
- नौकरी लगवाने एवं विदेश भेजने के नाम पर भी ठगों का पूरा जाल है।
- मोबाइल के सिम कार्ड को अपडेट करने के बहाने ठगी करना।
- आनलाइन डिस्काउंट के बहाने ठगी करना।
- सोने चांदी के जेवरात साफ करने के बहाने ठगी के कई मामले सामने आए हैं।
- फर्जी ई-मेल भेजकर लोगों से एक क्लिक कराकर ठगी करना।
- डेबिट-क्रेडिट कार्ड रिचार्ज प्वाइंट से रिवार्ड का झांसा देकर ठगी करना।
- मैट्रीमोनियल वेबसाइट के माध्यम से संपर्क करके शादी का झांसा देकर ठगी करना।
- फर्जी आयकर अधिकारी बनकर आनलाइन ठगी करना।
- टीवी में चेहरा पहचानों का विज्ञापन देखकर ठगी करना।
- मोबाइल टॉवर लगवाने को फाइल चार्ज के नाम पर ठगी।
बरतें यह सावधानी
- अनजान शख्स की कॉल, एसएमएस या सोशल मीडिया पर संदेश और लिंक का जवाब न दें।
- बैंक, एजेंसी, लोन ब्रांच के नाम पर किसी अनजान कॉलर को अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, आधार कार्ड या उसका नंबर, पैनकार्ड से लेकर ओटीपी ना बताएं।
- लोन, बीमा, पैसे दोगुने करने जैसे लालच में ना आएं।
70 लाख कराए वापस, 15 आरोपी पकड़े
सहारनपुर में मंडलीय साइबर अपराध थाना है। जिले में 40 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामले बीते नौ महीने के दौरान सामने आए हैं, जबकि 15 मामले दर्ज किए गए, साथ ही ठगी का शिकार हुए लोगों के करीब 70 लाख रुपये वापस कराए गए। बिहार, जयपुर, भोपाल और दिल्ली से ठगी के आरोपियों को भी पकड़ा है।
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ठगी के शिकार हुए लोगों की तत्काल मदद कर पैसा वापस कराया जाता है। नौ माह में कई मामलों का खुलासा कर आरोपियों को पकड़ा गया है। लंबित मामलों का भी जल्द खुलासा कराया जाएगा। साइबर अपराधियों के नए तरीकों को लेकर पुलिस भी नई रणनीति से काम कर रही है। -- डॉ. एस चनप्पा, एसएसपी
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खास बात यह है कि बैंक खातों से ऑनलाइन नकदी निकालकर ठगी करने वाले अपने सिमकार्ड, बैंक खाता आदि सब फर्जी पहचानपत्र के जरिये खोलते हैं। ठगी की शिकायत आने पर जब पुलिस पड़ताल करती है तो उसमें ऐसे ही खुलासे हुए हैं, साथ ही जिस नंबर से साइबर क्राइम करने वाले कॉल करते हैं, वह वारदात के बाद बंद कर दिया जाता है। साइबर क्राइम करने वालों में कोई पश्चिम बंगाल, बिहार, भोपाल, रायपुर, जयपुर तो किसी का पहचानपत्र राजस्थान और दिल्ली का मिलता है, लेकिन वह भी फर्जी इस्तेमाल होने की वजह से आरोपी के सही ठिकाने तक पुलिस आसानी से पहुंच नहीं पाती है। यही वजह है कि साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
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हाल में सामने आए प्रमुख मामले
- भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी कर फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनाए गए।
- लेबर कॉलोनी निवासी अलका शर्मा का बैंक खाता सीज होने का झांसा देकर एनी डेस्क रिमोट साफ्टवेयर के नाम का एप डाउनलोड कराकर एक लाख रुपये उड़ाए।
- एसडी इंटर कॉलेज के अध्यापक का एटीएम कार्ड बदलकर 45 हजार रुपये निकाले।
- खलासी लाइन निवासी सीमा को लॉटरी का झांसा 21 हजार रुपये उठाए।
- अंबाला रोड निवासी सरदार सतबीर के खाते से तीन लाख रुपये निकाले।
इन तरीकों को इस्तेमाल कर रहे साइबर ठग
- फर्जी बैंक अधिकारी बनकर एटीएम की गोपनीय जानकारी जुटाकर ठगी।
- फेसबुक पर प्रेमजाल में फंसाकर वीडियो काल करके ब्लैकमेल करना।
- नौकरी लगवाने एवं विदेश भेजने के नाम पर भी ठगों का पूरा जाल है।
- मोबाइल के सिम कार्ड को अपडेट करने के बहाने ठगी करना।
- आनलाइन डिस्काउंट के बहाने ठगी करना।
- सोने चांदी के जेवरात साफ करने के बहाने ठगी के कई मामले सामने आए हैं।
- फर्जी ई-मेल भेजकर लोगों से एक क्लिक कराकर ठगी करना।
- डेबिट-क्रेडिट कार्ड रिचार्ज प्वाइंट से रिवार्ड का झांसा देकर ठगी करना।
- मैट्रीमोनियल वेबसाइट के माध्यम से संपर्क करके शादी का झांसा देकर ठगी करना।
- फर्जी आयकर अधिकारी बनकर आनलाइन ठगी करना।
- टीवी में चेहरा पहचानों का विज्ञापन देखकर ठगी करना।
- मोबाइल टॉवर लगवाने को फाइल चार्ज के नाम पर ठगी।
बरतें यह सावधानी
- अनजान शख्स की कॉल, एसएमएस या सोशल मीडिया पर संदेश और लिंक का जवाब न दें।
- बैंक, एजेंसी, लोन ब्रांच के नाम पर किसी अनजान कॉलर को अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, आधार कार्ड या उसका नंबर, पैनकार्ड से लेकर ओटीपी ना बताएं।
- लोन, बीमा, पैसे दोगुने करने जैसे लालच में ना आएं।
70 लाख कराए वापस, 15 आरोपी पकड़े
सहारनपुर में मंडलीय साइबर अपराध थाना है। जिले में 40 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामले बीते नौ महीने के दौरान सामने आए हैं, जबकि 15 मामले दर्ज किए गए, साथ ही ठगी का शिकार हुए लोगों के करीब 70 लाख रुपये वापस कराए गए। बिहार, जयपुर, भोपाल और दिल्ली से ठगी के आरोपियों को भी पकड़ा है।
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ठगी के शिकार हुए लोगों की तत्काल मदद कर पैसा वापस कराया जाता है। नौ माह में कई मामलों का खुलासा कर आरोपियों को पकड़ा गया है। लंबित मामलों का भी जल्द खुलासा कराया जाएगा। साइबर अपराधियों के नए तरीकों को लेकर पुलिस भी नई रणनीति से काम कर रही है। -- डॉ. एस चनप्पा, एसएसपी