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दलितों के उग्र रूप को भांपने में नाकाम रही एलआईयू
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:36 AM IST
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सहारनपुर। बंद के दौरान सहारनपुर मंडल के खुफिया तंत्र को हिंसा का जरा सा भी अंदेशा नहीं था। सहारनपुर तो हिंसा की आग में जलने से बच गया। मगर मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा ने खुफिया तंत्र के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलाधिकारियों ने खुफिया तंत्र की विफलता पर जिस तरह नाराजगी जताई है उससे अगले कुछ दिनों में कई पर गाज गिरने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट के एससीएसटी एक्ट संशोधन को लेकर आहूत बंद में स्थानीय अभिसूचना इकाई दलितों के आक्रोश को भांपने में नाकाम रहा। किसी तरह की हिंसा का अंदेशा तक नहीं जताया गया था। सहारनपुर में भी घंटाघर पर पांच सौ से लेकर छह सौ तक लोगों के जुटने की आशंका जताई गई थी, जबकि दलित हजारों की संख्या में यहां पहुंचे थे। पुलिस ने यहां थोड़ा दिमाग जरूर चलाया था। दलित संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के साथ पुलिस लगातार संपर्क में रही, जिसका नतीजा पुलिस के हक में गया। मुजफ्फरनगर में भी हिंसा की कोई आशंका नहीं थी। हालात सामान्य होने की रिपोर्ट दी गई थी, जिसका नतीजा यह रहा कि पुलिस-प्रशासन ने आंदोलन को हल्के में लिया। मुजफ्फरनगर में हुुई हिंसा के बाद एलआईयू के विफल होने की कहानी जग जाहिर हो गई। आलाधिकारियों ने इस पर कड़ी आपत्ति भी जताई। सहारनपुर रेंज के डीआईजी शरद सचान का कहना है कि पहले जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। कहां किसकी लापरवाही रही, इसकी बाद में जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट के एससीएसटी एक्ट संशोधन को लेकर आहूत बंद में स्थानीय अभिसूचना इकाई दलितों के आक्रोश को भांपने में नाकाम रहा। किसी तरह की हिंसा का अंदेशा तक नहीं जताया गया था। सहारनपुर में भी घंटाघर पर पांच सौ से लेकर छह सौ तक लोगों के जुटने की आशंका जताई गई थी, जबकि दलित हजारों की संख्या में यहां पहुंचे थे। पुलिस ने यहां थोड़ा दिमाग जरूर चलाया था। दलित संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के साथ पुलिस लगातार संपर्क में रही, जिसका नतीजा पुलिस के हक में गया। मुजफ्फरनगर में भी हिंसा की कोई आशंका नहीं थी। हालात सामान्य होने की रिपोर्ट दी गई थी, जिसका नतीजा यह रहा कि पुलिस-प्रशासन ने आंदोलन को हल्के में लिया। मुजफ्फरनगर में हुुई हिंसा के बाद एलआईयू के विफल होने की कहानी जग जाहिर हो गई। आलाधिकारियों ने इस पर कड़ी आपत्ति भी जताई। सहारनपुर रेंज के डीआईजी शरद सचान का कहना है कि पहले जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। कहां किसकी लापरवाही रही, इसकी बाद में जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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