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और इंस्पेक्टर दस हजार में काम करते हैं.... मैं आधे में कर दूंगा

Thu, 04 Oct 2018 12:49 AM IST
Updated Thu, 04 Oct 2018 12:49 AM IST
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और इंस्पेक्टर दस हजार में काम करते हैं.... मैं आधे में कर दूंगा
सहारनपुर।..... और इंस्पेक्टर दस हजार रुपये में काम करते हैं... मैं आधे में ही कर दूंगा और मुकदमे में भी बचाऊंगा... काम भी पूरा करूंगा... मैं इस प्रकार का इंस्पेक्टर हूं... कोशिश करता हूं मुकदमों से बचूं... प्रधान जी जानते हैं कि मैं कैसे काम करता हूं।
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सोशल मीडिया पर बड़गांव के एक इंस्पेक्टर का यह वीडियो खूब चटखारे लेकर सुना जा रहा है। इंस्पेक्टर दो हजार रुपये की रिश्वत लेकर जेब में रखता हुआ नजर आ रहा है और दो हजार रुपये देने वाला व्यक्ति तीन हजार रुपये बाद में देने की बात कह रहा है।
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जारी वीडियो में दिखाई दे रहा है कि जेब में रुपये रखते हुए इंस्पेक्टर एक व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए कह रहा है कि देखो ये प्रधान जी अच्छी तरह से जानते हैं कि वह कैसा इंस्पेक्टर है, पीछे से आवाज आ रही है कि पैसे लेकर इंस्पेक्टर फाइनल करके ही छोड़ते हैं। एक दरोगा का नाम लेते हुए कहा जा रहा है कि एक दरोगा उनसे दस हजार रुपये लेकर चला गया। वह उनके घर तक नहीं गया। इस पर इंस्पेक्टर बोलते हैं कि वह तो बिना पैसे लिए ही तीन बार उसके घर तक गया है। फिर कहा जाता है कि एक साल से मामला चल रहा है। दस हजार रुपये एक दरोगा को दिए गए थे। लेकिन कोई काम नहीं हुआ है। लेकिन अब उन्हें उम्मीद है कि उनका काम इंस्पेक्टर साहब कर देंगे।
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हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कितनी सच्चाई है यह तो पुलिस जांच से ही पता चल सकेगा। अमर उजाला इसकी सच्चाई का दावा भी नहीं कर रहा है। हालांकि यह वीडियो कुछ दिन पुराना बताया जा रहा है। जिसमें एक प्रधान का नाम भी बार-बार बोला जा रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में एक बार फिर पुलिस की छवि को बट्टा लगता नजर आ रहा हैं।
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-- वायरल हो रहे वीडियो की होगी जांच
एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल का कहना है कि वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की जांच कराई जाएगी। यह पता चल रहा है कि आरोपी फिलहाल इस जिले में तैनात नहीं है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
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-- वीडियो वायरल होने पर भी नहीं होती कार्रवाई
केस - 1
कुछ दिन पूर्व खनन के मामले में सिपाही प्रवीण द्वारा बेहट कोतवाली प्रभारी छोटे सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए वीडियो वायरल किया गया था, लेकिन आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, अपितु सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया गया था। सिपाही की पत्नी ने धरना भी दिया था और उत्पीड़न का भी आरोप लगाया था। वायरल वीडियो में खनन माफियाओं, पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगाए गए थे। उस समय जांच की बात कही गई, मगर नतीजा अब सामने नहीं आया हैं।
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केस - 2
नकुड़ में पैसे के बंटवारे को लेकर हुए झगड़े का वीडियो वायरल हुआ था। काफी दिन तक घटना की चर्चा रही। लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं की गई। झगड़ा करने वाले दोनों लोगों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। बाद में एलआईयू ने असलियत सामने लाते हुए रिपोर्ट दी। फजीहत से बचने को अधिकारियों ने बड़ी सफाई से यह मामला फाइलों में दबा दिया।
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केस - 3
सरसावा में अवैध खनन लेकर आ रहे ट्रकों से अवैध वसूली का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। जिसमें पुलिस की काफी किरकिरी भी हुई। लेकिन आंखों पर पट्टी बांधे बैठे अधिकारियों ने इस वीडियो के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की।
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केस - 4
कुछ माह पूर्व गंगोह के ग्राम ताताहेड़ी में पुलिस ने एक फौजी के 80 वर्षीय पिता और उसके भाई के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की थी। मामला लेखपाल से विवाद का था। जिसकी वीडियो भी वायरल हुई। जिसमें साफ नजर आ रहा था कि पुलिसकर्मी फौजी के पिता के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। उसके बाद गंगोह थाना प्रभारी की फौजी को धमकाते हुए ऑडियो भी वायरल हुई थी। फौजी ने न्याय के लिए काफी संघर्ष किया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा।

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-- वीडियो की सच्चाई के बाद ही होती है कार्रवाई
वीडियो पब्लिक द्वारा बनाया गया है तो उसकी सत्यता की जांच कराई जाती है। कई मामलों में वीडियो से छेड़छाड़ कर तब्दीली के भी पाए गए हैं। जो वीडियो किसी पुलिसकर्मी द्वारा बनाया जाता है, उसे अनुशासनहीनता मानी जाती है। हालांकि आरोपों की जांच अवश्य की जाती है। उसके बाद ही कोई कार्रवाई होती है।
- उपेंद्र कुमार अग्रवाल, एसएसपी, सहारनपुर।
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