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अवैध खनन में पांच आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
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अवैध खनन में पांच आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
सरसावा (सहारनपुर)। क्षेत्र के गांव झरौली में यमुना नदी के घाट पर रेत के अवैध खनन को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को लेखपाल की तहरीर पर अवैध खनन करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ सरसावा थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस मामले की जांच करने में लगी है।
बता दें कि खनन माफिया ने झरौली गांव में यमुना घाट पर सार्वजनिक भूमि से अवैध रेत खनन करने के साथ ही यमुना नदी की धारा को रोक कर अस्थायी मार्ग भी बना दिया था। मामला सुर्खियों में आने पर प्रशासन ने इसका संज्ञान लिया और मौके पर टीम भेजकर अस्थायी मार्ग ध्वस्त कराया गया था। वहीं, सोमवार को अपर जिलाधिकारी (वित्त) विनोद कुमार और एसडीएम परमानंद झा ने मौके पर निरीक्षण करने के बाद कार्रवाई कराने का निर्देश दिया था।
मंगलवार को लेखपाल अमित कुमार ने सरसावा थाने में अवैध खनन करने के आरोप में संजय, भुल्लन, ओमपाल, मोनू राणा और जितेंद्र जैन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोप लगाया कि यमुना नदी की धारा को अवरुद्ध कर अस्थायी मार्ग बनाया तथा श्मशान, चारागाह और रास्ते की भूमि से अवैध रेत खनन कर लोक संपत्ति का नुकसान पहुंचाया। साथ ही खनन भूमि को चिह्नित करने के लिए लगाए गए पिलर को भी उखाड़ दिया। एसओ सरसावा संजीव विश्रोई ने बताया कि लेखपाल की तहरीर पर पांचों आरोपियों के खिलाफ लोक संपत्ति अधिनियम की धारा एवं अवैध खनन के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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खेत से रेत उठाने को चार पट्टे की अनुमति
सरसावा थाना क्षेत्र के झरौली गांव में यमुना नदी के घाट पर खनन विभाग द्वारा खेतो से रेत उठाने के लिए चार पट्टो की अनुमति जारी की थी। पट्टा धारको की आड़ में माफियाओं ने स्वयं खनन शुरू कर दिया। संरक्षण मिलने के कारण खनन माफिया का दुस्साहस बढ़ गया और यमुना नदी में अस्थायी मार्ग बनाकर बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन शुरू कर दिया था। जेसीबी और अन्य मशीनें लगाकर रात के अंधेरे में न सिर्फ यमुना नदी से खनन किया जा रहा था, बल्कि अनुमति प्रदान पट्टे के स्थान पर श्मशान की भूमि से भी खनन शुरू कर दिया था। बता दें कि लेखपाल अमित ने करीब 15 दिन पहले ही इस संबंध में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी थी कि श्मशान भूमि से भी रेत खनन किया जा रहा है। जरूरत के हिसाब से यमुना नदी किनारे खेतों से रेत उठाने की अनुमति दी जाती है। लेकिन इन अनुमति की आड़ में किए जा रहे खनन को लेकर प्रशासन और खनन विभाग चुप्पी क्यों साधे रहा।
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सरसावा (सहारनपुर)। क्षेत्र के गांव झरौली में यमुना नदी के घाट पर रेत के अवैध खनन को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को लेखपाल की तहरीर पर अवैध खनन करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ सरसावा थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस मामले की जांच करने में लगी है।
बता दें कि खनन माफिया ने झरौली गांव में यमुना घाट पर सार्वजनिक भूमि से अवैध रेत खनन करने के साथ ही यमुना नदी की धारा को रोक कर अस्थायी मार्ग भी बना दिया था। मामला सुर्खियों में आने पर प्रशासन ने इसका संज्ञान लिया और मौके पर टीम भेजकर अस्थायी मार्ग ध्वस्त कराया गया था। वहीं, सोमवार को अपर जिलाधिकारी (वित्त) विनोद कुमार और एसडीएम परमानंद झा ने मौके पर निरीक्षण करने के बाद कार्रवाई कराने का निर्देश दिया था।
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मंगलवार को लेखपाल अमित कुमार ने सरसावा थाने में अवैध खनन करने के आरोप में संजय, भुल्लन, ओमपाल, मोनू राणा और जितेंद्र जैन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोप लगाया कि यमुना नदी की धारा को अवरुद्ध कर अस्थायी मार्ग बनाया तथा श्मशान, चारागाह और रास्ते की भूमि से अवैध रेत खनन कर लोक संपत्ति का नुकसान पहुंचाया। साथ ही खनन भूमि को चिह्नित करने के लिए लगाए गए पिलर को भी उखाड़ दिया। एसओ सरसावा संजीव विश्रोई ने बताया कि लेखपाल की तहरीर पर पांचों आरोपियों के खिलाफ लोक संपत्ति अधिनियम की धारा एवं अवैध खनन के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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खेत से रेत उठाने को चार पट्टे की अनुमति
सरसावा थाना क्षेत्र के झरौली गांव में यमुना नदी के घाट पर खनन विभाग द्वारा खेतो से रेत उठाने के लिए चार पट्टो की अनुमति जारी की थी। पट्टा धारको की आड़ में माफियाओं ने स्वयं खनन शुरू कर दिया। संरक्षण मिलने के कारण खनन माफिया का दुस्साहस बढ़ गया और यमुना नदी में अस्थायी मार्ग बनाकर बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन शुरू कर दिया था। जेसीबी और अन्य मशीनें लगाकर रात के अंधेरे में न सिर्फ यमुना नदी से खनन किया जा रहा था, बल्कि अनुमति प्रदान पट्टे के स्थान पर श्मशान की भूमि से भी खनन शुरू कर दिया था। बता दें कि लेखपाल अमित ने करीब 15 दिन पहले ही इस संबंध में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी थी कि श्मशान भूमि से भी रेत खनन किया जा रहा है। जरूरत के हिसाब से यमुना नदी किनारे खेतों से रेत उठाने की अनुमति दी जाती है। लेकिन इन अनुमति की आड़ में किए जा रहे खनन को लेकर प्रशासन और खनन विभाग चुप्पी क्यों साधे रहा।