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हत्या में दोषी बिलाल को आजीवन कारावास
Updated Wed, 02 May 2018 12:04 AM IST
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हत्या में दोषी बिलाल को आजीवन कारावास
सहारनपुर। तीन साल पूर्व हुई इस्लामनगर के जमील अहमद की हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर गांव के ही बिलाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। बिलाल पर 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है जबकि दूसरे आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसे किशोर न्यायालय को भेजा गया है।
ग्राम इस्लामनगर निवासी जावेद ने नौ फरवरी 2015 को अपने पिता की हत्या का मामला दर्ज कराया। उसने कहा कि उसके पिता जमील अहमद फसल की खरीद फरोख्त करते थे। उसके पिता के पास 50 हजार रुपये थे। आठ फरवरी 2015 की शाम पांच बजे उसके पिता को गांव के ही बिलाल एवं एक किशोर के साथ देखा गया था। दूसरे दिन 9 फरवरी 2015 को सूचना मिली कि जमील का शव ग्राम दैदपुरा के जंगल में गन्ने के खत में पड़ा हुआ है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता जयवीर सिंह पुंडीर ने बताया कि पुलिस ने बिलाल और एक किशोर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया था।
मुकदमा अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन सुरेश चंद भारती की कोर्ट में चला। इसमें दोनों पक्षकारों की सुनवाई के बाद साक्ष्य एवं गवाहों के आधार पर दोषी पाते हुए बिलाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अलावा सबूत मिटाने का दोष सिद्ध होने पर धारा 201 के तहत पांच वर्ष की सजा एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। दूसरे हत्यारोपी के नाबालिग होने के कारण मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
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सहारनपुर। तीन साल पूर्व हुई इस्लामनगर के जमील अहमद की हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर गांव के ही बिलाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। बिलाल पर 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है जबकि दूसरे आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसे किशोर न्यायालय को भेजा गया है।
ग्राम इस्लामनगर निवासी जावेद ने नौ फरवरी 2015 को अपने पिता की हत्या का मामला दर्ज कराया। उसने कहा कि उसके पिता जमील अहमद फसल की खरीद फरोख्त करते थे। उसके पिता के पास 50 हजार रुपये थे। आठ फरवरी 2015 की शाम पांच बजे उसके पिता को गांव के ही बिलाल एवं एक किशोर के साथ देखा गया था। दूसरे दिन 9 फरवरी 2015 को सूचना मिली कि जमील का शव ग्राम दैदपुरा के जंगल में गन्ने के खत में पड़ा हुआ है।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता जयवीर सिंह पुंडीर ने बताया कि पुलिस ने बिलाल और एक किशोर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया था।
मुकदमा अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन सुरेश चंद भारती की कोर्ट में चला। इसमें दोनों पक्षकारों की सुनवाई के बाद साक्ष्य एवं गवाहों के आधार पर दोषी पाते हुए बिलाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अलावा सबूत मिटाने का दोष सिद्ध होने पर धारा 201 के तहत पांच वर्ष की सजा एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। दूसरे हत्यारोपी के नाबालिग होने के कारण मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
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