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ट्रेनें उड़ाने की धमकी देने वाला निकला पूर्व बीडीसी

Sun, 10 Sep 2017 12:51 AM IST
Updated Sun, 10 Sep 2017 12:51 AM IST
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ट्रेनें उड़ाने की धमकी देने वाला निकला पूर्व बीडीसी
सहारनपुर। स्टेशन अधीक्षक को पत्र लिखकर एक करोड़ रुपये मांगने और न देने पर पर खतौली जैसी ट्रेन दुर्घटना कराने की धमकी देने के मामले में दो आरोपियों को जीआरपी ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पकड़ा गया मुख्य आरोपी पूर्व बीडीसी सदस्य है। उसने तासीन नामक व्यक्ति को फंसाने के इरादे से उसके नाम से पत्र भेजा था।
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शनिवार को पत्रकार वार्ता में जीआरपी इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिसौदिया ने बताया कि सात सितंबर को स्टेशन अधीक्षक शिवपाल सिंह को तासीन नाम व्यक्ति के नाम से धमकी भरा पत्र मिला था। पत्र के साथ बैंक एकाउंट की पासबुक, आधार कार्ड, पहचान पत्र की छाया प्रति लगी थी। इसमें कहा गया था कि एक करोड़ रुपये खाते में डलवा देें, नहीं तो मुजफ्फरनगर के खतौली में हुई ट्रेन दुर्घटना जैसी घटना को सहारनपुर से हरिद्वार जाने वाली ट्रेनों में अंजाम दिया जाएगा। पैसा न देने पर रेलवे स्टेशन को उड़ाने तथा स्टेशन अधीक्षक को परिवार सहित जान से मारने की भी धमकी दी गई थी। जीआरपी ने तासीन निवासी कोलकी रांघड़ थाना देहात कोतवाली के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस की पड़ताल में थाना नागल क्षेत्र के गांव कोटा निवासी असगर उर्फ छोटन पुत्र अब्दुल कलीम और गांव इस्माइलपुर घसौली थाना कांधला जनपद शामली निवासी दीपक बैरागी पुत्र नवाब के नाम सामने आए। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें पकड़ा गया मुख्य आरोपी असगर पूर्व बीडीसी सदस्य है, जिसने तासीन को फंसाने के लिए उसके नाम से पत्र भेजा था।
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आवास दिलाने के नाम पर तासीन से लिए थे कागजात और 50 हजार
सहारनपुर। जीआरपी इंस्पेक्टर ने बताया कि असगर शातिर अपराधी है। उसने तासीन के नाम से पत्र भेज था। पुलिस ने तासीन से पूछताछ की तो मामले का खुलासा हुआ। तासीन ने असगर पर शक जताया। क्योंकि, तासीन से असगर ने ग्राम विकास योजना के तहत आवास दिलवाने के बदले 50 हजार रुपये, पासबुक, आधार कार्ड और पहचान पत्र की छायाप्रति ली थी। मगर तीन वर्ष बीतने के बाद भी न आवास मिला और न ही असगर ने रुपये लौटाए। पूछताछ में असगर ने बताया कि उसने तासीन को फंसाने के लिए उसके नाम से पत्र भेजा था।
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शेेखपुरा में दीपक से लिखवाया था पत्र
सहारनपुर। जीआरपी इंस्पेक्टर ने बताया कि तासीन को फंसाने के लिए असगर ने शेखपुरा स्थित एक मस्जिद में अपने साथी दीपक से पत्र लिखवाया था। ताकि उसकी हैंडराटिंग कोई पहचान न सके। इसके बाद कलक्ट्रेट के निकट स्थित पोस्ट ऑफिस से पत्र पोस्ट कर दिया था।
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