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न चौकी पर चेकिंग, न थाने पर रोकटोक, शहर तक पहुंच रही अवैध खनन सामग्री
Updated Sat, 23 Dec 2017 12:38 AM IST
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सहारनपुर। जिले की सीमाओं से लेकर शहर तक थाने से होकर अवैध खनन करके खनन सामग्री पहुंच रही है। न चौकी पर चेकिंग हो रही और न ही थाने पर रोक टोक की जा रही है। जबकि खनन सामग्री के शहर में ढेर लगते जा रहे हैं। जिससे पुलिस और प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। न सिर्फ पुलिस और प्रशासन की शह पर खनन सामग्री का परिवहन हो रहा है, बल्कि जमकर अवैध खनन भी शुरू करा दिया गया है।
एनजीटी की रोक के बावजूद जिले में धड़ल्ले से खनन सामग्री का परिवहन हो रहा है। यह खनन सामग्री जिले के खनन के क्षेत्रों सरसावा, बेहट, बिहारीगढ़, चिलकाना, फतेहपुर, गंगोह, नकुड़ क्षेत्र से जिले भर में पहुंच रही है। इन क्षेत्रों में अवैध रूप से खनन का कारोबार शुरू करा दिया गया है। हरियाणा और उत्तराखंड की सीमा से भी ट्रकों की लाइन लगी हुई है। खनन सामग्री लेकर आने वाले ट्रकों के रास्ते में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों चौकियां और थाने पड़ते हैं। धड़ाधड़ गुजर रहे खनन सामग्री के ट्रकों को चेकिंग करना तो दूर, उनकी रोक-टोक तक नहीं की जा रही है। जिससे पुलिस की नीयत पर तो सवाल खड़े कर ही दिए हैं, प्रशासन की मंशा पर भी उंगली उठ रही है। जबकि कुछ समय पहले तक रेत, बजरी की एक बुग्गी तक ले जाना किसी के लिए मुमकिन नहीं था। पुलिस बुग्गी एवं ट्रैक्टर ट्रॉलियों तक पर कार्रवाई कर रही थी, लेकिन अचानक न जाने किसने खनन को हरी झंडी दे दी कि खुलेआम कारोबार शुरू हो गया। अवैध खनन और खनन सामग्री के परिवहन के सवाल पर पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों की चुप्पी ने मिलीभगत की आशंका भी बलवती कर दी है। इनके लिए एनजीटी के आदेश भी बेमाने नजर आ रहे हैं।
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एनजीटी की रोक के बावजूद जिले में धड़ल्ले से खनन सामग्री का परिवहन हो रहा है। यह खनन सामग्री जिले के खनन के क्षेत्रों सरसावा, बेहट, बिहारीगढ़, चिलकाना, फतेहपुर, गंगोह, नकुड़ क्षेत्र से जिले भर में पहुंच रही है। इन क्षेत्रों में अवैध रूप से खनन का कारोबार शुरू करा दिया गया है। हरियाणा और उत्तराखंड की सीमा से भी ट्रकों की लाइन लगी हुई है। खनन सामग्री लेकर आने वाले ट्रकों के रास्ते में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों चौकियां और थाने पड़ते हैं। धड़ाधड़ गुजर रहे खनन सामग्री के ट्रकों को चेकिंग करना तो दूर, उनकी रोक-टोक तक नहीं की जा रही है। जिससे पुलिस की नीयत पर तो सवाल खड़े कर ही दिए हैं, प्रशासन की मंशा पर भी उंगली उठ रही है। जबकि कुछ समय पहले तक रेत, बजरी की एक बुग्गी तक ले जाना किसी के लिए मुमकिन नहीं था। पुलिस बुग्गी एवं ट्रैक्टर ट्रॉलियों तक पर कार्रवाई कर रही थी, लेकिन अचानक न जाने किसने खनन को हरी झंडी दे दी कि खुलेआम कारोबार शुरू हो गया। अवैध खनन और खनन सामग्री के परिवहन के सवाल पर पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों की चुप्पी ने मिलीभगत की आशंका भी बलवती कर दी है। इनके लिए एनजीटी के आदेश भी बेमाने नजर आ रहे हैं।
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