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रिश्वत लेने के आरोपी लिपिक को बर्खास्त किया
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:30 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम के गृह कर विभाग में तैनात लिपिक राजकुमार वर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है। लिपिक पर रिश्वत लेने का आरोप था। जांच में भी रिश्वत लेने का आरोप सही पाया गया। जिसके बाद नगरायुक्त ने बृहस्पतिवार को लिपिक के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई कर दी। नगरायुक्त के कदम से निगम कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
राजकुमार वर्मा गृह कर विभाग में लिपिक थे। करीब छह महीने पहले उन पर 25 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। रिश्वत लेने हुए उनकी सीडी भी बना ली गई थी। शिकायतकर्ता ने सीडी साथ लगाकर तमाम अधिकारियों से लिपिक की शिकायत की थी। नगरायुक्त ने रिश्वत लेने के आरोप की जांच मुख्य नगर लेखा परीक्षक बालेन्दु मिश्रा को सौंपी थी। बालेंदु की जांच में रिश्वत लेने के आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद नगरायुक्त गौरव वर्मा ने राजकुमार वर्मा को अपना पक्ष रखने का एक मौका दिया था। मगर वह अपने आपको बेकसूर साबित नहीं कर सका। ऐसे में नगरायुक्त ने उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई कर दी। नगरायुक्त ने टिप्पणी भी लिखी है कि इस तरह के लोगों को यदि छोड़ा गया और नौकरी में बने रहे तो इनकी वजह से अन्य कर्मचारी भी प्रभावित होकर ऐसा गलम कदम उठा सकते हैं।
ड्राइवर से लिपिक बना था राजकुमार वर्मा
नगर निगम सूत्रों ने बताया कि राजकुमार वर्मा की मूल तैनाती ड्राइवर के पद पर हुई थी। आरोप है कि उसने पूर्व में रहे अधिकारियों से साठगांठ कर लिपिक का पद पाया था। पिछले करीब आठ साल से वह गृह कर विभाग में तैनात था। यह भी आरोप है कि वह सार्वजनिक रूप से मंडल और जिले के बड़े अधिकारियों को गालियां बकता था, जिसका ऑडियो भी जारी हुआ था।
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बर्खास्त किए गए लिपिक राजकुमार वर्मा पर रिश्वत लेने का आरोप था, जिसका वीडियो भी था। जांच में भी रिश्वत लेने की बात सच पाई गई थी। हमने आरोपी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था, मगर वह खुद को बेगुनाह साबित नहीं कर सका। ऐसे में बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई है।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।
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राजकुमार वर्मा गृह कर विभाग में लिपिक थे। करीब छह महीने पहले उन पर 25 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। रिश्वत लेने हुए उनकी सीडी भी बना ली गई थी। शिकायतकर्ता ने सीडी साथ लगाकर तमाम अधिकारियों से लिपिक की शिकायत की थी। नगरायुक्त ने रिश्वत लेने के आरोप की जांच मुख्य नगर लेखा परीक्षक बालेन्दु मिश्रा को सौंपी थी। बालेंदु की जांच में रिश्वत लेने के आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद नगरायुक्त गौरव वर्मा ने राजकुमार वर्मा को अपना पक्ष रखने का एक मौका दिया था। मगर वह अपने आपको बेकसूर साबित नहीं कर सका। ऐसे में नगरायुक्त ने उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई कर दी। नगरायुक्त ने टिप्पणी भी लिखी है कि इस तरह के लोगों को यदि छोड़ा गया और नौकरी में बने रहे तो इनकी वजह से अन्य कर्मचारी भी प्रभावित होकर ऐसा गलम कदम उठा सकते हैं।
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ड्राइवर से लिपिक बना था राजकुमार वर्मा
नगर निगम सूत्रों ने बताया कि राजकुमार वर्मा की मूल तैनाती ड्राइवर के पद पर हुई थी। आरोप है कि उसने पूर्व में रहे अधिकारियों से साठगांठ कर लिपिक का पद पाया था। पिछले करीब आठ साल से वह गृह कर विभाग में तैनात था। यह भी आरोप है कि वह सार्वजनिक रूप से मंडल और जिले के बड़े अधिकारियों को गालियां बकता था, जिसका ऑडियो भी जारी हुआ था।
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बर्खास्त किए गए लिपिक राजकुमार वर्मा पर रिश्वत लेने का आरोप था, जिसका वीडियो भी था। जांच में भी रिश्वत लेने की बात सच पाई गई थी। हमने आरोपी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था, मगर वह खुद को बेगुनाह साबित नहीं कर सका। ऐसे में बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई है।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।