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आतंकियों को पूरे साल तलाशती रही एटीएस

Sun, 31 Dec 2017 12:09 AM IST
Updated Sun, 31 Dec 2017 12:09 AM IST
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आतंकियों को पूरे साल तलाशती रही एटीएस
सहारनपुर। पूरे साल जिले में आतंकी हमले का खतरा मंडराता रहा। एसटीएफ और एटीएस जिले में तलाशती रही, लेकिन बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी, जबकि सहारनपुर ही आतंकियों का पनाहगार बना रहा। यहां रह रहे आतंकी दूसरे जिलों में ही पकड़े जाते रहे। पुलिस ने भी जिले भर में पासपोर्ट चेकिंग अभियान चलाया, लेकिन कोई भी हाथ नहीं आया।
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सहारनपुर का आतंकी कनेक्शन काफी पुराना रहा है। लेकिन इस साल अगस्त से आतंकियों की धरपकड़ के लिए जो अभियान शुरू हुआ तो सहारनपुर में बांग्लादेशी आतंकियों को शरण दिए जाने का खुलासा हुआ। एक अगस्त को दिल्ली में कोलकाता पुलिस द्वारा बांग्लादेशी आतंकी को गिरफ्तार किया गया। जिसने खुलासा किया कि वह सहारनपुर के देवबंद में काफी समय से रह रहा था। इसके बाद तो एटीएस और एसटीएफ ने सहारनपुर में डेरा डाल दिया। एटीएस की टीम ने दो और तीन अगस्त को देवबंद में कई स्थानों पर छापामारी की, लेकिन कोई हाथ नहीं लगा। लेकिन जब 6 अगस्त को मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र से आतंकी अब्दुल्ला अल मामून को एटीएस और एसटीएफ ने एक मदरसे से गिरफ्तार किया तो बांग्लादेशी आतंकियों के सहारनपुर में शरण लेने का मामला पुख्ता हो गया। पुलिस ने ताबड़तोड़ छापामारी कर सहारनपुर और शामली से 7 लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन उनका कोई आतंकी कनेक्शन न होने के चलते छोड़ दिया गया। जबकि देवबंद में काफी समय से रह रहा बांग्लादेशी आतंकी फैजान फरार हो गया। फैजान के आवास से प्रिंटर, भारी मात्रा में बने, अधबने पहचान पत्र बरामद हुए। जिनके द्वारा फैजान फर्जी पासपोर्ट तैयार कराता था और आतंकियों को सहारनपुर में शरण दिलाता था। उसके फरार होने से यह राज फाश नहीं हो पाया कि कितने आतंकियों को उसने फर्जी पासपोर्ट बनाकर दिए। उसके बाद एटीएस ने लखनऊ रेलवे स्टेशन से तीन और बांग्लादेशी आतंकियों को गिरफ्तार किया, जो देवबंद से ही लखनऊ के लिए गए थे। उन्होंने भी सहारनपुर में ही काफी समय से रहने की बात स्वीकार की थी।
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उसके बाद भी एटीएस ने जाल बिछाए रखा, लेकिन सहारनपुर में कोई भी आतंकी एटीएस और एसटीएफ के हाथ नहीं लग सका। फैजान के फरार होने के चलते पासपोर्ट फर्जी बनाए जाने का मामला सामने आ चुका था। इस बार पुलिस और एलआईयू ने देवबंद और आसपास के क्षेत्र के बनाए गए पासपोर्टों का सत्यापन शुरू किया। महीनों तक चले सत्यापन के काम में भी पुलिस को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। अलबत्ता कई बाहरी लोगों के सहारनपुर में रहने के मामले सामने आए। जिसके बारे में पुलिस और प्रशासन को भी जानकारी नहीं थी। जिनमें से कुछ विदेशियों को पुलिस ने सहारनपुर से जबरन रवाना किया। जिले में अभी भी काफी लोग ऐसे रह रहे हैं जिनको लेकर संदेह बना रहता है। जिनमें कुछ कश्मीरियों के भी सहारनपुर में रहने का मामला सामने आ चुका है। जबकि बांग्लादेश के भी कई लोग सहारनपुर में रह रहे हैं। एटीएस और एसटीएफ की टीमें अभी भी सहारनपुर में डेरा डाले हुए हैं और संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।
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