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कारगर रही पुलिस-प्रशासन की दबाव की नीति
Updated Thu, 10 May 2018 11:45 PM IST
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सहारनपुर। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई की गोली लगने से हुई मौत के बाद अचानक जिले भर में पैदा हुए तनाव और हालात बिगड़ने की स्थिति को देखते पुलिस, प्रशासन ने न सिर्फ पुलिस बल को सतर्क किया, बल्कि दबाव की नीति भी अपनाए रही। सिर्फ रामनगर को छोड़कर कहीं भी न तो लोग ही एकत्रित हो सके और न ही कहीं पर विरोध के स्वर सुनाई दिए।
पिछले वर्ष नौ मई को हुई सहारनपुर हिंसा से सबक लेते हुए पुलिस और प्रशासन ने इस बार पूरा मैनेजमेंट दिखाया। महाराणा प्रताप जयंती के मद्देनजर पुलिस और प्रशासन ने हर तरह की स्थिति से निपटने की तैयारी तो पहले से ही कर ली थी, लेकिन बुधवार को अचानक भीम आर्मी जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया के भाई सचिन वालिया की गोली लगने से मौत हो गई तो जिले भर के न सिर्फ पुलिस अधिकारियों को सतर्क कर दिया, बल्कि क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों और भीम आर्मी से जुड़े लोगों पर दबाव बना दिया। यही नहीं राजनीतिक लोगों से भी अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को समझा-बुझा कर शांति व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी सौंप दी। देहात क्षेत्र के संवेदनशील गांवों मल्हीपुर, नया गांव, बड़गांव, शब्बीरपुर, महेशपुर, शिमलाना, दल्हेड़ी, तिरफली कलां, अंबेहटा चांद, मुजफ्फरनगर-शामली सीमा के जड़ौदा पांडा एवं रामपुर मनिहारान के गांवों में पुलिस के अलावा पीएसी, आरएएफ की एक-एक कंपनी लगाई गई। एसपी देहात विद्यासागर मिश्र एवं मुजफ्फरनगर के एसपी के साथ एसडीएम इसकी कमान संभाले हुए थे। पुलिस और प्रशासन के इस मैनेजमेंट का पूरी तरह से असर नजर आया। न तो दूसरे जिले से कोई बड़ी भीड़ आ सकी और न ही किसी संवेदनशील गांव से कोई विरोध जताने के लिए सामने आ सका। यही नहीं बुधवार को भी पुलिस एवं प्रशासन ने ऐसा मैनेजमेंट दिखाया कि भीम आर्मी के बवाल को अस्पताल से बाहर नहीं निकलने दिया, जबकि गांव से उठ रहे विरोधी तेवरों को भी गांव तक ही सीमति कर दिया गया। जिससे जिले में कोई भी संवेदनशील घटना घटित नहीं हो सकी और जिले का माहौल भी बिगड़ने से बचा रहा।
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पिछले वर्ष नौ मई को हुई सहारनपुर हिंसा से सबक लेते हुए पुलिस और प्रशासन ने इस बार पूरा मैनेजमेंट दिखाया। महाराणा प्रताप जयंती के मद्देनजर पुलिस और प्रशासन ने हर तरह की स्थिति से निपटने की तैयारी तो पहले से ही कर ली थी, लेकिन बुधवार को अचानक भीम आर्मी जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया के भाई सचिन वालिया की गोली लगने से मौत हो गई तो जिले भर के न सिर्फ पुलिस अधिकारियों को सतर्क कर दिया, बल्कि क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों और भीम आर्मी से जुड़े लोगों पर दबाव बना दिया। यही नहीं राजनीतिक लोगों से भी अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को समझा-बुझा कर शांति व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी सौंप दी। देहात क्षेत्र के संवेदनशील गांवों मल्हीपुर, नया गांव, बड़गांव, शब्बीरपुर, महेशपुर, शिमलाना, दल्हेड़ी, तिरफली कलां, अंबेहटा चांद, मुजफ्फरनगर-शामली सीमा के जड़ौदा पांडा एवं रामपुर मनिहारान के गांवों में पुलिस के अलावा पीएसी, आरएएफ की एक-एक कंपनी लगाई गई। एसपी देहात विद्यासागर मिश्र एवं मुजफ्फरनगर के एसपी के साथ एसडीएम इसकी कमान संभाले हुए थे। पुलिस और प्रशासन के इस मैनेजमेंट का पूरी तरह से असर नजर आया। न तो दूसरे जिले से कोई बड़ी भीड़ आ सकी और न ही किसी संवेदनशील गांव से कोई विरोध जताने के लिए सामने आ सका। यही नहीं बुधवार को भी पुलिस एवं प्रशासन ने ऐसा मैनेजमेंट दिखाया कि भीम आर्मी के बवाल को अस्पताल से बाहर नहीं निकलने दिया, जबकि गांव से उठ रहे विरोधी तेवरों को भी गांव तक ही सीमति कर दिया गया। जिससे जिले में कोई भी संवेदनशील घटना घटित नहीं हो सकी और जिले का माहौल भी बिगड़ने से बचा रहा।
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